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अफ्रीका के लिए आलीशान घर, दफ्तर और सैन्य अड्डे बनाए चीनी, फिर उनमें लगा दिये स्पाई कैमरे !

लोगों का डेटा चोरी करना, अवैध रूप से जासूसी करना चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का पुराना एजेंडा रहा है। टिकटॉक और Zoom app जैसी applications हो या फिर Xiaomi जैसी मोबाइल कंपनियाँ, कम्युनिस्ट पार्टी हर जरिये से आपके पास पहुँचकर आपके डेटा को चुराने की कोशिश में जुटी रहती है।

हालांकि, मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। अब कुछ शोधों के अनुसार इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि चीन अफ्रीका में बनाई सरकारी इमारतों के जरिये भी जासूसी कर रहा हो। अमेरिका के एक थिंक टैंक Heritage Foundation के मुताबिक, China द्वारा अफ्रीका में बनाई 186 इमारतों में 14 ऐसे बेहद संवेदनशील अंतर-सरकारी टेलिकम्युनिकेशन नेटवर्क स्थापित हैं जिसके जरिये चीन आसानी से बड़े अफ्रीकी नेताओं की जासूसी कर सकता है।

बता दें कि चीन ने बड़े पैमाने पर अफ्रीका में सरकारी इमारतें बनाने में पैसा निवेश किया है। इन इमारतों में military headquarters से लेकर अफ्रीकी नेताओं के घरों और ऑफिसों तक, सब शामिल हैं।

आइए नज़र डाल लेते हैं अफ्रीका के किन देशों में China ने कितनी सरकारी इमारतें बनाई हैं :

इमारतों में निवेश अफ्रीका में कोई फायदे का सौदा नहीं है। हालांकि, फिर भी चीन द्वारा इस क्षेत्र में इतनी रूचि दिखाना संदेह पैदा करता है। चीनी सरकार इन बड़ी-बड़ी इमारतों को अफ्रीकी सरकारों को “उपहार” में देती है, और बदले में उन नेताओं से चीन के पक्ष में फैसले लेने के लिए कहा जाता है। इसके अलावा चीन द्वारा इन इमारतों के निर्माण में इतनी रूचि लेने का सबसे बड़ा कारण अफ्रीकी नेताओं और अधिकारियों की जासूसी करना भी हो सकता है।

साल 2018 में भी चाइना एक्सपोज हुआ था

अगर चीन द्वारा अफ्रीकी इमारतों में जासूसी के इतिहास पर नज़र डाली जाये, तो China पर शक और ज़्यादा बढ़ जाता है। वर्ष 2018 में एक फ्रेंच अखबार Le monde ने एक article में यह दावा किया था कि अफ्रीका द्वारा बनाई गयी अफ्रीकन यूनियन (AU) की इमारत में चीन द्वारा लगाए गए कम्यूटर अजीब तरीके से डेटा को किसी सर्वर में ट्रांसमिट करते थे।

उस रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि वर्ष 2017 में एक बार AU के टेकनीशियन्स ने रात के 2 बजे देखा कि इमारत के सर्वर डेटा की बेहद ज़्यादा खपत कर रहे थे, जबकि रात को 2 बजे उस इमारत में कोई था भी नहीं! जब जांच हुई तो यह सामने आया कि सारा डेटा शंघाई के किसी सर्वर में ट्रांसमिट किया जा रहा था।

अफ्रीका में चीन द्वारा जितनी भी इमारतें बनाई गयी हैं, उनमें सब में चीनी कंपनियों द्वारा बनाए गए computers को ही Install किया गया है। ऐसे में इस बात का शक बढ़ जाता है कि कहीं चीन इन सब इमारतों के जरिये अफ्रीकी नेताओं पर नज़र तो नहीं रखता!

Xiaomi फोन से चीन दुनियाभर के लोगों की डेटा चुराता है

वैसे भी आज चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अपनी Chinese apps और Chinese mobile manufacturers के जरिये बड़ी ही आसानी से आपका डेटा चीन मंगा सकती है। इसका एक उदाहरण हमें तब देखने को मिला था जब Forbes में छपी हाल ही की एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ रिसरचर्स ने यह दावा किया था कि Xiaomi ना सिर्फ मोबाइल में इन्स्टाल हुई कुछ एप्स का डाटा चीन के किसी सर्वर में भेजता है, बल्कि वेब browser में browse किए जाने वाले URLs से जुड़ी जानकारी को भी कहीं फोन से बाहर भेजा जाता है, फिर चाहे यूजर किसी भी मोड में browser को इस्तेमाल कर रहा हो।

दुनिया के किसी कोनें में बैठें हों लेकिन चीन आपसे डेटा चुरा सकता है

बेशक आप चीन की सीमा से कोसों दूर बैठे हों, लेकिन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी आपके बिलकुल पास है, और जब चाहे आपसे अपने मतलब का डेटा निकाल सकती है। अफ्रीकी देशों को जल्द से जल्द अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपनी सभी महत्वपूर्ण इमारतों की cyber security को मजबूत करने की ज़रूरत है।

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