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अमेरिकी सैनिकों पर इनाम रख कुल्हाड़ी पर पैर मारा चीन, अब ट्रम्प से कैसे बचेंगे जिनपिंग?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शुरू से ही अफ़ग़ानिस्तान और दुनियाभर के युद्धक्षेत्रों से अमेरिकी सैनिकों की सकुशल वापसी की पैरवी करते रहे हैं। इस महीने 15 जनवरी से पहले-पहले वे अफ़ग़ानिस्तान से 2500 और सैनिकों की वापसी का ऐलान कर चुके हैं, जिसके बाद इस दक्षिण एशियाई देश में सिर्फ 2500 अमेरिकी सैनिक रह जाएंगे। हालांकि, इस बीच ऐसी खबर आई है जो राष्ट्रपति ट्रम्प को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य कर सकती है। दरअसल, रिपोर्ट्स के अनुसार अब चीनी सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान के उग्रवादी संगठनों को इनाम के बदले अमेरिका के सैनिकों की हत्या करने को कहा है। दिसंबर महीने में ही राष्ट्रपति ट्रम्प को इसके बारे में सूचित कर दिया गया था। अमेरिकी सैनिकों पर हमला कराकर चीन चाहता है कि अमेरिका जल्द से जल्द अपने सभी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकाल ले। हालांकि, चीन की यह चाल अब उसी पर भारी पड़ सकती है।

Voice of America न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक अमेरिका खूफिया एजेंसियों ने यह दावा किया है कि चीन ने अमेरिकी सैनिकों की हत्या करने के लिए अफ़ग़ानिस्तान के उग्रवादी संगठनों के साथ हाथ मिलाया है और इसके बदले इनाम की घोषणा भी की है। 17 दिसंबर को अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Robert O’Brien ने ट्रम्प को इसके बारे में सूचित भी किया था। माना जा रहा है कि इसके बाद अब अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ सकता है। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या इस खबर का असर अमेरिकी सैनिकों की घर-वापसी पर पड़ेगा?

चीन ने अपने इरादों से स्पष्ट कर दिया है कि वह जल्द से जल्द अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी चाहता है, ताकि उसे इस देश में अपनी पकड़ बनाने का बढ़िया मौका मिल सके। चीन को चिंता है कि अफ़ग़ानिस्तान से लगे उसके बॉर्डर के माध्यम से उसके शिंजियांग प्रांत में आतंकवाद फैल सकता है। ऐसे में अगर ट्रम्प अब भी अमेरिकी सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकालने के फैसले के साथ ही आगे बढ़ते हैं, तो यह चीन की जीत की तौर पर देखा जाएगा। चीन चाहता है कि वह ट्रम्प प्रशासन पर दबाव बनाकर जितना जल्दी हो सके, उतना जल्दी अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका को बाहर खदेड़ दे।

ऐसा इसलिए, क्योंकि 20 जनवरी के बाद White House में Joe Biden की एंट्री हो जाएगी और वे अफ़ग़ानिस्तान में एक सीमित संख्या में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी का समर्थन करते रहे हैं। बाइडन की यह नीति भविष्य में चीन के लिए समस्यायें खड़ी कर सकती है। ऐसे में चीन के पास ट्रम्प के कार्यकाल के दौरान एक आखिरी मौका है कि वह ट्रम्प प्रशासन पर दबाव बनाकर सभी अमेरिकी सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकलवा दे!

हालांकि, अब जब चीन की हताशा जगज़ाहिर हो चुकी है, ऐसे में चीन का यह दांव उसी पर उल्टा पड़ सकता है। अगर कोई चीज़ ट्रम्प को अपना फैसला पलटने पर मजबूर कर सकती है, तो वह है चीन के खिलाफ उनकी दुश्मनी! ऐसे मौके पर अगर ट्रम्प अपने सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला लेते हैं, तो इसे चीन के खिलाफ उनकी शिकस्त के तौर पर देखा जाएगा, जो ट्रम्प बिलकुल नहीं चाहेंगे! ऐसे में चीन की यह हताशा ट्रम्प की अफ़गान नीति को बदलने पर मजबूर कर सकती है, जिसके बाद बाइडन के लिए अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों की तैनाती बनाए रखना और आसान हो जाएगा!

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