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उइगर मर्दों की जबरन नसबंदी, औरतों का गर्भपात और फिर कैंप में कैद.. इस्लाम के सफाए पर उतारू चीन

चीन में शी जिनपिंग की कम्युनिस्ट प्रशासन ऊईगर मुसलमानों की जनसंख्या को नियंत्रण में करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चला रही है जिसके तहत न सिर्फ उइगर समुदाय के पुरुषों-महिलाओं की जबरदस्ती नसबंदी की जा रही है, बल्कि उन्हें बच्चे पैदा करने से भी रोका जा रहा है। यही नहीं उइगर मुसलमानों के साथ अमानवीय व्यवहार भी किया जा रहा है।

दरअसल, Associated Press की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी आंकड़ों और 30 detention camp के लोगों के इंटरव्यू से यह पता चला है कि पिछले चार वर्षों में चीन की सरकार ने शिनजियांग के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र में जहां उइगर मुसलमान रहते हैं वहाँ इस प्रकार का अत्याचार किया है जिसे कुछ विशेषज्ञ एक तरह से “जनसांख्यिकीय नरसंरहार” तक कह चुके हैं।

साक्षात्कार और आंकड़े दिखाते हैं कि इस प्रांत की सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को नियमित तौर पर गर्भावस्था जांच कराने के लिए मजबूर किया है, तथा उन्हें अंतर्गर्भाशयी उपकरण (आयूडी) लगवाने के अलावा नसबंदी करवाने तथा लाखों महिलाओं को गर्भपात कराने के लिए भी मजबूर किया है। चीन में जहां IUD के इस्तेमाल और नसबंदी में गिरावट आई है वहीं शिनजियांग में इसके उपयोग में बढ़ोतरी हुई है।

चीन के सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 से 2018 तक होटन और काशगर के उइगर क्षेत्रों में जन्म दर में 60% की गिरावट आई है। पिछले कई वर्षों से शिनजियांग क्षेत्र में जन्म दर लगातार घट रही है, जो पिछले साल लगभग 24% तक घटी थी जो 4.2% के राष्ट्रव्यापी गिरावट से कई गुना अधिक है।

बता दें कि शिनजियांग प्रांत में पुलिस बच्चों की तलाश के लिए इन मुस्लिमों के घरों पर छापे भी मारती है। यही नहीं बच्चों के मां-बाप को धमकाती है कि अगर दो से ज्यादा बच्चे पैदा किये तो उन्हें जुर्माना देना होगा या फिर उन्हें detention camp में भेज दिया जाएगा। चीन की कम्युनिस्ट सरकार उइगर महिलाओं को दूसरे या तीसरे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद ही IUD लगवाने के लिए मजबूर करती है।

एसोसिएटेड प्रेस द्वारा प्राप्त एक नए शोध के अनुसार, चीन की सत्तावदी सरकार जन्म नियंत्रण के लिए सैकड़ों मिलियन डॉलर खर्च कर चुकी है जिसके कारण चीन के सबसे तेजी से विकसित क्षेत्रों में से एक शिनजियांग कुछ वर्षों में सबसे धीमी गति से विकास करने वाला क्षेत्र बन गया।

चीन ने सिर्फ उइगर मुस्लिमों को बच्चे पैदा करने से रोका ही नहीं बल्कि हान चीनियों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। बता दें कि चीन में “एक बच्चे की नीति” के तहत हान चीनी पर अक्सर मजबूर, गर्भनिरोधक, नसबंदी और गर्भपात करने के लिए मजबूर किया जाता था लेकिन अल्पसंख्यकों को दो बच्चों की अनुमति दी गई थी।

परंतु जैसे ही राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सत्ता संभाली, अल्पसंख्यकों से दो बच्चों का अधिकार भी छीन लिया गया और उनके ऊपर अत्याचार शुरू हो गए। 2014 में, शी जिनपिंग ने शिनजियांग का दौरा किया था जिसके बाद तुरंत बाद, उस क्षेत्र में यह सभी समुदायों के लिए “एक समान परिवार नियोजन नीतियों” को लागू करने के साथ-साथ जन्म दर को कम करने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया।

इसके बाद सरकार ने घोषणा की कि हान चीनी अब अल्पसंख्यकों की तरह, शिनजियांग के ग्रामीण इलाकों में दो और तीन बच्चे पैदा कर सकते हैं। लेकिन चीनी अधिकारी हान चीनियों को बड़े पैमाने पर न ही गर्भपात करते थे और न ही नसबंदी। उन्हें IUD के लिए भी मजबूर नहीं किया जाता था जैसे उइगर मुसलमानों को किया जाता था।

यानि देखा जाए तो एक पर जुल्म और अत्याचार के कहर से उनकी संख्या में 60 प्रतिशत की गिरावट ला दी गयी तो वहीं, हान चीनियों को जनसंख्या बढ़ाने का मौका दिया गया। चीन का उइगर मुस्लिमों के खिलाफ अमानवीय अत्याचार की यह पहली रिपोर्ट नहीं है बल्कि कई बार चीन के इस रूप का खुलासा हो चुका है। लेकिन चीन इसे आतंकवाद के खिलाफ कदम बताता है।

चीनी सरकार 2016 से ही उइगर मुसलमानों को गिरफ्तार कर शिविरों में रख रही है, जिन्हें वह वोकेशनल एजुकेशन ट्रेनिंग सेंटर कहता रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि चीन ने करीब 10 लाख उइगर और अन्य मुसलमानों को जबरन कैंपों में कैद कर रखा है और उन्हें इस्लाम धर्म से दूर करने की कोशिश की जाती है।

ऐसी खबरें आती रही हैं कि, उइगर शिवरों में इस्लाम के प्रति घृणा फैलाने, इस्लाम के खिलाफ निबंध लिखने, इस्लामिक मान्यताओं के खिलाफ भड़काने और घृणा फैलाने जैसी तमाम शिक्षाएं दी जाती हैं। यहां तक कि, उन्हें सूअर का मांस खाने और शराब पीने के तक लिए मजबूर किया जाता है जो मुस्लिम धर्म में वर्जित माना जाता है और फिर इन उइगर मुसलमानों का ‘पुन: शिक्षा’ के कैंप के बाद फैक्ट्रियों में बंधुआ मजदूर की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

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