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इस परिवार ने गुफा में गुजार दिए 7 साल, वजह करती है समाज को शर्मसार !

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से अजीबो गरीब मामला सामने आया है।  आपको जानकर हैरत होगी कि कोरिया में आज भी एक परिवार जंगल के बीच एक गुफा में अपना गुजर-बसर कर रहा है। ना सिर्फ रहना ही यह परिवार सालों पुराने पात्रों से अपना गुजर बसर कर रहा है। साथ ही इनका खानपान भी तकरीबन डेढ़ 200 साल पहले पुराने अंदाज में हो रहा है। जंगल के कंदमूल खाकर अपना दिन गुजार रहा है। इनकी दिनचर्या को अगर करीब से देखा जाए तो एक पल के लिए आपको भी आदिमानव की झलक दिखाई पड़ सकती है।

खडगवां थाना अंतर्गत ग्राम दुग्गी के देवनारायण पठारी अपनी पत्नी राजकुमारी तथा एक 6 वर्षीय पुत्र के साथ जंगल की गुफा में रह रहा है। इसकी वजह पूछने पर उन्होंने बताया कि हालात ऐसी बनी की 3 साल तक जंगल में गुजर बसर क‍िया। उसके बाद बीते 4 सालों से पहाड़ के नीचे बने कप्तान की गुफा में अपना जीवन काट रहा हूं। उसने बताया कि गरीबी और बेरोजगारी ने ऐसी हालत कर दी। उसने बताया क‍ि गांव में पहले पैतृक जमीन थी, लेकिन वह विवादित होने की वजह से वह भी छीन ली गई। गांव वालों ने फैसला करके उसकी जमीन भी हड़प ली और उसका बहिष्कार कर दिया।

इसके बाद उसका परिवार गांव छोड़ कर जंगल में जिंदगी बिता रहा है। पठारी ने बताया क‍ि उसे इस बात की चिंता नहीं है कि वह गुफा में जिंदगी काट रहा है, बल्कि उसे इस बात की ज्यादा चिंता है कि उसका बच्चा पढ़ाई नहीं कर पा रहा है। उसने बताया कि उसकी जिंदगी तो कट जाएगी, लेकिन बच्चे का भविष्य का क्या होगा? उसके पास तो घर भी नहीं है और ना ही कमाने के लिए खेती की जमीन में हैं। बच्चे के पढ़ाई स्कूल भी दूर है, ऐसे में मैं क्या करूं मुझे समझ नहीं आ रहा है। बच्चे व मेरे परिवार का भविष्य मेरे ना रहने पर क्या होगा, मुझे चिंता सताए जा रही है।

परिवार की जानकारी देते हुए गणेशपुर के सामाजिक कार्यकर्ता नागेश्वर सिंह ने बताया कि पहली बार 2015 में जब वह जंगल आए थे तो उन्हें गुफा में निवास करते परिवार दिखा। उन्होंने उसे गांव में चलने को कहा पर वह नहीं माना। उसके बाद उन्होंने प्रयास करके उक्त परिवार का राशन कार्ड बनवाया। 2 किमी अंदर जंगल में उनके रहने के कारण उनका पुत्र पढ़ने नहीं जा पाता है, आज भी उक्त गुफा में ही अंधेरे में रह रहे हैं। मेरे लिए भी आश्चर्य की बात यह है क‍िआज  हर परिवार के पास अपना घर है। गरीब परिवार भी किसी तरह गांव में अपने टूटे-फूटे घर में निवास कर रहा है। ऐसे समय में एक व्यक्ति ऐसा भी है, जिसके पास 1 इंच भी भूमि नहीं है।

जी, गांव वालों के द्वारा बहिष्कार कर दिए जाने के बाद वह जंगल के गुफा में रहने को मजबूर है। वह भी ऐसे समय में जब सरकार गरीबों का पक्का मकान, राशन सह‍ित कई योजनाएं चला रही है। जनप्रतिनिधियों ने भी कभी इस परिवार को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। जंगल के गुफा में निवास करने के कारण राशन व किसी योजना का लाभ इस परिवार को नहीं मिल रहा है।

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