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इमरान के खास दोस्त ने की बेइज्जती, पाकिस्तानियों को देश से भगा दिया तुर्की !

भारत के खिलाफ झूठ फैलाकर बदनाम करने की कोशिश करने वाले पाकिस्तान को आज पूरी दुनिया में लताड़ा जा रहा है.बेइज्जत किया जा रहा है. यहां तक कि जिनको पाकिस्तान अपना दोस्त बताता आया है वही देश अब उसे झटके पर झटका दे रहे हैं. कश्मीर मुद्दे पर जिस तुर्की जैसे इस्लमामिक कट्टरपंथी देश की बातों में आकर पाकिस्तान सऊदी अरब को सीधी धमकी दे रहा था. या यूं कहे कि पाकिस्तान ने इस्लामी जगत का नेतृत्व करने की तुर्की की लालसा को बढ़ावा दिया. लेकिन आज उसी तुर्की ने पाकिस्तान की इंटरनेशल बेइज्जती कर दी है.

खबर है कि पाकिस्तान के साथ सच्ची दोस्ती की कसमें खाने वाले तुर्की ने 51 पाकिस्तानी नागरिकों को जबरदस्ती डिपोर्ट कर दिया है. आरोप है कि ये लोग अवैध रूप से अंकारा में रह रहे थे. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये लोग वहां कई तरह की अवैध गतिविधियों में लिप्त थे. इन लोगों को तुर्की ने एक स्पेशल फ्लाइट के जरिए इस्लामाबाद भेज दिया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्की की संघीय जांच एजेंसी ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग एंड स्मगलिंग सेल को 33 लोग सौंपे हैं. जबकि बाकी लोगों को पहले ही पकड़ा जा चुका था. इन लोगों को लेकर तुर्की के अधिकारियों ने स्थानीय पाकिस्तानी दूतावास से संपर्क किया. जिसके बाद से इनकी नागरिकता की पुष्टि हुई. इसके बाद एक स्पेशल फ्लाइट के जरिए इन लोगों को वापस भेजा गया.

फरवरी 2020 में भी तुर्की ने पाकिस्तान के 110 नागरिकों को वापस भेज दिया था. बताया जाता है कि अब भी कई पाकिस्तानी तुर्की की जेलों में बंद हैं. इनके उपर अवैध रूप से तुर्की में प्रवेश करने, नशीले पदार्थों की तस्करी समेत कई आरोप लगे हैं. पाकिस्तानी लोग तुर्की का यूरोप में अवैध रूप से प्रवेश करने के लिए उपयोग करते हैं. इस दौरान जो पकड़े जाते हैं उन्हें या तो डिपोर्ट कर दिया जाता है या जेल में डाल दिया जाता है.

दरअसल तुर्की शुरू से ही कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है. हाल में ही ईद उल अजहा पर तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयप एर्दोगान ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और प्रधानमंत्री इमरान खान से बात करते हुए कश्मीर पर तुर्की के समर्थन का आश्वासन दिया. एर्दोआन ने हदे पार करते हुए कश्मीर की तुलना एक बार फिर फिलिस्तीन से की है.

इतना ही नहीं, उन्होंने भारत पर कोरोना काल में भी कश्मीर में अत्याचार का झूठा आरोप भी लगाया है. जबकि सच्चाई ये है कि कश्मीर पर भारत को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे एर्दोआन तुर्की में खुद एक कट्टर इस्लामिक तानाशाह के रूप में जाने जाते हैं. इस बात के सबूत हाल ही में एक के बाद एक चर्च को तोड़कर मस्जिद में बदले जाने से सामने आ चुके हैं.

जानकारी के मुताबिक केरल और कश्मीर समेत देश के तमाम हिस्सों में कट्टर इस्लामी संगठनों को तुर्की से फंड मिल रहा है. एक सीनियर गवर्नमेंट अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्की भारत में मुसलमानों में कट्टरता घोलने और चरमपंथियों की भर्तियों की कोशिश कर रहा है. उसकी ये कोशिश दक्षिण एशियाई मुस्लिमों पर अपने प्रभाव के विस्तार की कोशिश है.

उधर एर्दोआन मुस्लिम जगत में सऊदी अरब की बादशाहत को चुनौती देने की लगातार कोशिशों में लगे हैं. पिछले साल उन्होंने मलयेशिया के तत्कालीन पीएम महातिर मोहम्मद और पाकिस्तान पीएम इमरान खान के साथ मिलकर नॉन-अरब इस्लामी देशों का एक गठबंधन तैयार करने की कोशिश की थी. मगर जब पाकिस्तान ने तुर्की की शह में आकर सऊदी को धमकी दी तो उसे भारी पड़ गया. और अब इमरान को दोस्त कहने वाले तुर्की ने असली चेहरा दिखा दिया है.

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