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अचानक नहीं हुई अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी, उद्धव सरकार ने की थी ये स्पेशल प्लानिंग

मुंबई
इंटीरियर डिजाइनर और उनकी मां को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी (Arnab Goswami) की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के लिए पूरी तैयारी की गई थी। NCP नेता अनिल देशमुख की अगुवाई वाले महाराष्ट्र के गृह विभाग ने अर्णब की गिरफ्तारी के लिए कोंकण रेंज के आईजी संजय मोहिते के अगुवाई में 40 सदस्यों की उच्च स्तरीय टीम का गठन किया था।

इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां कुमुद को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के दो साल पुराने मामले में जांच के लिए केस के दोबारा खोले जाने की रायगढ़ पुलिस की इजाजत के बाद ‘ऑपरेशन अर्णब’ की तैयारी शुरू हो गई थी। मुंबई और रायगढ़ से कुल 40 पुलिसकर्मियों को इकट्ठा किया गया था।

अर्णब को गिरफ्तार करने की योजना को मोहिते ने तैयार किया। वहीं हाई प्रोफाइल एनकाउंटर स्पेशलिस्ट सचिन वाजे को क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई। मीडिया  से बातचीत में कैबिनेट के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया, ‘अर्णब काफी शक्तिशाली पत्रकार हैं। ऐसे में मोहिते की अगुवाई वाली टीम के लिए इस प्लान को अमलीजामा पहना पाना काफी चुनौतीपूर्ण था। हमने काफी सावधानी से काम किया। उकसावे के तमाम प्रयासों के बावजूद टीम के हर एक सदस्यों ने संयम बरता।’

‘मिशन के लीक होने का था खतरा’
उन्होंने बताया, ‘केस की शुरुआती जांच के बाद ही यह कन्फर्म हो गया कि आत्महत्या के लिए उकसाने में अर्णब शामिल हैं। यह एक सीक्रेट मिशन था। हमारे लोगों ने अर्णब की बिल्डिंग के कई चक्कर लगाए। हमें डर था कि अगर कहीं यह बात लीक हो गई तो अर्णब गिरफ्तारी से बचने के लिए शहर छोड़ सकते हैं।’

हर छोटी बात की थी प्लानिंग
इस ऑपरेशन की अच्छे से तैयारी की गई थी। हर छोटी बात का ध्यान रखा गया। यह पहले से तय था कि दरवाजा कौन खटखटाएगा, अर्णब और उनकी फैमिली से बात कौन करेगा, विरोध होने पर कैसा ऐक्शन लिया जाएगा। अर्णब ने प्रतिरोध भी किया। वाजे ने उन्हें जांच में सहयोग नहीं करने के कानूनी पहलू से भी अवगत कराया। सबकुछ आराम से निपट गया।

वहीं अनिल देशमुख ने फडणवीस सरकार पर इस केस को रफा-दफा करने की कोशिश का इल्जाम लगाया। उन्होंने कहा, ‘जब मैंने विधवा और उनकी बेटी की व्यथा सुनी तो मुझे काफी झटका लगा। मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि ऐसा महाराष्ट्र में हो सकता है। हम नाइक परिवार को न्याय दिलाएंगे।’ उन्होंने कहा कि बीजेपी ने कोई सबूत ना होने के बावजूद सुशांत केस का राजनीतिकरण किया। लेकिन यहां तो स्पष्ट तौर पर सूइसाइड नोट है।

यह है मामला
आरोप के मुताबिक, रिपब्लिक टीवी पर आर्टिकेक्ट फर्म कॉन्कॉर्ड डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड के एमडी अन्वय नाइक का 83 लाख रुपया बकाया था। नाइक ने रिपब्लिक टीवी का स्टूडियो तैयार किया था। दो अन्य कंपनियां- आईकास्टएक्स/स्काइमीडिया और स्मार्टवर्क्स भी अपना-अपना बकाया चुकाने में नाकाम रहीं। पुलिस के मुताबिक, तीनों कंपनियों पर कुल 5.40 करोड़ रुपये का बकाया था। रिपब्लिक टीवी की तरफ से भु्गतान नहीं होने की वजह से नाइक और बाद में उनकी मां ने कथित रूप से खुदकुशी कर ली थी।

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