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गुआम : हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के इस अड्डे से आखिर क्यों उड़ी हुई है चीन की नींद ?

प्रशांत क्षेत्र के गुआम द्वीप पर स्थित एंडरसन एयर फोर्स बेस प्रमुख अमेरिकी सैन्य सुविधाओं का केंद्र है, जो एशिया प्रशांत क्षेत्र में किसी भी संघर्ष का जवाब देने के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। गुआम पर सिर्फ एयर बेस ही नहीं बल्कि अमेरिका की नेवल बेस भी मौजूद है। चीन को यह बात पता है कि जब तक अमेरिका गुआम द्वीप पर मौजूद है तब तक Indo-Pacific में उसकी कोई भी सैन्य कार्रवाई सुरक्षित नहीं है। चीन कोई भी सैन्य कदम उठता है, अमेरिका गुआम द्वीप पर अपनी हलचल बढ़ा देता है। आखिर ऐसा क्या है गुआम द्वीप पर जिससे चीन की साँसे फुली हुई रहती है?

गुआम का रणनीतिक महत्व इसके भगौलिक स्थिति के कारण अधिक है। गुआम, लगभग तीस मील लंबा और दस मील चौड़ा, मारियाना द्वीपसमूह का सबसे बड़ा द्वीप है। हवाई और एशिया के बीच प्रशांत के 5,000 मील की दूरी को पार करने के रास्ते में गुआम एकमात्र द्वीप है जहां संरक्षित बंदरगाह और प्रमुख हवाई अड्डों, दोनों के लिए पर्याप्त भूमि हैं। गुआम जापान, पापुआ न्यू गिनी और ऑस्ट्रेलिया से लगभग 3,000 मील उत्तर-धुरी पर संचार, शिपिंग और सैन्य प्रतिष्ठानों के लिए सबसे बड़ा केंद्र भी है।

इस भूगोल का अर्थ है कि जो कोई भी गुआम को नियंत्रित करता है, वह हवा और समुद्र के रास्ते पश्चिम में चीन तक, पूर्व में हवाई और उत्तर अमेरिका तक, उत्तर में जापान और दक्षिण में ऑस्ट्रेलिया और PNG तक पहुंच रखता है। गुआम द्वीप पर अमेरिकी बेस का होना चीन के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है।

आज, उत्तर में गुआम – एंडरसन एयर फोर्स बेस और दक्षिण में नेवल बेस गुआम पर दो प्रमुख सुविधाएं हैं, जिन्हें 2009 में Joint Region Marianas के रूप में मिलाया गया था और अब वे समन्वय से काम करती हैं। एंडरसन एयर फोर्स बेस, अपने दो मील लंबे रनवे और विशाल गोलाबरुद और ईंधन भंडारण सुविधाओं के साथ, बमवर्षकों विमानों का केंद्र है जो अमेरिका से इस द्वीप का चक्कर लगाते हैं।

हवाई के पश्चिम में स्थित एंडरसन एयर फोर्स बेस सबसे महत्वपूर्ण यूएस एयर बेस है और पश्चिमी प्रशांत में एकमात्र केंद्र है जहां से अमेरिका B -1, B-2 और B-52 बमवर्षकों सहित स्थायी रूप से भारी बमबारी कर सकता है। एंडरसन एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक है, दूसरा हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया है। यही नहीं, यहां एक नौसेना हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन भी मौजूद है।

ये नौसैनिक अड्डा चार परमाणु ऊर्जा से चलने वाले तेज हमले वाली पनडुब्बियों का बंदरगाह है। इस द्वीप पर अमेरिका की Pacific Command, Pacific Fleet, Seventh Fleet and Naval Seabee units तैनात रहती है। यानि व्हाइट हाउस गुआम द्वीप से किसी भी देश की अनुमति के बिना, अपने मन से हमले शुरू कर सकता है।

अमेरिका ने 1898 में गुआम को स्पेन से जीता था, तब से यह अमेरिका के पास ही है। हालांकि,जब जापान ने पर्ल हार्बर पर हमला किया था तब से तीस महीनों के लिए जापानी कब्जे में था परन्तु 1944 में जापान के वहां से हटाए जाने के बाद, गुआम द्वीप अमेरिका को कई युद्धों में रणनीतिक बढ़त देता आया है। WW 2 के दौरान इसकी महत्ता के कारण इसे ‘the tip of the spear’ नाम दिया गया था।

शीत युद्ध के बाद, गुआम पर सैन्य ठिकानों का मौजूद होना अमेरिका के लिए USSR को काबू में रखने का उपाय साबित हुआ। अमेरिका ने गुआम का उपयोग परमाणु मिसाइल पनडुब्बियों, लंबी दूरी के बमवर्षक, उपग्रह और पानी के नीचे के केबल संचार केंद्रों, इलेक्ट्रॉनिक खुफिया सूचनाओं की बड़ी सुविधाओं और पारंपरिक और परमाणु हथियारों के भंडार के लिए किया। इन हथियार प्रणालियों और सुविधाओं के अपडेट किए गए संस्करण गुआम पर मौजूद हैं।

इसके साथ ही यह बेस कई युद्ध में अमेरिका के लिए वरदान साबित हुआ, चाहे वो 1949-53 में कोरियाई युद्ध या 1965-73 के वियतनाम युद्ध में बी -52 बमवर्षकों के लिए एक बेस का इस्तेमाल हो या फिर 1991 के खाड़ी युद्ध और 2003 में शुरू हुए इराक युद्ध के दौरान हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया पर अमेरिकी सेना की मदद करनी हो। उन सभी युद्धों के दौरान, गुआम के लोग अमेरिका के प्रति वफादार रहे है।

अब जैसे जैसे चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी हरकते बढ़ा रहा है उसे देखते हुए अमेरिका ने भी गुआम पर अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया था। गुआम द्वीप के कारण नोर्थ कोरिया भी डरा हुआ रहता है और कई बार हमले की झूठी धमकी दे चुका है। चीन भी अब यही कर रहा है और गुआम बेस को निशाना बनाने का सपना देख रहा है। दरअसल चीन को पता है कि जब तक गुआम बेस अमेरिका के पास है तब तक वह उस क्षेत्र में चूँ तक नहीं कर सकता है।

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