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कानपुर का कातिल: विकास दुबे ने सबसे पहले बनाया ‘बुलेट गैंग’, फिर उसको लाडला बना लिए ‘बैलेट’ वाले

कानपुर :  हिंदी फिल्मों में एक आम नवयुवक जिस तरह एक मामूली अपराध कर जुर्म की दुनिया का बादशाह बनता है, कुछ वैसी ही कहानी है 55 साल के विकास दूबे की। जानकार कहते हैं कि 90 के दशक में कानपुर के एक कद्दावर नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. हरिकिशन श्रीवास्तव का संरक्षण पाकर विकास ने बुलेट गैंग बनाई। बुलेट बाइक पर खुलेआम असलहा लेकर चलने वाले नौजवानों ने छोटे-मोटे अपराध कर चौबेपुर, शिवली और बिल्हौर में पैर पसारे। प्रयोग कामयाब रहा और विकास मुखिया बन गया।

साल 1992 में विकास ने गांव में एक दलित शख्स की हत्या कर दी। श्रीवास्तव के आशीर्वाद से उसका बाल बांका नहीं हुआ। उन्हें जिताने के लिए विकास ने चुनावों में खूब मेहनत की। हरिकिशन चौबेपुर से चुनाव लड़ते थे। बिठूर और चौबेपुर में ब्राह्मण वोटों की बहुतायत के बीच विकास ने खुद को ब्राह्मण वोटों के नुमाइंदे के रूप में पेश किया और इसका फायदा भी उन्हें मिला। 90 के दशक में ही जब कानपुर के सियासी पटल पर कई नए चेहरे जड़े जमा रहे थे तो उस वक्त बीएसपी से जुड़े नेताओं मसलन राजाराम पाल और भगवती सागर ने विकास से दोस्ती की। दोस्ती गाढ़ी हुई और विकास ने दोस्ती का फर्ज भी कई मौकों पर चुकाया।

विकास के लिए थाने में धरने पर बैठ गए थे नेता
राजाराम अब कांग्रेस में तो भगवती सागर बीजेपी में हैं। उस दौर में कानपुर में लूट और हत्या के कई मामलों के बाद पुलिस ने विकास के एनकाउंटर की पृष्ठभूमि तैयार कर ली थी, लेकिन नेताओं ने विकास के दोस्तों के साथ कल्याणपुर थाना घेरकर विकास को बचा लिया। उसके समर्थन में कई नेता तो धरने पर बैठ गए थे। विकास को लगातार नेताओं का संरक्षण मिलता जा रहा था और माल लदे ट्रकों में लूट करवान जैसे काम उसके लिए बेहद आसान चीज हो गई थी। नेताओं के संरक्षण में लूट का माल मसलन आलू और तेल के टिन बिकरू गांव में बंटते थे। यही वजह थी कि आज तक बिकरू गांव का कोई भी व्यक्ति विकास का विरोधी नहीं हुआ। वे विकास के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार रहते थे।

डीएसपी को कमरे में बंद कर पीटा था
लोग यहां तक कहते हैं कि 2001 में शिवली थाने में तत्कालीन दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या में उसे कई सत्ताधारियों का ही पूरा संरक्षण मिला था। संतोष शुक्ला की हत्या के बाद जब हरिकिशन श्रीवास्तव थाने पहुंचे थे तो शव देख उनके मन में दहशत बैठ गई थी। इस वारदात के बाद तत्कालीन मंत्री प्रेमलता कटियार पर विकास को संरक्षण देने के आरोप लगे, पर कटियार ने हमेशा इस बात का खंडन किया। नब्बे के दशक के आखिरी में कानपुर में एक डीएसपी अब्दुल समद से झगड़ा होने पर विकास ने उन्हें कमरे में बंद कर पीटा था। विकास की मां ने पुलिसवालों से दुश्मनी न लेने की नसीहत देकर डीएसपी को छुड़ाया था।

मौजूदा सरकार के नेताओं से भी नजदीकियां
कल्याणपुर थाना घेरने के अलावा 2-3 मौके फिर ऐसे आए, जब पुलिस विकास के एनकाउंटर के करीब आ गई, लेकिन नए-नए हथकंडे अपना उसे बचा लिया गया। पूर्व विधायक अनिल शुक्ला वारसी की भी विकास ने खूब मदद की। जानकार कहते हैं कि विवादित जमीन खरीदकर मुनाफाखोरी करने का आदी विकास पिछले 30 साल में हर ताकतवर नेता का लाड़ला रहा। मौजूदा सरकार में भी कई मंत्रियों और सांसदों के साथ उसकी नजदीकियों के चर्चे आम हैं। पर खुलकर कोई कुछ कहने को तैयार नहीं है।

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