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कोरोना ने पाताल में पहुंचाई देश की इकॉनमी, दोबारा जान फूंकने को ये प्लान बनाए पीएम मोदी

नई दिल्ली :  कोरोना (Coronavirus crisis) के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा असर हुआ है। IMF ने कहा कि इस साल भारत की जीडीपी (India GDP) में 4.5 फीसदी की भारी गिरावट आ सकती है। ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat bhiyan)पर फोकस कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर भारत चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करेगा और वहां से आयात (Chinese imports) पर निर्भर नहीं होगा तो इसके डबल फायदे होंगे।

भारत हमेशा से ट्रेड डेफिसिट (Trade deficit with china) में रहा है। पहले वह चीन से आयात करता है, फिर वैल्यू एडिशन के साथ वह उसे निर्यात करता है। अगर दोनों मामलों में भारत आत्मनिर्भर हो जाता है तो रोजगार के दो गुने मौके होंगे और भारत का व्यापार घाटा कम होगा। आने वाले दिनों में भारत चीन की तरह मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा और इकॉनमी की ट्रेन बुलेट ट्रेन की तरह चलने लगेगी। हालांकि ऐसी बातें करना आसान है। अगर पिछले अनुभवों पर नजर दौड़ाएं तो आत्मनिर्भर भारत के सपने को सच करना इतना आसान नहीं है।

सप्लाई चेन पर हुआ था काफी असर
कोरोना संकट के शुरुआती चरण में जब चीन से कच्चे माल की आपूर्ति में कमी आने लगी तो इसका असर भारतीय कंपनियों और फैक्ट्रियों पर साफ दिखने लगा। लॉकडाउन के कारण लाखों लोगों की नौकरी चली गई । ऐसे में इन लोगों को वापस नौकरी देने का एकमात्र जरिया है भारत मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करे और चीन से होने वाले आयात पर निर्भरता कम करे।

चीन के बाद सबसे ज्यादा PPE किट बनाता है भारत
भारत में पहले एक भी पीपीई किट का निर्माण नहीं होता था। कोरोना संकट के बाद उसने चीन से इसका आयात शुरू किया, लेकिन घटिया क्वॉलिटी के कारण सवाल उठने लगे और भारतीय कंपनियों ने देश में पीपीई किट का निर्माण शुरू किया। केवल दो महीने में भारत चीन के बाद सबसे बड़ा पीपीई किट उत्पादक बन गया। इस तरह की खबरों से पीएम मोदी का हौसला मजबूत होता है और वे लगातार वोकल फॉर लोकल की बात करते हैं।

#BoycottChina चरम पर
गलवान घाटी की घटना के बाद चीन के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़क गया और #BoycottChina का नारा बुलंद होने लगा। हर फील्ड से इसकी आवाज आने लगी। सरकार की तरफ से इसका खुलेआम समर्थन किया गया। सरकार के आदेश के बाद इंडस्ट्री के लोगों ने 3000 ऐसे गैर-जरूरी उत्पादों की लिस्ट तैयार की है, जिसे अगर चीन से ना खरीदा जाए तो फिलहाल भारत को कोई नुकसान नहीं होगा। इंडस्ट्री ने फैसला किया कि खिलौना, घड़ी, प्लास्टिक प्रॉडक्ट्स अब लोकल मैन्युफैक्चर किए जाएंगे।

सच्चे मायने में आत्मनिर्भर भारत की जरूरत
आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर इकनॉमिक नैशनलिज्म लंबे समय के लिए चलता है और भारत अपनी जरूरत का सामान देश के भीतर ही बनाता है तो इससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। जब सभी वर्ग के लोगों के हाथों में पैसा आएगा तो वे खर्च करेंगे और देश की इकॉनमी चल पड़ेगी।

मेक इन इंडिया कुछ खास सफल नहीं
प्रधानमंत्री मोदी का मेक इन इंडिया प्रोग्राम भी कुछ इसी तर्ज पर था। इसकी मदद से वे भारत की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का शेयर बढ़ाना चाहते थे। 2014 में भारत की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का शेयर 15 फीसदी था, जिसे वे 2020 तक 25 फीसदी पर ले जाना चाहते थे। इस प्रोग्राम को सफलता मिली, लेकिन जितनी सफलता की जरूरत थी, उसमें काफी पीछे रह गए।

वोकल फॉर लोकल पर जोर
आत्मनिर्भर भारत प्रोग्राम इस मायने में अलग है क्योंकि सरकार वोकल फॉर लोकल पर काम कर रही है। हर सेक्टर में भारतीय कंपनियों को प्रोमोट किया जा रहा है। उन्हें विशेष सुविधा दी जा रही है। इसलिए 200 करोड़ तक के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट में अब विदेशी कंपनियां शामिल नहीं हो सकती हैं। MSMEs के लिए 3 लाख करोड़ तक के लोन की घोषणा की गई है जिसकी गारंटी खुद सरकार दे रही है।

विदेशी निवेशकों की कई हैं समस्याएं
आर्थिक जानकारों का कहना है कि ये अच्छी बात है कि सरकार आत्मनिर्भर भारत के साथ-साथ विदेशी निवेशकों को भी लुभाने की दिशा में भी काम कर रही है। भारत चीन-अमेरिका ट्रेड वार का फायदा उठाना चाहता है। कोरोना के कारण पूरी दुनिया की कंपनियां सप्लाई-चेन में चीन के विकल्प की तलाश में हैं और भारत इसलिए अहम है, क्योंकि यह बहुत बड़ा बाजार है। हालांकि समस्या यहां की नीतियों में है। विदेशी निवेशकों का कहना है कि भारत में श्रम कामून, भूमि अधिग्रहण, एनजीटी और अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग विभागों से मंजूरी की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि वे भारत में निवेश से कतराते हैं। इकॉनमी के जानकारों का कहना है कि सरकार को इस दिशा में गंभीरता से काम करने की जरूरत है। इन्वेस्टर्स को तभी आकर्षित किया जा सकता है, जब उनके लिए शानदार इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार हो।

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