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इमरान खान के सिरदर्द बने थे जो ‘जहरीले’ मौलाना, उनको ISI ने मरवा दिया?

इस्‍लामाबाद : पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए पिछले कई दिनों से सिरदर्द बने जहरीले मौलाना खादिम हुसैन रिजवी की रहस्‍यमय परिस्थितियों में मौत हो गई है। रिजवी ने पाकिस्‍तान के कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्‍बैक पाकिस्‍तान (TLP) की स्‍थापना की थी और पिछले दिनों ही उसके संगठन ने रावलपिंडी और इस्‍लामाबाद को घेर लिया था। इससे लाखों लोग जहां इन दोनों ही शहरों में कैद होकर रह गए थे, वहीं पाकिस्‍तानी सेना और इमरान खान भी दबाव में आ गए थे। रिजवी की संदिग्‍ध परिस्थितियों में मौत के बाद अब उसकी ISI की ओर से हत्‍या की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक ईशनिंदा कानून के नाम पर पाकिस्‍तानी समाज में जहर बोने वाले रिजवी की मौत के बाद ISI ने यह कोशिश की कि कोई भी नेता इस मौत का फायदा न उठा सके। मौलाना की मौत रहस्‍यमय परिस्थितियों में हुई लेकिन इमरान सरकार ने घोषणा की कि मौलाना रिजवी की कोरोना वायरस से मौत हुई है। रिजवी बरेलवी समुदाय से आता था। फ्रांस के राष्‍ट्रपति के इस्‍लाम को लेकर दिए बयान के बाद मौलाना ने फ्रांसीसी सामानों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।

मौलाना ने इमरान सरकार की नाक में दम कर रखा था
बताया जा रहा है कि इन प्रदर्शनों के जरिए मौलाना ने इमरान सरकार की नाक में दम कर रखा था और कानून व्‍यवस्‍था के लिए समस्‍या बन गया था। कई लोगों ने दावा किया है कि आईएसआई ने मौलाना की मौत के बाद भी उनके बेटे से जबरन जिंदा होने का बयान दिलवाया। बताया जा रहा है कि जब उन्‍हें अस्‍पताल में लाया गया था तभी उनकी मौत हो गई थी। इन दिनों आईएसआई और सेना को जनता के विद्रोह का डर लग रहा है। सेना के लोगों को यह डर लग रहा था कि रिजवी इमरान सरकार के लिए संकट बन सकते थे।

पाकिस्‍तान के इस जहरीले मौलाना ने ईशनिंदा कानून को कमजोर नहीं करने पर जोर दिया था और वर्ष 2015 में तहरीक-ए-लब्‍बैक पाकिस्‍तान की स्‍थापना की थी। दावा किया जा रहा है कि रिजवी की ‘बुखार’ से लाहौर के एक अस्‍पताल में मौत हो गई। अधिकारियों ने अभी उनके मौत के कारणों पर चुप्‍पी साध रखी है। पाकिस्‍तान से सबसे अधिक प्रभाव वाले पंजाब प्रांत में रिजवी की गहरी पकड़ थी।

रिजवी ने मुमताज कादरी की मौत की सजा का विरोध किया
मौलाना ने पंजाब के गवर्नर की वर्ष 2011 में हत्‍या करने वाले मुमताज कादरी की मौत की सजा का विरोध किया था। मुमताज कादरी ने पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर के ईशनिंदा कानून को कमजोर करने की मांग के बाद उनकी हत्‍या कर दी थी। बता दें कि पाकिस्‍तान में अक्‍सर ईशनिंदा कानून के नाम पर अल्‍पसंख्‍यकों और अहमदिया समुदाय के साथ अत्‍याचार की घटनाएं होती रहती हैं। इस्‍लाम की आलोचना करने पर ईशनिंदा कानून में दोषी पाए जाने वाले व्‍यक्ति को मौत की भी सजा हो सकती है।

वर्ष 2018 में पाकिस्‍तान के सुप्रीम कोर्ट के ईशनिंदा कानून में दोषी पाई गई ईसाई महिला आसिया बीबी को बरी कर‍ दिए जाने के बाद रिजवी और उनके संगठन TLP ने पूरे देश में भूचाल ला दिया था। राजधानी इस्‍लामाबाद कई सप्‍ताह तक चारों तरफ से कटी रही थी। यह विवाद तब सुलझा जब सेना ने हस्‍तक्षेप किया और एक समझौता कराया था। इस डील के बाद पाकिस्‍तान के कानून मंत्री को इस्‍तीफा देना पड़ा था। वर्ष 2006 से ही व्‍हील चेयर पर था।

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