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कोरोना-काल में दिल्ली अचानक हुई जहरीली, हर सांस ले जा रही मौत के पास, कैसे बचाएं जान?

नई दिल्ली
कोविड संक्रमण और प्रदूषण का कॉकटेल दिल्लीवालों को और बीमार कर रहा है। कोविड संक्रमण और प्रदूषण की वजह से लोगों का दम घुट रहा है। हर किसी को सूखी खांसी हो रही है। डॉक्टर खुद समझ नहीं पा रहे हैं कि खांसी कोविड की वजह से है या प्रदूषण की वजह से। अस्पतालों में सांस की दिक्कत और खांसी के मरीजों की संख्या में 4 से 5 गुणा तक इजाफा देखा जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि जिस स्तर पर इस समय प्रदूषण है, उसमें अगर कोई दिन भर सांस लेता है तो वह 30 सिगरेट जितना धुआं बिना सिगरेट पिए ले रहा है।

बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के रेसपिरेट्री डिपार्टमेंट के डॉ. संजीव नायर ने बताया कि हालात बहुत खराब हैं। सुबह से ही मरीजों की लंबी लाइन लग रही है। गले में दर्द, गले में सूजन, सूखी खांसी, आंखों में पानी, सांस में दिक्कत के मरीज आ रहे हैं। बुजुर्गों की स्थिति बहुत ही खराब है। अभी सिर्फ लोगों को घर के अंदर रहना होगा। जान बचानी है तो त्योहार को भूल जाएं और घर में रहें। बाहर निकलेंगे तो कोविड का खतरा और जहरीली हवा बीमार करने के लिए तैयार है।

मणिपाल हॉस्पिटल के कार्डिोलॉजिस्ट डॉ. युगल किशोर मिश्रा ने कहा कि लॉकडाउन में छूट के बाद लंग्स और हार्ट के मरीज बढ़ गए थे। ये वे मरीज थे जो पहले से बीमार थे, लेकिन कोविड के डर से इलाज के लिए अस्पताल नहीं पहुंच रहे थे। अब ऐसे मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं, जिससे इस प्रकार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जितनी भी स्टडी हुई है, उससे यह साफ हो गया कि कोविड की वजह से हार्ट पर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ गया है। इसी प्रकार कोविड की वजह से लंग्स में फाइब्रोसिस बन रहा है। यह इतना खतरनाक है कि लंग्स को पूरी तरह से खराब कर देता है। देश में ऐसे दो मरीजों को लंग्स ट्रांसप्लांट कराना पड़ा है। वहीं, अस्पताल में बढ़े मरीजों में एक बड़ा तबका प्रदूषण की वजह से बीमार वाले हैं। जिन्हें पहले से लंग्स की दिक्कत है, उनकी परेशानी काफी बढ़ गई है।

कोविड और प्रदूषण के डबल अटैक के बारे में फोर्टिस अस्पताल के लंग्स कैंसर एक्सपर्ट डॉक्टर शुभम गर्ग ने बताया कि अभी दिल्ली में जिस स्तर पर पीएम 2.5 का स्तर वह है। वह नॉर्मल से 10 गुणा ज्यादा है। पीएम 2.5 के कण कारसिनोजेनिक होते हैं, यानी इससे कैंसर हो सकता है। यही नहीं जिस स्तर पर प्रदूषण है, उसमें अगर कोई दिन भर सांस लेता है तो वह 30 सिगरेट जितना धुआं बिना सिगरेट पिए ले रहा है। इसके अलावा इस हवा में सांस लेने वाले को अगर कोविड हो जाता है तो ऐसे लोगों को इलाज के दौरान ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत हो सकती है। इन्हें ज्यादा समय तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ सकता है। इन्हें ज्यादा समय तक आईसीयू बेड की जरूरत पड़ सकती है।

स्मॉग में होते हैं कई तरह के केमिकल, जो सेहत के लिए हानिकारक
मैक्स हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विवेका कुमार ने कहा कि स्मॉग में कोहरे और धुएं के अलावा कई तरह के केमिकल होते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक हैं। कोहरे की वजह से ये केमिकल्स जमीन के ठीक ऊपर जम जाते हैं। अगर ये पार्टिकल्स सांस के जरिए गले के अंदर तक पहुंच जाएं, तो सांस लेने में दिक्कत आने लगती है और खांसी शुरू हो जाती है। यह पूरे ट्रैक को इफेक्ट करता है, जिससे ब्रोंकाइटिस का अटैक पड़ सकता है। स्मॉग में छिपे केमिकल के कण अस्थमा के अटैक की आशंका को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। इसके चलते फेफड़ों की क्षमता भी कम हो सकती है।

दिल्ली की हवा ना केवल लंग्स और हार्ट के लिए खतरनाक हैं, बल्कि इससे आंखें भी प्रभावित हो रही हैं। घर से बाहर 5 मिनट में ही आंखों में जलन शुरू हो जा रही है। आई सेवन के डॉ. संजय चौधरी ने कहा कि प्रदूषण सबसे ज्यादा आंखों को प्रभावित कर रहा है। गाड़ियों से निकलने वाला धुआं सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। इसमें मौजूद कॉर्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोऑक्साइड से आंखों पर बुरा असर पड़ता है। फैक्ट्री से निकलने वाला सल्फर आंखों को खराब करता है। जब-जब दिल्ली में पीएम 2.5 कम होता है, तब-तब लोगों को सांस की दिक्कत के साथ आंखों में परेशानी शुरू हो जाती है। ऐसे में बचाव पर अमल करना ही बेहतर इलाज है।

क्या हैं लक्षण

आंखों में जलन, खुजली, लाइट में देखने में दिक्कत, आंखों में चिपचिपाहट, कीचड़ आना, पलकों में सूजन और आंखों में ड्राइनेस।

ऐसे करें बचाव
पलूशन ज्यादा है तो घर पर ही रहें। बाहर निकलने पर आंखों को ठीक से कवर करने वाला चश्मा पहनें। बार-बार अपनी आंखों को न छुएं। लेंस का इस्तेमाल करते हैं तो ज्यादा प्रदूषण होने पर इसे निकाल लें। ड्राइनेस लगे तो कोई भी दवा अपने मन से न इस्तेमाल करें।

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