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किसान आंदोलन का ‘पोस्टर बॉय’ है अमृतसर का ये नौजवान, जानें कौन हैं सिमरजीत सिंह?


नई दिल्ली : 
‘विरोध जताने के लिए जोर से चिल्लाना जरूरी नहीं होता।’ यह कहना है सिमरजीत सिंह का जो अमृतसर के रहने वाले हैं और मोहाली में एक म्यूजिक कंपनी में काम करते हैं। सिमरजीत सिंह पिछले एक महीने के से किसान आंदोलन की साइट पर धरने पर बैठे हैं। नारों के माध्यम से दूसरों की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए वह प्रोटेस्ट साइट पर अपने लेखन कौशल का उपयोग कर रहे हैं।

कोरोना की वजह से नए काम आने बंद हो गए थे
सिमरजीत सिंह कहते हैं, कोरोना महामारी की वजह से नए असाइनमेंट आने बंद हो गए और कुछ ज्यादा काम बचा नहीं है, लेकिन मैं हफ्ते में एक बार अपने ऑफिस जरूर जाता हूं। मैंने फैसला किया है कि अपने इस मौके का इस्तेमाल इस नेक काम और आंदोलनकारी किसानों की मदद करने में करूंगा।’

चार्ट पेपर, स्केच पेन लेकर शेल्टर होम के बाहर बैठते हैं सिमरजीत
सिमरजीत रोज एक शेल्टर होम के बाहर चार्ट पेपर, स्केच पेन और कुछ किताबों के साथ बैठते हैं। यहां वह 300-400 लोगों के लिए मुफ्त में नारे लिखते हैं। पेपर पर कुछ भी लिखने से पहले वह लोगों की भावनाओं को समझने के लिए उनसे बात करते हैं। सिमरजीत कहते हैं कि अलग-अलग तरह के लोगों से संपर्क करने की वजह से वह इस आंदोलन और इसके उद्देश्य को और भी बेहतर तरीके से समझ पाए हैं। मीडिया टीम जब गुरुवार को जब उस जगह पहुंची तो सिमरजीत की मेज के सामने लोगों की लंबी कतार दिखी। ये सभी लोग उनसे हिंदी, पंजाबी या अंग्रेजी में नारे लिखने का अनुरोध कर रहे थे।

लोगों ने काम पर ध्यान दिया और फिर मांग बढ़ गई
सिमरजीत बताते हैं, ‘जब मैं अमृतसर से यहां आया था तो मेरे पास कुछ चार्ट पेपर और मेरी जेब में कुछ स्केच पेन थे। मैंने अपने विचार लिखे और उन्हें शेल्टर होम की दीवारों पर चिपका दिया। शेल्टर होम में आने वाले या वहां से गुजरने वाले लोगों ने मेरे काम पर ध्यान दिया और जल्द ही मेरे पास पोस्टर बनाने व नारे लिखने की मांग आने लगी।’

पोस्टर बनाने या नारे लिखने का पैसा नहीं लेते सिमरजीत
सिमरजीत आगे बताते हैं कि पोस्टर बनाने या नारे लिखने के लिए मैं कोई भी पैसा नहीं लेता, लेकिन अगर लोग अपनी मर्जी से कुछ पैसे छोड़ जाते हैं तो उनका इस्तेमाल मैं स्टेशनरी खरीदने के लिए करता हूं। सिमरजीत ने कहा कि इन पोस्टरों को धरना स्थल पर ले जाने के अलावा लोग इनका इस्तेमाल सोशल मीडिया पर भी करते हैं जिससे आंदोलन को और ज्यादा लोकप्रिय बनाया जा सके।

ऐसा कुछ भी नहीं लिखता जिससे किसी को पीड़ा हो
लोगों की भावनाओं को समझने के बाद सिमरजीत ने कुछ नारे लिखे। जैसे- ‘किसान देश की रीढ़ हैं और हमें उनके अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।’ दूसरा, ‘हम यहां जीतने के लिए आए हैं और हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।’ सिमरजीत कहते हैं, ‘जो भी हो, मैं यह सुनिश्चित करता हूं कि मेरे लेखन से किसी को पीड़ा ने हो। मैं ऐसा कुछ भी नहीं लिखता जो किसी दूसरे को नीचा दिखाए। हमारा उद्देश्य है कि हम शांतिपूर्वक अपने लक्ष्य को प्राप्त करें क्योंकि शब्द अक्सर पहाड़ों को हिला देते हैं।’ सिमरजीत ने बताया कि पोस्टर में के आखिरी में उनका नाम अंकित होता है।

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