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इस बीमारी से जूझ रहे हैं पुतिन, अगले साल जनवरी में  छोड़ सकते हैं राष्ट्रपति का पद !

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले साल जनवरी में अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। मीडिया में खबरें आई हैं कि पुतिन पार्किंसंस नामक बीमारी से जूझ रहे हैं। इसके चलते उनकी दोनों बेटियां और 37 वर्षीय गर्लफ्रेंड अलीना कबाइवा उन्हें पद छोड़ने के लिए राजी कर रही हैं।  मॉस्‍को के राजनीति विज्ञानी वलेरी सोलोवेई ने ब्रिटिश अखबार द सन से कहा कि पुतिन पर उनके परिवार का गहरा असर है और वो उनकी बात मान सकते हैं।

पुतिन में देखे जा रहे हैं बीमारी के लक्षण

सोलोवेई ने कहा कि पिछले कुछ समय में पुतिन में इस बीमारी के लक्षण नजर आने लगे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में एक कार्यक्रम में पुतिन लगातार अपने पैरों को हिलाते हुए नजर आए थे।

इसके अलावा एक फुटेज में उन्हें लगातार अपनी उंगलियां चटकाते हुए देखा गया था, जब उन्होंने संभवत: दवा लेने के लिए कप को पकड़ा हुआ था।

पार्किंसंस एक तरह की मानसिक बीमारी है, जो समय के साथ-साथ गंभीर होती जाती है।

बयान

पुतिन पर परिवार का दबाव- सोलेवेई

सोलेवेई ने कहा है पुतिन का परिवार उन पर पद छोड़ने के लिए दबाव बना रहा है। उन्होंने कहा पुतिन पर परिवार का गहरा असर है। वो जनवरी तक सत्ता सौंपने की योजना सार्वजनिक कर सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि जल्द एक नया प्रधानमंत्री बनाया जाएगा, जिसने पुतिन की देखरेख में ट्रेनिंग दी जाएगी।

हालांकि, पुतिन के स्टाफ ने इन कयासों का खंडन किया है। स्टाफ ने कहा है कि पुतिन ऐसी कोई योजना नहीं बना रहे हैं।

जानकारी

जनवरी में सत्ता सौंपने की योजना सार्वजनिक कर सकते हैं पुतिन

सोलोवेई ने कहा कि 68 वर्षीय पुतिन जनवरी में अपने पद छोड़ने की योजना को सार्वजनिक कर सकते हैं। अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि वो अपनी जगह किसे सत्ता सौंपेंगे।

विधेयक

आपराधिक कार्रवाई से पुतिन को मिल सकती है छूट

पुतिन के पद छोड़ने की अटकलें ऐसे समय सामने आई हैं, जब रूस की संसद नये विधेयक पर विचार कर रही है।

इसके अनुसार पुतिन के खिलाफ आजीवन आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। खुद पुतिन ने यह विधेयक पेश किया था।

इसके तहत कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों के लिए राष्ट्रपति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी।

इसका मतलब है जिंदा रहने तक पुतिन को कानूनी कार्रवाई से छूट रहेगी और सभी सरकारी सुविधाओं भी मिलती रहेंगी।

संकेत

विधेयक को माना गया था सत्ता हस्तांतरण का संकेत

इस विधेयक को लेकर रूसी मीडिया ने कहा था कि यह देश में सत्ता के हस्तांतरण का संकेत है।

पुतिन की सेहत को देखते हुए पिछले काफी समय से ऐसे कयास लगाए जा रहे थे।

हालांकि, विधेयक में संसद को राष्ट्रपति को दिया गया सरंक्षण वापस लेने का भी अधिकार दिया गया है। अगर राष्ट्रपति के खिलाफ देशद्रोह जैसे आरोप लगते हैं तो संसद यह सरंक्षण वापस ले सकती है। इसके लिए दोनों सदनों का दो तिहाई बहुमत जरूरी होगा।

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