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किसान आंदोलन को फैलाने के लिए नई रणनीति, दिल्ली बॉर्डर पर कम की जा रही भीड़

अब तक किसान आंदोलन का केंद्र रहे सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर अब किसानों की भीड़ कम होने लगी है और एक महीने पहले हजारों किसानों की तुलना में अब यहां आधे ही किसान रह गए हैं। ऐसा नहीं है कि आंदोलन कमजोर पड़ने लगा है, बल्कि ऐसा एक नई रणनीति के तहत किया जा रहा है। किसान नेताओं के अनुसार, वे आंदोलन का विकेंद्रीकरण करने जा रहे हैं और अब इसे देश के अंदरूनी इलाकों में फैलाया जाएगा।

किसान ने कहा- लंबी होने वाली है लड़ाई

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर धरने के 80 से अधिक दिन होने के बाद अब कई किसान अपने गांव वापस लौट रहे हैं।किसानों का कहना है कि यह स्पष्ट है कि यह एक लंबी लड़ाई होने वाली है और इसलिए बॉर्डर पर कम किसान रखना उनकी नई रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस रणनीति के तहत आंदोलन का विस्तार किया जाएगा।

पूरे देश में महापंचायतें आयोजित करेंगे राकेश टिकैत

किसान नेताओं का ध्यान अब राज्यों में बड़ी रैलियां आयोजित कर आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने पर है।

26 जनवरी की हिंसा के बाद कमजोर पड़े आंदोलन को फिर से जिंदा करने वाले भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेता राकेश टिकैत ने पूरे देश में महापंचायतें करने की योजना बनाई है।

वह आने वाले 10 दिनों में हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान में कई महापंचायतें आयोजित करने वाले हैं। इससे पहले भी वह हरियाणा में महापंचायतें आयोजित कर चुके हैं।

बयान

जगतार सिंह बाजवा बोले- खेत में काम कर रहा किसान भी अब आंदोलन का हिस्सा

गाजीपुर आंदोलन समिति की प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने मामले पर कहा, “सरकार के हठ को ध्यान में रखते हुए पहले सीमाओं को आंदोलन का केंद्र बनाया गया था। अब किसान नेता अपनी रणनीति बदल रहे हैं ताकि आंदोलन हर गांव के हर घर तक पहुंच सके। हम अलग-अलग जगह पर महापंचायतों का आयोजन कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब महज बॉर्डर तक सीमित नहीं है और खेत में काम कर रहा किसान भी इसका हिस्सा है।

बयान

जरूरत पड़ने पर एक दिन में एक लाख किसान आ जाएंगे गाजीपुर बॉर्डर- बाजवा

बाजवा ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर किसान एक बार फिर से दिल्ली के बॉर्डर पर जमा हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “गाजीपुर बॉर्डर पर जब कभी भी हमें संख्या की जरूरत होगी, एक लाख किसान एक दिन के अंदर आ सकते हैं।”

समर्थन

सामाजिक कार्यकर्ता भी आंदोलन के विस्तार के समर्थन में

आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी आंदोलन को फैलाने के फैसले का समर्थन करते हुए इसे अहम बताया है।

रेमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित कार्यकर्ता संदीप पांडे ने कहा, “पंजाब, हरियाणा और अन्य स्थानों पर छोटे प्रदर्शन हुए हैं। अब यह बढ़ रहे हैं… बिहार में रैलियां हो रही हैं, पूर्वी उत्तर प्रदेश, अवध, के किसान ट्रैक्टरों पर नहीं आ सकते, इसलिए हम लोग वहीं पर रैलियां करने की योजना बना रहे हैं।”

मुद्दा

क्यों आंदोलन कर रहे हैं किसान?

मोदी सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए तीन कानून लेकर लाई है।

इनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद के लिए व्यापारिक इलाके बनाने, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडारण सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं।

पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इनके जरिये सरकार मंडियों और MSP से छुटकारा पाना चाहती है।

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