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कोरोना का कहर : दिल्ली और मुम्बई में से कौन कितना गंभीर, यहां समझिए

भारत (India) में कोरोना वायरस (Coronavirus) की स्थिति किसी से छुपी नहीं है. चाहे मरीजों की संख्या हो या फिर बीमारी से हुई मौतों का आंकड़ा इजाफा रोज दिख रहा है. जैसे हालात हैं साफ है कि भारत से बीमारी इतनी जल्दी नहीं खत्म होने वाली है. बात अगर इस बीमारी के प्रकोप की हो तो चाहे गुजरात की राजधानी अहमदाबाद (Ahmedabad) हो या फिर देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) और मुम्बई (Mumbai) इन तीनों ही शहरों में हालात बद से बदतर हैं. बीते 9 जून को मुंबई ने केसों की संख्या के मामले में चीन के वुहान की बराबरी कर ली है. वुहान ही वो शहर था जहां हालात बद से बदतर हुए और नतीजा ये निकला कि पूरी दुनिया ने कोरोना की सबसे ज्यादा मौतें यहीं देखीं.

वर्तमान में दिल्ली की हालत सबसे ज्यादा खराब है जिसने वुहान को पीछे छोड़ने वाले मुंबई को भी पीछे छोड़ दिया है. दिल्ली से आ रहे आंकड़े हैरान करने वाले हैं. स्थिति जब इस हद तक खराब हो तो जो सबसे पहला सवाल हमारे सामने आता है वो ये कि दिल्ली और मुम्बई में से कौन कितना गंभीर है? साथ ही ये भी कि ऐसा क्या किया जाए कि हालात सामान्य हो जाएं.

दिल्ली से जो खबरें आ रही हैं वो दिल दहलाने वाली हैं. चाहे मरीजों के लिए बेड हो या फिर बीमारी के चलते अपनी जान गंवाने वाले लोगों के लिए कब्रिस्तान और शमशान घाट हालात चिंताजनक हैं. दिल्ली हूं ही कोरोना का हॉटस्पॉट नहीं बना. इसके पीछे तमाम कारण हैं. हमारे लिए भी ये बहुत ज़रूरी हो जाता है कि हम उन कारणों पर बात करें और स्थिति की गंभीरता को समझें.

दिल्ली का इंफ्लेक्शन पॉइंट 29 मई था. उसके ही अगले दिन कोरोना के मामलों में तेजी दिखाई दी और उसके बाद से लेकर अब तक दिल्ली में हर रोज़ 1000 से ऊपर मामले कोरोना के सामने आ रहे हैं. वर्तमान में ये संख्या तीन गुनी है और यदि इसे वक़्त रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो हालात बद से बदतर बन जाएंगे.

जून के दूसरे हफ्ते तक मुंबई की हालत बहुत ज्यादा ही खराब थी और इसे दिल्ली से कहीं ज्यादा घातक माना जा रहा था मगर अब के हालात अलग हैं. मामले तो बढ़ ही रहे हैं साथ ही दिल्ली को लेकर राजनीति भी खूब हो रही हैं. बता दें कि जून के पहले हफ्ते में दिल्ली में कोरोना के मामलों का प्रतिशत जहां 5.25 था तो वहीं मुंबई में ये संख्या 3 प्रतिशत थी.

शरुआत में जैसे कयास लगाए गए उनमें यही कहा गया कि दिल्ली, मुंबई को संख्या के मामलों में पीछे तो करेगी मगर ये सब जुलाई में होगा मगर ये सब काफी पहले हो जाना इसकी तस्दीख कर देता है कि विश्व के किसी अन्य शहर के मुकाबले दिल्ली में बीमारों की संख्या कहीं ज्यादा है.

दिल्ली की ये स्थिति भले ही डरावनी तो मगर उम्मीद की एक किरण भी हमें यहीं नजर आती है. दिल्ली की जनसंख्या मुम्बई से कही अधिक है. चूंकि यहां लोग ज्यादा हैं इसलिए यहां लोगों के टेस्ट भी ज्यादा हो सकते हैं.

फिलहाल कोविड 19 टेस्टिंग के जो अनुपात सामने आए हैं हर 10 लाख की आबादी में 22,142 लोगों के टेस्ट हुए हैं जबकि मुंबई में 22,668 लोगों के टेस्ट हए हैं. पर क्यों कि मुम्बई का पाजिटिविटी रेट दिल्ली की अपेक्षा अधिक है इसलिये संभावना जताई जा रही है कि दिल्ली के मामलों में सावधानी बरती गई तो चीजें बेहतर हो सकती हैं और अच्छी खबर आ सकती है.

दिल्ली के मामले में एक अन्य अच्छी बात जो निकल लार सामने आई है वो ये कि जिस हिसाब से यहां की आबादी है मामले कम हैं. वहीं मुम्बई की आबादी के हिसाब से आंकड़ा अधिक है जो मुंबई की जटिलता का बखूबी बयान करता है.

बहरहाल, अब जबकि राजधानी दिल्ली में मामले बढ़ रहे हैं स्थिति तभी ही ठीक हो सकती है जब टेस्टिंग पर बल दिया जाए जिसकी बात दिल्ली सरकार ने की है. कोरोना को लेकर दिल्ली और केंद्र दोनों ही वर्तमान में गंभीर हुआ है जो ये बताता है कि  अगर राजनीति न हुई और टेस्टिंग को अमली जामा पहनाया गया तो दिल्ली और दिल्ली की जनता मिलकर बड़ी ही आसानी के साथ कोरोना को मात दे सकती है.

दिल्ली और मुंबई के मद्देनजर आगे की स्थिति क्या होगी इसका फैसला वक़्त करेगा लेकिन जो वर्तमान है वो इस बात की तस्दीख कर दे रहा है कि हालात सम्भल सकते हैं बशर्ते लोग जागरूकता दिखाएं और सरकार भी उनकी मदद के लिए सामने आए और पिछली गलतियों को भूलते हुए वो तमाम प्रयास करे जो लोगों के लिए हितकारी हों.

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