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कोरोना को हराने वाले लोग फिर हो रहे संक्रमित, जानिए क्या हैं इसके मायने

कोरोना वायरस बड़ी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। इसकी वैक्सीन बनाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, लेकिन ठीक हो चुके मरीजों के फिर से संक्रमित होने से विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ गई हैं। हाल ही में हांगकांग में कोरोना वायरस को मात दे चुके व्यक्ति के फिर से संक्रमित होने का मामला सामने आया है। आइए जानते हैं कि री-इंफेक्शन के क्या मायने हैं और क्या यह चिंताजनक है?

पहले जानते हैं क्या होता है री-इंफेक्शन

दरअसल, किसी संक्रामक बीमारी की चपेट में आने के बाद ठीक होना और महीनों बाद फिर से उसी बीमारी की चपेट में आने को री-इंफेक्शन कहा जाता है। कोरोना वायरस के मामले में अब यह री-इंफेक्शन सामने आने लगा है। पहले चीन में दो लोगों, उसके बाद हांगकांग में एक, भारत के तेलंगाना में दो और नीदरलैंड्स और बेल्जियम में एक-एक व्यक्ति कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद अब फिर से उसकी चपेट में आए हैं।

वायरस के अलग स्ट्रेन के कारण हो रहे दोबारा संक्रमित

मीडिया सूत्रों के अनुसार फिलहाल कोरोना से दोबारा संक्रमित होने का कोई प्रमुख और पुख्ता कारण तो सामने नहीं आया है, लेकिन हांगकांग के मामले में वायरस SARS-CoV-2 का दूसरा स्ट्रेन दोबारा संक्रमण का कारण था। इसके कारण विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि कोरोना वायरस अपनी प्रकृति बदलकर दोबारा संक्रमित कर सकता है। हालांकि, फिलहाल इस पर अध्ययन जारी है और विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है।

पहले की तुलना में बहुत कम या नजर नहीं आएंगे लक्षण

शोधकर्ताओं के अनुसार महामारी बढ़ने के साथ-साथ दोबारा संक्रमित होने के मामले सामने आएंगे, लेकिन राहत की बात यह है कि दोबारा संक्रमित होने वालों में गंभीर लक्षण नहीं होंगे। दोबारा संक्रमण पर या तो बहुत हल्के लक्षण होंगे या फिर होंगे ही नहीं। इससे संकेत मिलता है कि पहली बार वायरस के हमले के बाद इम्युन सिस्टम इसकी पहचान कर लेता है और दूसरा बार वायरस के हमले पर इसे कमजोर कर देता है।

दोबारा संक्रमित होने वालों से बीमारी फैलने का बहुत कम खतरा

अध्ययनों में यह भी सामने आया कि दोबारा संक्रमित होने वाले लोगों से संक्रमण के प्रसार का खतरा बहुत कम होता है। इसका कारण उनमें बहुत कम लक्षण होना और खांसने और छींकने पर बहुत कम और कमजारे वायरस बाहर छोड़ना है।

वायरस से इम्युन होने के बाद भी रहता है संक्रमण का खतरा

वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के इम्यूनोलॉजी विभाग की प्रोफेसर लॉरेन रोड्डा के अनुसार पहले उपचार के बाद शरीर वायरस के खिलाफ इम्युनिटी बढ़ाता है, लेकिन वायरस से इम्युन होने का मतलब यह नहीं है कि दोबारा संक्रमित नहीं हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी बार लक्षण नहीं होते हैं और मरीज संक्रामक भी नहीं होता। इसके अलावा खून से 120 दिन बाद एंटीबॉडी खत्म होने पर शरीर में पनपी टी-सेल्स भी तेजी से वायरस पर हमला करने में सक्षम होती है।

दोबारा संक्रमण का वैक्सीन पर क्या होगा असर?

दोबारा कोरोना वायरस की चपेट में आए लोगों ने वैक्सीन तैयार कर रहे वैज्ञानिकों को भी चिंता में डाल दिया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन मामलों के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या वैक्सीन कोरोना वायरस के अलग-अलग स्ट्रेनों के खिलाफ सफल होगी। हालांकि, वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील का कहना है कि अभी वैक्सीन विकसित की जा रही है और विशेषज्ञ उसे वायरस के सभी प्रारूपों के खिलाफ प्रभावी बनाने पर काम कर रहे हैं।

कारगर वैक्सीन के बाद ही की जा सकती है हर्ड इम्युनिटी की उम्मीद

विशेषज्ञों के अनुसार दोबारा संक्रमण के मामले सामने आने के बाद यह साबित हो गया है कि फिलहाल हर्ड इम्यूनिटी विकसित नहीं हो रही हैं, हालांकि यदि कोई कारगर वैक्सीन तैयार हो तो अभी भी हर्ड इम्युनिटी विकसित होने की उम्मीद की जा सकती है।

विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

दोबारा से कोरोना वायरस की चपेट में आए लोगों में भले ही गंभीर लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं, लेकिन जांच में वायरस का दूसरा स्ट्रेन मिलने को लेकर इस पर अध्ययन जारी है। विशेषज्ञों ने फिलहाल लोगों को सावधान रहने की चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया में दोबारा से संक्रमण के अभी कुछ ही मामले सामने आए हैं। ऐसे में इसके और गंभीर होने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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