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कश्मीर से धारा 376 हटाने के समय भेजे गए थे जो 10 हजार जवान, उनको अचानक क्यों वापस बुला ली सरकार ?

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खात्मे का एक साल पूरा चुका है. इस एक साल के भीतर घाटी के अंदर एक से बढ़कर एक बदलाव हुए हैं. खासकर हिंसा की खेती तो एकदम उजड़ गई है. क्यों कि जो पाक पस्ती अलगाववादी जम्मू कश्मीर में नौजवानों को बरगलाकर सुरक्षाबलों के जवानों पर आए दिन पत्थरबाजी कराते थे. अब वो नौजवानों समझदार हो गए हैं. उनके हाथ में अब पत्थर नहीं किताबें आई गई हैं. उन्हें अब जम्मू कश्मीर के विकास की चिंता है. यानी कि अब हर सुबह जम्मू कश्मीर के लिए शांति की किरण के साथ ही विकास रूपी प्रकाश लेकर आती है.

ये सब देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है. मंत्रालय ने राज्य से अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों को हटाने का फैसला किया है. मंत्रालय ने राज्य में सुरक्षा हालात की समीक्षा करने के बाद ये फैसला किया है. इन कंपनियों की वापसी की प्रक्रिया अगले दो-तीन दिनों में शुरू हो जाएगी. गृह मंत्रालय के इस फैसले को घाटी में विश्वास बहाली के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है. गौर करने वाली बात ये है कि ये फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में तनाव बरकरार है. यही नहीं हाल ही में पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्‍हा को इस केंद्र शासित प्रदेश का उपराज्‍यपाल बनाया गया है.

कश्मीर घाटी में अनुच्छेद 370 के अंत से पहले करीब 30 हजार अतिरिक्त सीआरपीएफ जवानों की तैनाती की गई थी. इसके अलावा बीएसएफ, सशस्त्र सीमा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों को भी यहां पर बड़ी संख्या में तैनात किया गया था. इन जवानों की तैनाती के साथ ही घाटी में हालातों की समय-समय पर समीक्षा की जा रही थी. हाल ही में अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर इन जवानों को सुरक्षा ड्यूटी में भी लगाने का फैसला हुआ था, लेकिन यात्रा के स्थगित होने के बाद इन्हें फिर से आंतरिक सुरक्षा के लिए लगा दिया गया था.

गृह मंत्रालय के निर्देशा के मुताबिक जम्मू कश्मीर से वापस भेजी जाने वाली कंपनियों में सबसे ज्यादा 40 कंपनियां सीआरपीएफ की हैं. बीएसएफ, सीआइएसएफ और एसएसबी की 20-20 कंपनियां वापस भेजी जाएंगी. अधिकारियों ने बताया कि यहां से लगभग 10 हजार जवानों को हटाकर पूर्वोत्तर के राज्यों और नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात किया जाएगा. सीआइएसएफ की दो से तीन कंपनियों को गुजरात में तैनात किया जा रहा है.

बता दें कि 5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को खत्म कर दिया था. उस समय जम्मू कश्मीर में 400 अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किया गया था. इससे पहले दिसंबर 2019 की शुरुआत में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 20 कंपनियों को वापस बुलाया गया था. दिसंबर महीने के अंतिम सप्ताह में 72 कंपनियों को और हटाया गया था. अब 100 कंपनियों को हटाए जाने के फैसले के बाद 208 अतिरिक्त कंपनियां ही रह जाएंगी.

भले ही केंद्र सरकार ने अर्ध सैनिक बलों की 100 कंपनियों को वापस बुलाने का फैसला किया हो, सरकार ने ये भी साफ कर दिया है कि देश को अस्थिर करने की साजिश रचने वाले जिहादियों के खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी. दरअसल घाटी से पिछले एक साल में 150 के करीब आतंकियों का सफाया हो चुका है, जिनमें रियाज नाइकू जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं. आतंकवादी समूहों में शामिल होने वाले स्थानीय युवाओं की संख्या में भी 40% की कमी आई है. गृह मंत्रालय ने कहा कि 1 जनवरी से 15 जुलाई तक कश्मीर घाटी में 188 आतंकवादी-संबंधी घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 2020 में यह संख्या घटकर 120 हो गई.

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