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ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन नवंबर तक आएगी भारत, जान बचाने की इतनी होगी कीमत

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टीट्यूट द्वारा बनाई जा रही कोरोना वायरस की वैक्सीन नवंबर तक भारत में आ जाएगी। भारत में इस वैक्सीन का नाम ‘कोविशील्ड’ होगा और इसकी कीमत 1,000 रुपये होगी। वैक्सीन के निर्माण में शामिल भारतीय कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के प्रमुख अदर पूनावाला ने मंगलवार को ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने जोखिम पर अगले तीन महीने में 20 करोड़ डॉलर की वैक्सीन बनाएगी और इनमें से आधी भारत को मिलेंगी।

इस सोमवार को ‘द लांसेट’ मेडिकल जर्नल में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना वायरस के इंसानी ट्रायल के पहले चरण के नतीजे प्रकाशित हुए थे। वैक्सीन लोगों में एंटी-बॉडीज और T-सेल दोनों बनाने में कामयाब रही है और उनमें वायरस के खिलाफ इम्युनिटी देखने को मिली।

वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल कई देशों में जारी है और सितंबर तक इसके नतीजे आने की संभावना है। इस चरण के नतीजों के बाद ही वैक्सीन कितनी कारगर है, यह साफ होगा।

वैक्सीन के निर्माण में शामिल है सीरम इंस्टीट्यूट

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने अपनी इस वैक्सीन का लाइसेंस एस्ट्राजेनेका नामक ब्रिटिश कंपनी को दिया है और इस कंपनी ने वैक्सीन के निर्माण के लिए कई कंपनियों से साझेदारी की है, जिनमें भारत का सीरम इंस्टीट्यूट भी शामिल है। सीरम इंस्टीट्यूट सालाना एक अरब डोज बनाएगी जिनमें से आधी भारत को मिलेंगी।

सीरम इंस्टीट्यूट के प्रमुख अदर पूनावाला ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत के सभी लोगों तक वैक्सीन पहुंचाने में दो साल लग सकते हैं।

अगस्त मेें शुरू होगा भारत में तीसरे चरण का ट्रायल

पूनावाला ने कहा कि भारत में अगस्त में वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल शुरू होगा और इसे पूरा करने में लगभग दो-ढाई महीने लगेंगे। उन्होंने कहा कि अगर ट्रायल के नतीजे सकारात्मक रहे और ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया इसे मंजूरी देती है तो नवंबर में हम वैक्सीन लॉन्च कर देंगे।

उन्होंने कहा कि ट्रायल के साथ-साथ वैक्सीन का निर्माण किया जाएगा और इसमें 20 करोड़ डॉलर के निवेश का फैसला उन्होंने मात्र 30 मिनट में लिया।

एक महीने में बनेंगी छह करोड़ शीशियां, तीन करोड़ भारत को मिलेंगी- पूनावाला

पूनावाला ने कहा कि कंपनी हर महीने वैक्सीन की लगभग छह करोड़ शीशियां बनाएगी जिनमें से आधी यानि तीन करोड़ भारत को मिलेंगी, वहीं बाकी विकासशील और कम विकसित देशों में निर्यात की जाएंगी। उन्होंने कहा कि अपने देश की पहले सुरक्षा करने को देशभक्ति के कर्तव्य के तौर पर देखा जाता है।

उन्होंने कहा कि अगर बाकी बचे ट्रायल के नतीजे अच्छे नहीं आते हैं तो इन सभी शीशियों को नष्ट करना होगा।

अभी नहीं पता कितनी प्रभावी साबित होगी वैक्सीन- पूनावाला

मौजूदा स्थिति को समझाते हुए पूनावाला ने कहा, “अभी ये नहीं पता है कि वैक्सीन कितनी प्रभावी होगी। एक ट्रायल केवल इतना बता सकता है कि कोई वैक्सीन काम कर रही है या नहीं, लेकिन ये कितनी अच्छी तरह से काम कर रही है, ये पता नहीं है।” उन्होंने कहा, “अगर आप सभी वैक्सीन को देखें तो वे 70 से 80 प्रतिशत प्रभावी होती हैं। इसलिए 100 में से दो लोग फिर भी बीमार होंगे।”

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