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पंजाब के 5 लाख फर्जी किसानों ने PM KISAN योजना का लाभ उठाया, अब मोदी सरकार कसेगी शिकंजा

एक अहम खुलासे में पंजाबी किसानों के घपलेबाजी की पोल खोलते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने बताया है कि पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम के अंतर्गत 20 लाख किसानों ने फर्जीवाड़ा करके केंद्र सरकार से लगभग 1364 करोड़ रुपये ऐंठे हैं, जिनमें से सर्वाधिक संख्या पंजाबी किसानों की है।

एक आरटीआई याचिका के जवाब में केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने बताया कि किस प्रकार से कुछ लोगों ने किसानों के नाम से आवेदन करके 1,364 करोड़ रुपये ऐंठे हैं, जिनसे निपटने के लिए केंद्र सरकार अब एक मजबूत ब्लूप्रिंट तैयार कर रही है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, “पीएम किसान सम्मान निधि के सिस्टम में सेंध लगाकर 20.48 लाख अयोग्य लाभार्थियों ने 1,364 करोड़ रुपये डकार लिए। इनमें से सबसे ज्यादा पंजाब के किसान हैं। इसके बाद असम, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश का नंबर आता है। इन अयोग्य लाभार्थियों में आधे से अधिक (55.58 फीसद) आयकर दाता हैं। बाकी 44.41 फीसद वे किसान हैं, जो योजना से संबंधित आवश्यकताएँ पूरी नहीं करते हैं। अयोग्य लाभार्थियों को भुगतान की गई राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गलत तरीके से लिया गया पैसा वापस नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है”।

परंतु कौन कौन से लोग इस स्कीम के अंतर्गत लाभ लेने के योग्य नहीं है? पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम के अंतर्गत निम्न प्रकार के लोग लाभार्थी नहीं हो सकते।

  • जो कृषि भूमि का उपयोग कृषि छोड़ अन्य व्यवसायों के लिए करते हों
  • जो किसान खेती तो कर रहे हों, पर खेती वाली भूमि का स्वामी नहीं हो
  • जो किसान आयकर दाता हो
  • अगर कोई कृषि भूमि का स्वामी है, परंतु वह किसी भी बड़े व्यवसाय से संबंधित हो अथवा पूर्व सांसद, विधायक, मंत्री रहा हो

अब इस धांधली में सर्वाधिक किसान पंजाब से पाए गए हैं। आरटीआई याचिका से प्राप्त जानकारी के अनुसार पंजाब से कुल 4 लाख 74 हजार लाभार्थी हैं, जिन्होंने गलत तरीके से पैसा अर्जित किया है, जो सभी गलत लाभार्थियों में सर्वाधिक 23 प्रतिशत है। इसके अलावा सबसे ज्यादा लाभार्थी असम और महाराष्ट्र के है, जो पंजाब को मिलाकर 1364 करोड़ रुपये डकारने वाले फर्जी किसानों में लगभग 54 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखते हैं।

इतना ही नहीं, इन तीन राज्यों के अलावा गुजरात में भी कुल अयोग्य लाभार्थी 8.05 फीसद (1.64 लाख लाभार्थी)  और उत्तर प्रदेश में 8.01 फीसद (1.64 लाख) अयोग्य लाभार्थी रहते हैं। लेकिन जो पंजाब से खबरें आई हैं, उससे न सिर्फ ये सिद्ध होता है कि वर्तमान कृषि कानूनों से पहले पंजाब के आढ़ती और अमीर किसान किस प्रकार से पुरानी व्यवस्था का दुरुपयोग करते आए हैं, बल्कि ये भी सिद्ध होता है कि किस प्रकार से पंजाब के फर्जी किसान विभिन्न सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठाने के बाद अब सरकार के सुधारवादी कदमों का विरोध करते फिर रहे हैं।

लेकिन केंद्र सरकार भी अब चुप बैठने वाली नहीं है। यदि सब कुछ सही रहा, तो केंद्र सरकार इन फर्जी किसानों से वो 1364 करोड़ रुपये भी वसूलेगी और किसी भी प्रकार की ना-नुकूर पर ताबड़तोड़ कार्रवाई भी करेगी। अब भ्रष्टाचार किसी भी स्तर का हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

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