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बाइडन को रूस-विरोध के लिए चाहिए था सिर्फ एक मौका, कैपिटल हिल दंगों ने उन्हें वो दे दिया!

कैपिटल हिल हिंसा ने बाइडन और डेमोक्रेटिक पार्टी को रूस को निशाना बनाने का एक सुनहरा अवसर दिया है l हम पहले भी बता चुके हैं कि बाइडन प्रशासन की नीतियों के रूस विरोधी रुख की पूरी संभावना है l बाइडन शुरू से अमेरिका तथा स्वतंत्र विश्व के लिए रूस को चीन की अपेक्षा बड़ा खतरा मानते रहे हैं l अब अमेरिकी संसद में हुई हिंसा के बाद उनकी पार्टी की ओर से आए बयान के अनुसार डेमोक्रेट मानते हैं कि यह रूस द्वारा प्रायोजित घटना थी l

बता दें कि डेमोक्रेटिक पार्टी पहले भी ट्रम्प को रूस का एजेंट कहती रही है और अब ट्रम्प समर्थकों द्वारा की गई हिंसा पर पार्टी की वरिष्ठ नेता नैंसी पेलोसी ने बयान देते हुए कहा है “यह पुतिन के लिए बड़ा तोहफा हैl” वहीं अमेरिका स्थित एक प्रमुख थिंकटैंक IGTDS ने तो बाकायदा इसपर एक रिपोर्ट छापकर यह भी सिद्ध करने की कोशिश की है कि इसके पीछे मूलतः रूस की इंटेलिजेंस एजेंसी का हाथ है l

हालांकि तार्किक आधार पर देखा जाए तो यह कतई सत्य नहीं दिखेगा l यदि डेमोक्रेटिक पार्टी के पूर्व के आरोपों को सही मानकर यह मान लें कि ट्रम्प वास्तव में रूस के एजेंट थे, तो क्या यह संभव है कि रूस अपने ही व्यक्ति की छवि खराब करेगा? इससे रूस को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलने वाला, क्योंकि सभी जानते हैं कि ट्रम्प की व्हाइट हाउस से विदाई सुनिश्चित हो गई है l

साथ ही रूस यह भी जानता है कि आने वाले बाइडन प्रशासन की सभी घोषणाएं रूस विरोधी ही रही हैं l ऐसे में रूस, यदि अमेरिकी आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप करने में सक्षम भी हुआ तो, वह ट्रम्प के लिए तोड़फोड़ करवाना पसन्द करेगा या बाइडन की गुडविल जीतना l

तार्किक आधार पर विचार करें तो डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा रूस पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं l तोड़ फोड़ अति उत्साही ट्रम्प समर्थकों की बेवकूफी का नतीजा था न कि किसी बाहरी देश की कारस्तानी l

कैपिटील हिल की घटना पुतिन के लिए हो न हो, डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए जरूर बड़ा तोहफा है, जो पहले भी लगातार रूस पर हमलावर रही है तथा चीन के बजाए उसे असली समस्या की तरह पेश करती रही है l

हमने अपने लेख में बताया था कि कैसे ट्रम्प ने अमेरिकी विदेश नीति में आमूल चूल परिवर्तन कर दिया था l ट्रम्प ने रूस के बजाए चीन को मुख्य शत्रु घोषित किया l उनकी नीति में अनावश्यक रूस विरोध नहीं था l यहाँ तक कि चुनाव से कुछ समय पूर्व कई वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिकों द्वारा ट्रम्प प्रशासन से यह मांग भी की गई थी की रूस से संबंध पर पुनर्विचार करें l

अमेरिका का रूस विरोध केवल चीन की मदद कर रहा था l अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूस आर्थिक रूप से चीन पर निर्भर होता जा रहा है, जिससे रूस-चीन सहयोग और मजबूत हो रहा है l यहाँ तक कि रूस ने यह भी घोषणा की थी कि दोनों देशों में सैन्य गठबंधन भी संभव है l यदि ऐसा होता है तो एशिया-यूरोप के भूराजनीतिक समीकरण पलट जाएंगे, और अमेरिका को नुकसान होगा l

हालांकि रूस को चीन समर्थन की इस अवस्था तक जाने से पहले रोका जा सकता है यदि अमेरिका उसपर से दबाव कम करे l रूस स्वयं भी चीन के अधीनस्थ की इस अवस्था को केवल मजबूरी में ही स्वीकार करेगा l ट्रम्प प्रशासन ने इस पूरे परिदृश्य को समझा और अनावश्यक रूस विरोध को कम किया l

लेकिन डीप स्टेट के लिए रूस का विरोध व्यापार बन गया है l अमेरिका और रूस दुनिया के सबसे बड़े हथियार निर्यातक देश रहे हैं l रूस पर प्रतिबंध हथियारों की दौड़ में अमेरिका को लाभ देता हैं l साथ ही रूस के प्रभाव को रोकने के लिए होने वाले युद्ध भी एक व्यापार का रूप ले चुके हैं l इसी कारण रूस विरोध की परंपरागत नीति निहित स्वार्थों वाले लोगों के लिए फायदे का सौदा है l

आज चीन स्वतंत्र लोकतांत्रिक विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है, न कि रूस l जबकि बाइडन प्रशासन पुनः उसी पारंपरिक रूस विरोधी विदेश नीति की ओर लौटने वाली है, जिसमें आज के समीकरण को साधने का लचीलापन नहीं है l रूस विरोध अमेरिका में कुछ लोगों को आर्थिक लाभ अवश्य दे सकता है लेकिन इसके लिए स्वतंत्र विश्व की सुरक्षा को दांव पर लगाना मूर्खता है l

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