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देश में अब ज्यादा कोरोना टेस्ट की जरूरत नहीं, विस्तार से समझिए वजह

कोरोना वायरस के संक्रमण से मुकाबले की रणनीति को लेकर अलग अलग जानकारों की राय अलग अलग रहती है। ज्यादातर जानकार इस बात पर सहमत हैं कि टेस्टिंग ज्यादा होनी चाहिए, इससे संक्रमण का पता लगाने और उसे रोकने में मदद मिलती है। पर क्या संक्रमण फैलना शुरू होने के करीब 10 महीने बाद भी संक्रमण रोकने के उपायों की जरूरत है? ध्यान रहे पूरे देश में इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, आईसीएमआर की ओर से कराए गए सीरो सर्वेक्षण से पता चला है कि 10 साल से ज्यादा उम्र के देश के करीब सात करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं और उनमें से ज्यादातर को पता भी नहीं चला और वे ठीक हो गए।

सोचें, जब सात करोड़ लोग संक्रमित हो चुके थे अगस्त में तो उन्होंने और कितने करोड़ लोगों को संक्रमित किया होगा और संक्रमण किस स्तर तक फैल गया होगा? ऐसे में क्या उसे अब फैलने से रोका जा सकता है? वैसे भी अब किसी भी संक्रमित मरीज के संक्रमण के स्रोत का पता नहीं चल पा रहा है और कांटेक्ट ट्रेसिंग भी बंद हो गई है।

तभी अब ज्यादा टेस्ट की जरूरत नहीं है। कई जानकार यह सवाल उठा रहे हैं कि अभी अगर टेस्ट बढ़ा दिया जाए तो उससे क्या होगा? जैसे देश में अभी 11 लाख टेस्ट हो रहे हैं और 80 हजार संक्रमित मिल रहे हैं। अगर 15 लाख टेस्ट कर दिए जाएं तो एक लाख संक्रमित मिलेंगे, लेकिन उससे क्या हासिल होगा? उससे तो संक्रमण फैलने से रोका नहीं जा सकेगा! तभी सबकी जांच की बजाय जिनमें लक्षण हों या जिनको जरूरत महसूस उनकी जांच हो और इलाज की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाए।

संक्रमण के दस महीने बाद जांच पर करोड़ों रुपए खर्च करने की बजाय अब इलाज पर फोकस करना चाहिए। ज्यादा जांच करके मरीजों का पता लगाने और संक्रमण फैलने से रोकने का समय निकल गया है। मई-जून तक यह समय था। तब तक कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं हुआ था और लोगों को संक्रमण के स्रोत का पता चल रहा था। अब पता नहीं चल रहा है तो ज्यादा टेस्ट करके भी कुछ हासिल नहीं होना है।

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