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काली : भारत का वो छुपा हुआ ‘ब्रह्मास्त्र’, जिसकी आहट से ही चीन गया कांप !

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में पैदा हुई तनावपूर्ण स्थिति ने अब नया मोड़ ले लिया है. चीन के फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर्स की सीमा पर ऐक्टविटी तेज होने के बाद इंडियन आर्मी ने भी अपने सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को यहां तैनात कर दिया है. सेना ने अपनी ‘आकाश’ मिसाइलें भी यहां भेज दी हैं जो किसी भी तेज रफ्तार एयरक्राफ्ट या ड्रोन को सेकेंड्स में खाक कर सकती हैं. सिर्फ भारत ही नहीं, अमेरिका भी चीन के मंसूबों को समझ चुका है और उसने यूरोप से अपनी सेना हटाकर एशिया में तैनाती शुरू कर दी है. ऐसे हालात में भले ही ड्रैगन शक्ति प्रदर्शन करते हुए भारत समेत पूरी दुनिया को डराने की कोशिश कर रहा हो, भारत के पास कुछ ऐसे हथियार हैं जिनसे मिनटों में ही चीन को धूल चटाई जा सकती है.

कल्पना करिए भारत के उपर हमला हो गया है. दुश्मन के लड़ाकू जहाज और मिसाइलें हमले के लिए प्रस्थान कर रहे हैं. सीमा पर टैंकों का स्क्वैड्रन हमले के लिए बढ़ रहा है. समुद्री सीमा से नौसैनिक जहाजों का जत्था आगे आ रहा है. तभी अचानक एक रोशनी सी चमकती है और दुश्मन के सभी टैंक, लड़ाकू विमान, नौसैनिक जहाज और मिसाइलें एक धमाके के साथ खुद ब खुद आग के गोले में बदलकर खाक हो जाते हैं. ये कोई कल्पना नहीं बल्कि वास्तविकता है और ये कमाल कर सकता है भारत का सीक्रेट हथियार ‘काली’ अर्थात किलो एंपीयर लीनियर इंजेक्टर(Kilo ampere linear injector).

क्या है ‘काली’ की ताकत?  
‘काली’ भारत का एक महाशक्तिशाली रक्षक हथियार है. जो कि दुश्मन के किसी भी हमले को नाकाम कर सकता है. इसके सामने विशालकाय टैंक, अत्याधुनिक लड़ाकू विमान उन्नत मिसाइलें भी फेल हैं. ऐसा कोई भी आधुनिक हथियार जिसमें इलेक्ट्रोनिक चिप, सर्किट या फिर किसी और तरीके की वायरलेस तकनीक लगी हो, उसे ‘काली’ पल भर में नष्ट कर सकता है. मिसाइलों और लड़ाकू विमानों के अलावा ये ड्रोन जैसे चालकरहित सशस्त्र विमानों और यहां तक कि अंतरिक्ष में घूम रही सैटेलाइट को भी मार कर गिरा सकता है.

कैसे काम करता है ‘काली’?
भारत का शक्तिशाली हथियार ‘काली’ इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगों(electro magnatic waves) का तूफान पैदा करने वाला यंत्र है. जो सेकंड्स के अंदर भारी मात्रा में तरंगों की बौछार करता है. जिससे ये अपने संपर्क में आने वाले किसी भी इलेक्ट्रोनिक उपकरण को ठप कर देते हैं. लड़ाकू विमानों, टैंकों, मिसाइलों, ड्रोन और सैटेलाइट्स में कई तरह के सर्किट और इलेक्ट्रोनिक चिप होते हैं. जो कि इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगों के प्रहार के कारण काम करना बंद कर देते हैं. जिसकी वजह से ये अत्याधुनिक मशीनें पल भर में कबाड़ का ढेर बन कर रह जाती हैं. जिसके बाद इनके अंदर मौजूद हथियारों में विस्फोट हो जाता है.

‘काली’ के अंदर छोटे-छोटे संयंत्रों के अंदर भारी मात्रा में ऊर्जा को संग्रहित की जा सकती है. जिन्हें चार्ज करने के बाद किसी भी वक्त एक झटके से अपने लक्ष्य के उपर फेंका जा सकता है. इसकी कार्यप्रणाली को आसानी से समझने के लिए घरेलू कैपेसिटर या कंडेन्सर तो गौर से देखिए. जिसमें उर्जा एकत्रित होती है. जिसे छूने से करंट का झटका लगता है. इसी तरह काली में भारी मात्रा में उर्जा संग्रहित करने वाले कैपिसिटर जैसे यंत्र लगे होते हैं. जिनमें एकत्र उर्जा दुश्मन के इलेक्ट्रोनिक उपकरणों को जाम करके उसे पंगु बना सकती है.

कैसे तैयार किया गया ‘काली’
‘काली’ के जनक भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) के पूर्व डायरेक्टर डॉ. आर. चिदंबरम थे. उन्होंने इसे तैयार करनी योजना साल 1985 में ही बनाई थी. लेकिन लंबी चौड़ी तैयारी करने के बाद साल 1989 में जाकर इसपर काम करना शुरु हो पाया. इसपर पिछले तीन दशकों से लगातार काम चल रहा है. इस बीच इसके कई संस्करण तैयार किए गए हैं. सबसे पहले ‘काली-80’ विकसित किया गया जिसके बाद ‘काली-200’ फिर ‘काली-5000’ और अब ‘काली-10000’ विकसित किया जा चुका है. ‘काली’ के निर्माण की प्रक्रिया में BARC(भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर) और DRDO(रक्षा विज्ञान और अनुसंधान संस्थान) दोनों जुड़े हुए हैं.

भारत का सीक्रेट मिशन है ‘काली’ 
‘काली’ और उसकी मारक क्षमता के बारे में भारत सरकार ने आधिकारिक रुप से कोई बयान जारी नहीं किया है. अभी सिर्फ इसके बारे में बुनियादी जानकारियां ही बाहर आई हैं. भारत की रक्षा क्षमता के लिए यह प्रोजेक्ट इतना अहम है कि सरकार ने इसके बारे में संसद में जानकारी देने से इनकार कर दिया था. समाचार एजेन्सी पीटीआई से प्राप्त जानकारी के मुताबिक 14 जुलाई 2018 को लोकसभा में काली-5000 से संबंधित सवाल पूछा गया था कि ‘क्या काली 5000 को देश के रक्षा विभाग में शामिल करने का कोई प्रस्ताव है, अगर हां तो उसके बारे में बताया जाए’ लेकिन तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिक्कर ने इस बारे में राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया था.

लेकिन उनके उत्तर से यह स्पष्ट था कि भारत का सीक्रेट हथियार ‘काली’ कोई अफवाह मात्र नहीं बल्कि सचमुच अस्तित्व में है और इसपर तेजी से काम चल रहा है. दरअसल सबसे पहले ‘काली’ को विमानों की जांच के लिए तैयार किया गया था. लेकिन इसकी क्षमताओं को देखते हुए बाद में इसे हथियार के रुप में बनाने का फैसला किया गया. यह इतना घातक है कि जल, थल और आकाश से आने वाले किसी भी दुश्मन को पल भर में तबाह कर सकता है.

यही कारण है कि चीन और पाकिस्तान जैसे भारत के दुश्मन देश ‘काली’ का नाम सुनते ही डर से थर थर कांपने लगते हैं.

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