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‘अब हिम्मत है तो रूस भेज कर दिखाओ जासूस’, चीन को सबक सिखाने की तैयारी कर लिए हैं पुतिन

बाइडन के आने के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बेशक चीन के प्रति नर्म रुख दिखाने का प्रयास कर रहे हों, लेकिन इसका अर्थ यह बिलकुल नहीं है कि वे अपने देश में बढ़ते चीनी दख्ल पर आँख मूंदकर बैठ जाएँगे। पुतिन ने अपने हालिया कदम से रूस में रहकर विदेशी पैसे पर शोध कार्यों, सैन्य तकनीक पर रिसर्च कर रहे लोगों और संस्थानों पर नकेल कसने की योजना बनाई है। पिछले कुछ समय से रूस में चीन के जासूसी नेटवर्क को लेकर चिंता बढ़ी है और रूस में सार्वजनिक तौर पर चीन पर रूसी सैन्य तकनीक चुराने के आरोप लग चुके हैं। ऐसे में माना जा सकता है कि पुतिन ने अपने नए कानून से चीन को ही निशाने पर लिया है।

बीते बुधवार को संबन्धित बिल पर पुतिन ने हस्ताक्षर कर उसे कानून की शक्ल दे दी है, जिसके तहत रूस में “विदेशी एजेन्टों” की परिभाषा को विस्तृत कर दिया गया है। अब रूस में अगर कोई भी व्यक्ति विदेशी फंडिंग पर रूसी सैन्य तकनीक पर रिसर्च करता है, तो उसे विदेशी एजेंट घोषित कर दिया जाएगा। साथ ही हर विदेशी एजेंट को हर तीन महीने में अपने वित्तीय लेन-देन की जानकारी रूसी सरकार को देनी होगी। सबसे पहले वर्ष 2012 में यह कानून लाया गया था, और तब इसमें सिर्फ मीडिया और सिविल सोसाइटी ग्रुप्स से जुड़े बाहरी लोगों को विदेशी एजेंट घोषित करने के प्रावधान थे। अब उस कानून में बदलाव कर उसे और विस्तृत कर दिया गया है।

माना जा रहा है कि पुतिन के इस कानून के निशाने पर कोई और नहीं, बल्कि चीन ही है। दरअसल, अन्य किसी देश की तरह ही रूस में भी चीन अपने जासूस-नेटवर्क को मजबूत करने में लगा है, जिसके जरिये वह देश से बेहद गोपनीय सैन्य तकनीक हथियाना चाहता है। इसी वर्ष जून में रूस ने अपने एक मुख्य Arctic शोधकर्ता पर चीन के लिए जासूसी करने के आरोप लगाए थे और उसे house arrest कर दिया था। रूस ने अपने वैज्ञानिक पर आरोप लगाए थे कि उसने चीन को underwater navigation, underwater communication और सबमरीन से जुड़ी कुछ गोपनीय तकनीक को चीन को सौंपा था। रूसी सरकार ने इस खबर को सार्वजनिक कर चीन को भी एक कडा संदेश भेजा था कि वह चीन की इन हरकतों को बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा।

इतना ही नहीं, पिछले वर्ष दिसंबर में रूसी सरकारी डिफेंस कंपनी Rostec ने चीन पर रूसी सैन्य तकनीक को चोरी कर duplicate हथियार बनाने के भी आरोप लगाए थे। इतना ही नहीं, पूर्व में रूसी सेना और रूसी स्पेस एजेंसी सुरक्षा कारणों की वजह से चीन की Huawei कंपनी को 3.4-3.8 GHz की frequency देने के खिलाफ़ आवाज़ उठा चुकी है।

स्पष्ट है कि पुतिन अपने देश में बढ़ते चीनी दख्ल को लेकर खुश बिलकुल नहीं हैं और वे अब अपने नए कानून के जरिये देश में चीन के पैसे पर पल रहे विदेशी एजेन्टों की धर-पकड़ करना चाहते हैं, ताकि उनका सफाया किया जा सके। कुल लोग यह भी मानते हैं कि अगले साल के संसदीय चुनावों से पहले पुतिन यह कानून पारित कर अपने विरोधियों को चुप कराना चाहते हैं।

हालांकि, पूर्व की घटनाओं को देखते हुए यहाँ चीनी एंगल जोड़ने से भी परहेज़ नहीं किया जाना चाहिए। पुतिन ने एक बार फिर अपने कदम से साफ कर दिया है कि चीन के साथ रूस की दोस्ती सिर्फ बाइडन प्रशासन को कड़ा संदेश भेजने तक ही सीमित है और वे इस साझेदारी को सैन्य और रणनीतिक साझेदारी में बदलने के मूड में बिलकुल नहीं है।

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