Monday , October 26 2020
Breaking News
Home / धर्म / इस फूल से कई लोग बन चुके हैं धनवान, आप भी इस्तेमाल करें और हो जाएं मालामाल

इस फूल से कई लोग बन चुके हैं धनवान, आप भी इस्तेमाल करें और हो जाएं मालामाल

भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पेड़ पोधो का एक अलग ही महत्त्व होता है | पेड़-पौधे भगवान के द्वारा दिए गए ऐसे उपहार है जो हमे फल ही नहीं देते बल्कि ऑक्सीजन और छाया भी देता है | लेकिन आज हम आपको वृक्ष के ऐसे फूल के बारे में बता रहे है जो सबसे चमत्कारी है | 

आजकल जो विदेशी दवाईयां बन रही है | वह भी अधिकांशतः पेड़-पोधो की ही बनाई जाती है अर्थात इनका उपयोग आयुर्वेद विज्ञान में भी किया जाता है | इसी तरह का एक फूल ऐसा है जिससे घर में सुख शांति आती है और धन में वृद्धि होती है | इस फूल का नाम है नागकेसर का पुष्प | इसे दुनिया का सबसे चमत्कारी पुष्प कहा जाता है | 
लेकिन इस पुष्प का उपयोग आपको हमारे द्वारा बताये गई विधि के हिसाब से ही करना है | यदि आपने ऐसा नहीं किया और अपने मन से इसे अपने निजी जीवन में उपयोग में लाते है तो इसके दुष्प्रभाव भी हो सकते है | जिसके द्वारा आपके घर में सुख शांति के स्थान पर गृहक्लेश की स्थिति बन सकती है | इस फूल को आप निम्न प्रकार से उपयोग में ला सकते है |
पहले एक छोटी सी डिब्बी लीजिए | जिसमे मधुमक्खियों का शहद भरकर उसमे नागकेसर के फूल को रखे | इसके पश्चात् आपको शुक्ल पक्ष की रात्रि में एक अच्छा सा मुहूर्त देखकर उस स्थान पर रखे जहाँ पर पैसे रखे हो | आप कुछ ही दिनों में देखेंगे की आपके घर में रुपयों की बरसात होना शुरू हो गयी है और आपके घर के क्लेश भी समाप्त हो गए है |
लेकिन यह ध्यान रहे की यह कर्म सिर्फ रात्रि में ही करना है | प्रातः काल सबसे पहले भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग को कच्चे दूध और दही से धो लेवे | इसके पश्चात् उसे गंगा जल से पवित्र कराये | इसके पश्चात् भगवान शंकर की प्रतिदिन पूजा करते समय यह उनके सामने इस पुष्प को रख देवे | आप कुछ ही दिनों में मालामाल हो जाएंगे | दोस्तों अभी तक काफी लोगो ने इस नागकेसर के पौधे का उपयोग किया है और वे इससे काफी खुश भी है | यदि आप भी धन चाहते है तो इस पुष्प का अवश्य उपयोग कीजिए |
loading...
loading...

Check Also

दशहरे पर करना न भूलें ये छोटा सा उपाय, हर क्षेत्र में आपको मिलेगी विजय

पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना के बाद दशवें दिन यानी आश्विन मास ...