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2008 में अमेरिका को बर्बाद किया था Housing Bubble, अब चीन भी कर रहा उसी तरह की भविष्यवाणी

वर्ष 2008! अमेरिका में आवास की कीमतों में अचानक गिरावट और लीमैन ब्रदर्स का पतन। वर्ष 2008 में आए वित्तीय संकट का कारण बनने वाली इस घटना कौन भूल सकता?ठीक इसी तरह का संकट अब चीन में आने वाला है। हालांकि चीन में यह घटना अमेरिका से कहीं अधिक बड़े पैमाने पर होगी क्योंकि चीन ने अपने आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया है। बीजिंग एक ऐसे housing bubble पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है जो अब किसी भी समय फुट सकता है।

हैरानी की बात यह है कि शी जिनपिंग प्रशासन स्वयं वैसी ही housing bubble की भविष्यवाणी कर रहा है जो 2008 में अमेरिकी वित्तीय संकट का कारण थी। गुरुवार को चीन ने अपने बैंकों को ऐसे समय में घर गिरवी रखने का आदेश दिया, जब चीन के वित्तीय संस्थान पहले से ही एक बड़े ऋण डिफॉल्ट से जूझ रहे हैं।

एक ऑर्डर के अनुसार सबसे बड़े चीनी बैंकों जैसे कि Industrial and Commercial Bank of China और China Construction Bank अब सभी बकाया ऋणों की 32.5% के ऊपरी सीमा का सामना कर सकते हैं जिसके बदले में उन्हें घर गिरवी रखना है। हालांकि मध्यम आकार के बैंक जैसे चाइना मर्चेंट बैंक में 20% का कैप अभी कम है और छोटे से छोटे गाँव और कस्बों के बैंकों को अब केवल 7.5% पर ही ऋण देने की अनुमति दी जाएगी। यह नया निर्देश पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना और China Banking and Insurance Regulatory Commission के संयुक्त बयान के रूप में प्रकाशित हुआ है।

बैंकों से कहा गया है कि वे नई सीमा के तहत घर के गिरवी को चरणबद्ध तरीके से नीचे कर संतुलित करें। इसी के साथ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने यह स्वीकार किया है कि चीन Housing Bubble से जूझ रहा है। पिछले महीने, सेंट्रल इकोनॉमिक वर्क कॉन्फ्रेंस- CCP नेताओं की एक वार्षिक बैठक जिसमें आने वाले वर्षों के लिए चीन की आर्थिक रणनीति तय होती है, उसने Housing Bubble को “स्पष्ट समस्या” के रूप में बताया है जिसे हल करने की आवश्यकता है।

हालाँकि, आज जिस Housing Bubble ने चीनी अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे जकड़ लिया है वह समस्या चीन का अपना किया धरा है।

चीन निर्माण के क्षेत्र में बेहद आगे है जिसमें बेतहाशा रियल एस्टेट का निर्माण हुआ है। जब भी चीन को ऐसा लगता था कि उसकी आर्थिक वृद्धि कम हो रही है, वह निर्माण के क्षेत्र में तेज़ी ला देता है। इस तरह से बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधि के वित्तपोषण के लिए, अंधाधुंध ऋण लिया गया। यह कुछ और नहीं बल्कि अपने विकास के आंकड़ों को उच्च स्तर पर दिखाने के लिए चीन की रणनीति थी।

चीन द्वारा रीयल स्टेट के क्षेत्र में इस तरह के प्रोत्साहन ने कम्युनिस्ट राष्ट्र में सैकड़ों भूतिया शहरों का निर्माण किया है। इन शहरों में वह सब कुछ है – एक आधुनिक टाउनशिप की जरूरत होती है- ऊंचे अपार्टमेंट, गगनचुंबी इमारतें, विकसित जलप्रपात। लेकिन ऊंच ऋणों से बने इन रियल एस्टेट निर्माण की कोई मांग ही नहीं है।

मांग में कमी के कारण देश के आवास क्षेत्र में चीनी बैंकों द्वारा लगाए गए ऋण डूबने लगे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि शेनझेन जैसे शहरों में, पहले से बने घर नवनिर्मित आवासों से अधिक मूल्य पर बेचे जा रहे हैं।

पिछले वर्ष भी चीनी अर्थव्यवस्था COVID-19 के कारण सिकुड़ रहा था, इसलिए बीजिंग ने आर्थिक विकास को फिर से शुरू करने के लिए आसान नीतियों को आगे बढ़ाने का फैसला किया। नतीजतन, चीन में एक बड़ा Housing Bubble बन गया है।

अब, चीन के अंदर मुख्य चिंता बैंकों और वित्तीय संस्थानों की है, जिन्होंने कम्युनिस्ट राष्ट्र में बड़े पैमाने पर रीयल स्टेट के विकास को बढ़ावा देने के लिए ऋण दिया है। आखिर क्या होगा इन बैंकों का?

यह किसी को भूलना नहीं चाहिए कि चीन पहले से ही एक बड़े ऋण चूक संकट का सामना कर रहा है। चीन की सरकारी कंपनियां, बड़े कॉरपोरेट और छोटे कर्जदार- सभी डिफॉल्ट से जूझ रहे हैं। यानी आखिर में बैंक और वित्तीय संस्थानों को चीन के ऋण संकट का खामियाजा भुगतना पड़ेगा और चीन की आर्थिक संकट के लिए एक चेन रिएक्शन शुरू हो जाएगा।

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