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गरीब बने गिनी पिग : वैक्सीन लगवाकर बीमार पड़े वॉलंटियर की मां बोली- आधा भी नहीं बचा तंदरुस्त बेटा

भोपाल के टिंबर नगर इलाके में रहने वाले जितेंद्र की 70 साल की मां की आंखों के आंसू नहीं थम रहे हैं। उसकी मां को डर इस बात का है कि उसके बीमार बेटे को पीपुल्स अस्पताल वाले ले जाकर फिर से कोई नया प्रयोग तो नहीं कर देंगे। जितेंद्र को पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में 10 दिसंबर को कोरोना का टीका लगाने का कहकर ट्रायल का टीका लगा दिया गया था।

इसके बाद से वह लगातार बीमार चल रहा है। इस मोहल्ले में जितेंद्र जैसे कई वॉलंटियर्स हैं, जिन पर टीका लगाने के नाम पर ट्रायल किया गया है। इसके बाद उनका कोई फॉलोअप नहीं लिया गया और वह घर पर बीमार हो गए। मामला सामने आने के बाद अब प्रबंधन ने जितेंद्र की सुध ली है। प्रबंधन ने सभी तरह के आरोपों को नकारा है। हालांकि सवाल यह है कि अधिकांश वॉलंटियर गरीब बस्तियों के क्यों चुने गए।

यहां रहने वाले कई लोगों काे आने वाले दिनों में दूसरा डोज दिया जाना है लेकिन अब वे घबराए हुए नजर आ रहे हैं। ऐसे में ट्रायल समय पर पूरा होने को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं।

जितेंद्र की मां गुलाब बाई अपनी बात रखते रखते फफकते हुए रो पड़ी। वे कह रही हैं कि बेटे को 10 दिसंबर को टीका लगा था, पीपुल्स मेडिकल कॉलेज की गाड़ी आई थी। उससे आवाज लगा रहे थे कि अस्पताल कोरोना का टीका लग रहा है और उसके बदले पैसे भी मिलेंगे। बाद में वैक्सीन लगेगी तो उसके पैसे देने पड़ेंगे। इस पर बेटा और कई लोग यहां से टीका लगवाने चले गए। घर से बेटा अच्छा-खासा गया था। अब तो वह आधा भी नहीं बचा है।

सभी को पैसा भी दिया गया। चार दिन बाद बेटा जितेंद्र बीमार हो गया। जब बुखार और सर्दी-खांसी ठीक नहीं हुई तो वह पीपुल्स अस्पताल जांच कराने गया। वहां पर डॉक्टरों ने उन्हें देखा और उसे बाहर से जांच कराने और दवा लेने के लिए लिख दी, जबकि उसकी पर्ची पर साफ लिखा था कि वह वॉलंटियर्स है और टीका लगवा चुका है।

जितेंद्र बिना कोई दवा लिए घर आया और इसके बाद वह बीमारी में घर पर पड़ा रहा। मंगलवार को एक अखबार द्वारा इस मामले को सामने लाने के बाद हरकत में आए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने तत्काल एक टीम को जितेंद्र के घर भेज दिया। टीम ने वहां पर अपनी सफाई दी और जितेंद्र का पूरा इलाज कराने का आश्वासन दिया।

इसके बाद जितेंद्र को अपने साथ ले गए। बता दें कि जितेंद्र को ट्रायल का दूसरा डोज 7 जनवरी को लगाया जाएगा। जितेंद्र के अलावा सरस्वती बाई, राधा, गोलू दास, हरिसिंह और सुषमा समेत कई वॉलंटियर्स ने इसी तरह के आरोप पीपुल्स मेडिकल कॉलेज पर लगाए हैं। कुछ अन्य के भी बीमार पड़ने की बात कही गई है।

प्रबंधन का कहना- लोग देश हित में आगे आए

पीपुल्स मेडिकल कॉलेज से जब इन आरोपों के संबंध में बात की गई तो उन्होंने साफ तौर पर गाइडलाइन का हवाला देते हुए किसी तरह गड़बड़ी होने की बात से इनकार कर दिया। कॉलेज के डीन अनिल दीक्षित ने कहा कि लोगों को जागरूक करने के लिए हमने आसपास के इलाकों में गाड़ियां भेजी थीं, इसमें कहा गया था कि ट्रायल का टीका लगवाने के लिए अगर वह आगे आना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। आसपास की काॅलोनियों से आए लोगों का कहना था कि वह देश हित में ये टीका लगवाने आए हैं। अगर किसी को सिस्टम के कारण कोई परेशानी हुई है, तो हम उसको दिखा रहे हैं।

आखिर अचानक कैसे पहुंचे सैकड़ों लोग टीका लगवाने?

कोवैक्सिन के थर्ड फेज के ट्रायल पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में हो रहे हैं। ट्रायल टीके कोरोना की वैक्सीन बताकर लोगों को लगवाने के लिए प्रेरित किया गया और ये भी कहा गया कि इसके बदले रुपए भी मिलेंगे। इसके बाद पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में कॉलेज की आसपास की कॉलोनियों के लोगों का पहुंचाना शुरू हो गया और ये संख्या कॉलेज के ट्रायल के टारगेट को पूरा करने के लिए काफी थी।

मेडिकल कॉलेज ने ये कदम एक हफ्ते के ट्रायल के बाद उठाया, क्योंकि पहले हफ्ते में केवल 45 लोग ही ट्रायल के लिए पहुंचे थे। वॉलंटियर्स कम मिलने की चर्चा शुरू हुई तो प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी ट्रायल कराने पीपुल्स मेडिकल कॉलेज पहुंच गए लेकिन उन्हें अनफिट करार दे दिया गया था।

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