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ये कैसा एक्शन?: अवैध शराब पर कार्रवाई को पहुंचे 350 पुलिसवाले, एक को भी नहीं पकड़ पाए

कोटा : मजबूरी कहें, अनदेखी कहें या सिस्टम का फेल्योर… कलम का कुआं गांव में एएसपी-डीएसपी समेत 350 पुलिसकर्मी सुबह 5 बजे दबिश देने जाते हैं और एक भी बदमाश हाथ नहीं आता। पुलिस को मौके पर 9 भटि्टयां, 56 ली. हथकड़ शराब और 4500 ली. वॉश मिली। लेकिन, इसे बनाने वाला एक भी शख्स नहीं मिला। पुलिस आबकारी महकमे के साथ भटि्टयां तोड़कर शराब नष्ट और जब्त करके खाली हाथ लौट आई।

भारी-भरकम टीम… 2 एएसपी, 5 डीएसपी, 15 थानाधिकारी शामिल थे

दबिश देने वाली टीम में 2 एएसपी प्रवीण जैन व राजेश मील, 5 डीएसपी (भगवत सिंह हिंगड, राजेश मेश्राम, अंकित जैन, मुकुल शर्मा, रामकल्याण मीणा), 2 प्रशिक्षु डीएसपी (मृत्युजंय मिश्रा व राजेन्द्र बुरडक) व शहर के 15 थानाधिकारियों समेत आधे जिले की पुलिस शामिल थी। यही नहीं, जाब्ते में आरएसी की पूरी प्लाटून, पुलिस लाइन का विशेष जाब्ता समेत 350 पुलिसकर्मी भी थे।

पूरा गांव अवैध शराब के कारोबार में लिप्त, महज 56 ली. हथकढ़ शराब जब्त हुई
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गांव पर सुबह 5 बजे के बाद से दबिश शुरू हुई। पुलिस जाब्ते में अधिकारियों के अलावा आरएसी की पूरी प्लाटून, पुलिस लाइन का विशेष जाब्ता समेत कुल 350 पुलिसकर्मी शामिल रहे। पुलिस के साथ जिला आबकारी अधिकारी व उनकी फोर्स भी साथ रही। इतना भारी-भरकम जाब्ता गांव में पहुंचा तो बदमाश पुलिस को देखकर फरार कैसे हो गए? यहां यह सवाल खड़ा होना लाजमी है कि बदमाश कहां और कैसे भाग गए? पुलिस ने क्या बदमाशों का पीछा करना उचित नहीं समझा या जानबूझकर बदमाशों को भागने का मौका दिया गया।

अधिकारियों को खुश करने के लिए बनाए 3 केस
आबकारी महकमे ने इस पूरे मामले में सिर्फ खानापूर्ति करने के अलावा कुछ नहीं किया। अधिकारियों ने सिर्फ सरकार का प्रेशर कम करने और जिला कलेक्टर उज्ज्वल राठौड़ को दिखाने के लिए यह कार्रवाई की। आबकारी व पुलिस प्रशासन मौके पर गया और खुद की पीठ थपथपाने को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एक्साइज एक्ट की धारा 16/54 में 3 मुकदमे दर्ज करके आदेशों की इतिश्री कर दी।

गांव का पुनर्वास करना बड़ी चुनौती
कलम का कुआं गांव में कुछ समुदाय विशेष के लोग रहते हैं और अधिकतर अवैध रूप से हथकढ़ शराब बनाने के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। गांव की आबादी करीब 3 हजार लोगों की बताई जाती है। पुलिस व आबकारी महकमे यहां सालभर में कुल 10 कार्रवाई भी नहीं कर पाते हैं। जानकारों का कहना है कि सरकार जब तक इसे खुद के लिए चुनौती नहीं मानेगी और गांव के लोगों का पुनर्वास करके इन्हें दूसरा रोजगार उपलब्ध नहीं करवाएगी, यह लोग यह काम ही करेंगे।

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