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उत्तर प्रदेश में 10 सालों में बढ़ गए इतने किन्नर, पढ़िये पूरी रिपोर्ट

समय के साथ-साथ समाज में किन्नर समाज के प्रति लोगों की सोच बदल रही है. यही कारण है कि बीते कुछ सालों में इनकी जनसंख्या में वृद्धी देखी गई है. ऐसा नहीं है कि ये पहले से समाज में मौजूद नहीं थे, ये थे लेकिन समाज के बदलते रवैये और सरकार द्वारा इनके हितों के संरक्षण के बाद ये हर जगह अपनी उपस्थिता दर्ज करा रहें हैं. इससे उनके वास्तविक परिस्थिति और समाजिक घेरे का पता चल रहा है. एक सर्वे में पता चला है कि उत्तर प्रदेश में किन्नरों की संख्या में लगातार वृद्धी हुई है.

उत्तर प्रदेश के एक निजी सामाजिक संस्था की ओर से हुए सर्वेक्षण में किन्नरों के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आयी है. सर्वे के मुताबिक प्रदेश में हर साल लगभग 3 हजार किन्नरों की संख्या बढ़ रही है. 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश में किन्नरों की संख्या 137465 थी, जो अब लगभग 164615 हो गई है. यानी पिछले 10 वर्षों में 27150 किन्नर बढ़े है.

यह सर्वे अबुल कलाम जन सेवा संस्थान और नई दिल्ली की संस्था इंडो ग्लोबल सोशल सोसायटी की ओर से कराया गया है. इन आकड़ों को जुटाने के लिए प्रदेश के 20 जिलों में 293 किन्नरों से संपर्क किया गया था. सर्वे के अनुसार उ.प्र. में सबसे ज्यादा किन्नरों की संख्या आगरा मंडल में 14915 है. फिर बनारस मण्डल में 12620, मुरादाबाद मंडल में 9790 है. साथ ही प्रयागराज मंडल में 8808 किन्नर हैं.

इस सर्वे में एक और चौकाने वाला दावा किया गया है. इसमें कहा गया है कि कुल किन्नरों की संख्या का 74 प्रतिशत हिन्दू, 25 प्रतिशत मुस्लिम और एक प्रतिशत सिख धर्म के है. साथ ही यह भी बताया है कि 27 प्रतिशत किन्नर कक्षा 1 से 9 तक, 4 प्रतिशत 10 वीं तक, 3 प्रतिशत 12 वीं और 2 प्रतिशत स्नातक पढ़े हैं. इसके अलावा 3-10 साल की उम्र में 29 प्रतिशत किन्नर, 11-15 की उम्र में 40 प्रतिशत और 16-22 की उम्र में 30 प्रतिशत किन्नर घर छोड़ देते हैं.सर्वे में यह भी बताया गया है कि 57 प्रतिशत लोग किन्नरों से अभद्रता से पेश आते है और 64 प्रतिशत पुलिस के लोग परेशान करते हैं.

अबुल कलाम जन सेवा संस्थान के सचिव नाजिम अंसारी बताते हैं कि किन्नरों की स्थिति को समाज और सरकार के संज्ञान में लाने के लिए एक दशक से निरंतर प्रयास चल रहा है. किन्नरों के जीवन में खुशहाली आए, इसके लिए किन्नर वेलफेयर बोर्ड बनाने के मांग भी की गई है.

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