Sunday , November 29 2020
Breaking News
Home / उत्तर प्रदेश / कोरोना वैक्‍सीन पर चेताए एक्‍सपर्ट्स, ऐसे टीके भारत में हो जाएंगे फेल !

कोरोना वैक्‍सीन पर चेताए एक्‍सपर्ट्स, ऐसे टीके भारत में हो जाएंगे फेल !

कोरोना वायरस वैक्‍सीन डिस्‍ट्रीब्‍यूशन का ब्‍लूप्रिंट तय हो चुका है। सरकारें कोल्‍ड चेन इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर और वैक्‍सीन नेटवर्क को स्‍ट्रीमलाइन करने में जुटी हैं। इस बीच, विशेषज्ञ ये चिंता जाहिर कर रहे हैं कि कई कोरोना वैक्‍सीन को बेहद कम तापमान पर स्‍टोरेज की जरूरत होगी। कुछ के लिए तो माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तापमान चाहिए। ऐसे में कितनी कोल्‍ड चेन फैसिलिटीज वैक्‍सीन के लिए तैयार हो पाएंगी, इसे लेकर एक्‍सपर्ट्स चिंतित हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के पूर्व महानिदेशक डॉ एनके गांगुली के अनुसार, कोविड-19 के लिए जो वैक्‍सीन डिवेलप की जा रहीं हैं, उन्हें सुपर-कोल्‍ड स्‍टोरेज की जरूरत है और इसके चलते भारत के आधुनिकतम शहरों में भी वैक्‍सीन स्‍टोर और ट्रांसपोर्ट करने में दिक्‍कत आ सकती है।

वैक्‍सीन को लेकर एक्‍सपर्ट्स की सबसे बड़ी चिंता यही

-70 से -80 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले मेडिकल फ्रीजर्स तो अमेरिकन और यूरोपियन अस्‍पतालों में भी आसानी से नहीं मिलते। अभी जो वैक्‍सीन फ्रंटरनर्स है, उनमें से अधिकतर को बेहद ठंडे माहौल में रखने की जरूरत पड़ती है, भारत में उनकी तैनाती बेहद चुनौतीपूर्ण होगी।
डॉ एनके गांगुली, पूर्व डीजी ICMR

बहुत कम टेम्‍प्रेचर पर रखी जाती है फाइजर, मॉडर्ना की वैक्‍सीन

ये चिंताएं फाइजर की उस घोषणा के बाद बढ़ी हैं, जिसमें उसने अपनी वैक्‍सीन के 90% असरदार होने का दावा किया है। इस वैक्‍सीन को स्‍टोर करने के लिए -70C तापमान चाहिए। मॉडर्ना की वैक्‍सीन को भी -20 डिग्री या उससे कम टेम्‍प्रेचर पर स्‍टोर करना पड़ रहा है। एक्‍सपर्ट्स ने कहा कि ऐसी वैक्‍सीन विकासशील देशों के लिए मुफीद साबित नहीं होंगी। गांगुली ने कहा कि ये टीके भारत के लिए ‘लाजिस्टिकल नाइटमेयर’ साबित हो सकते हैं। क्‍योंकि भारत में लू काफी चलती है, बिजली खूब कटती है और ग्रामीण इलाके बहुत ज्‍यादा हैं।

भारत के पास नहीं हैं अल्‍ट्रा-लो स्‍टोरेज फ्रीजर्स

ICMR में एपिडेमियोलॉजी ऐंड कम्‍युनिकेबल डिजीजेज के पूर्व हेड रहे डॉ ललित कांत ने काह कि भारत में कुछ वैक्‍सीन ठीक साबित नहीं होंगी। उन्‍होंने कहा, “फाइजर और मॉडर्ना, दोनों की ही वैक्‍सीन mRNA (मेसेंजर RNA) वैक्‍सीन हैं जिन्‍हें अल्‍ट्रा-लो स्‍टोरेज टेम्‍प्रेचर की जरूरत पड़ती है। हमारे देश में ऐसे फ्रीजर्स नहीं हैं। फाइजर ने कहा है कि वह वैक्‍सीन के साथ एक आइस कंटेनर देगी जो 10 दिन तक -70 डिग्री तापमान बनाए रखेगा। लेकिन इसके बावजूद भारत में लॉजिस्टिकली यह संभव नहीं है।”

देसी वैक्‍सीन की स्‍टोरेज का है पूरा इंतजाम

डॉ कांत के मुताबिक, कई वैक्‍सीन ऐसी बन रहीं हैं जिन्‍हें -2 से -8 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच रखा जा सकता है। हेल्‍थ ऑफिशियल्‍स के अनुसार, वैक्‍सीन कोल्‍ड स्‍टोरेज का जो वर्तमान नेटवर्क है, वह भारत में टेस्‍ट हो रहीं तीनों वैक्‍सीन (भारत बायोटेक, सीरम इंस्टिट्यूट, जायडस कैडिला) की जरूरतों को पूरा करता है। केंद्र सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, 16 हजार से ज्‍यादा कोल्‍ड चेन स्‍टोरेज की जरूरत पड़ेगी।

टीके लगाने में सबसे आगे हैं अपना भारत

कोविड-19 वैक्‍सीन को डिस्‍पैच के छह महीनों के भीतर देश की 18% फीसदी आबादी तक पहुंचाना है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय जुलाई 2021 तक 25-30 करोड़ लोगों को टीका लगाने की योजना बना चुका है। टीकाकरण में भारत सबसे आगे है और हर साल 40 करोड़ टीके बांटने की क्षमता रखता है। देश में चल रहे यूनिवर्सिल इम्‍युनाइजेशन प्रोग्राम से 27,000 कोल्‍ड चेन पॉइंट्स जुड़े हुए हैं।

loading...
loading...

Check Also

जब पीने से सेहत होती है खराब, तो सैनिकों को क्यों मिलती है शराब ?

सेना के जवानों का जीवन अत्‍यंत कठिन और अनुशासनपूर्ण होता है। देश की रक्षा के ...