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‘कप्तान’ धोनी के इन 4 फैसलों ने बदल दी भारतीय क्रिकेट की किस्मत, पहला वाला तो बेमिसाल!

एमएस धोनी भारत सहित दुनिया के सबसे सफल क्रिकेट कप्तानों में से एक हैं. धोनी फिलहाल विश्व के इकलौते कप्तान हैं, जिसने टी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप, वनडे वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी जीती हैं. रिकी पोंटिंग और ग्रीम स्मिथ जैसे महान कप्तान भी इस उपलब्धि को हासिल नहीं कर पाए हैं. इसके आलावा भी भारतीय क्रिकेट में सुधार के लिए धोनी ने बतौर कप्तान कई अहम फैसले लिए हैं. आज इस लेख में हम धोनी के 4 ऐसे ही फैसलों के बारे में जानेगे, जिसने भारतीय क्रिकेट तस्वीर बदल दी हैं.

1) वर्ल्ड कप 2011 फाइनल में खुद को प्रमोट करना

5 instances when MS Dhoni single-handedly carried the Indian batting

वर्ल्ड कप 2011 के फाइनल में श्रीलंका ने भारत को 276 रनों की लक्ष्य दिया था. जिसके जवाब में भारत ने 22 ओवरों में 114 पर कोहली के रूप में तीसरा विकेट गवांया था. इस दौरान सबको उम्मीद थी, फॉर्म में चल रहे युवराज सिंह बल्लेबाजी करने आएंगे लेकिन खुद स्पिनरों को अच्छा खेलते है, उस समय में श्रीलंका के दिग्गज मुरलीधरन गेंदबाजी कर रहे थे, इसके मद्देनजर वह युवराज से पहले कुछ बल्लेबाजी करने मैदान में आ गया और सिर्फ 79 गेदों पर नाबाद 91 रनों की पारी खेलकर भारत को 28 वर्षो बाद वर्ल्ड कप जीता दिया.  

2) टी20 वर्ल्डकप 2007 फाइनल में जोगिंदर शर्मा को ऐतिहासिक ओवर दिया

16 Facts about Joginder Sharma - India's Glory man

टी20 वर्ल्ड कप फाइनल 2007 में भारत ने पाकिस्तान को 158 रनों का लक्ष्य दिया था. इस दौरान पाकिस्तान को अंतिम ओवर में 13 रनों की दरकार थी. एक तरफ हरभजन सिंह जैसे दिग्गज गेंदबाज ने दवाब की स्तिथि में ओवर डालने से मना कर दिया था, तभी धोनी ने टीम के सबसे युवा खिलाड़ी को अंतिम ओवर देकर सभी को चौंका दिया. लेकिन जोगिंदर ने मिस्बाह उल हक को श्रीसंत के हाथो कैच आउट कराके भारत को पहला टी20 वर्ल्ड कप जीता दिया.

3) रोहित शर्मा को बतौर ओपनर मौका दिया

Rohit sharma is my idol wants to bat like India opener says says ...

रोहित शर्मा ने अपने वनडे की शुरुआत 2007 में बतौर मध्यक्रम बल्लेबाज की थी लेकिन करीब 6 वर्षो तक वह टीम से अंदर बाहर होते रहे. जिसके बाद आईसीस चैंपियंस ट्रॉफी 2013 में एमएस धोनी रोहित की प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें बतौर ओपनर मौका दिया. जिसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज वह भारत के सबसे सफल सलामी बल्लेबाजों में से एक हैं.

4) टीम में युवा खिलाड़ियों का समर्थन किया

Ravindra Jadeja

एमएस धोनी को जब टीम इंडिया का टेस्ट कप्तान बनाया था तब टीम में सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण, राहुल द्रविड़ और गांगुली जैसे सीनियर खिलाड़ी मौजूद थे. इस दौरान कई युवा खिलाड़ियों ने बतौर कप्तान धोनी के समर्थन से टीम में जगह भी बनाई थी.

धोनी ने मुरली विजय, रवीन्द्र जडेजा और सुरेश रैना जैसे युवा खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया और इन सभी खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन करके धोनी के फैसले को सही भी ठहराया. धोनी ने खराब प्रदर्शन के बाद कड़ा फैसले लेते हुए टीम से कई सीनियर खिलाड़ियों की छुट्टी भी की थी.

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