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चटनी में जहर दिया, घर में छोड़ा कोबरा.. कौन कर रहा ISRO साइंटिस्ट को मारने की कोशिश ?

नई दिल्ली
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सीनियर वैज्ञानिक ने सनसनीखेज दावा किया है। तपन मिश्रा ने खुद को मारने की कोशिश के आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्हें खाने में जहर देकर मारने की कोशिश की गई थी। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि जान का दुश्मन कौन है, इस बारे में कोई आइडिया नहीं है।

अहमदाबाद स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के पूर्व निदेशक तपन मिश्रा ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि 3 साल पहले बेंगलुरु में इसरो के हेडक्वार्टर में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी जान लेने की कोशिश की गई थी। 23 मई 2017 को खाने के दौरान डोसे की चटनी में आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड मिलाया गया था। इसकी वजह से पूरे शरीर में ब्लड क्लॉटिंग के बाद हार्ट अटैक से मौत हो जाती है।

‘2019 और 2020 में भी मारने की कोशिश’
सीनियर साइंटिस्ट के मुताबिक, ‘दूसरा हमला चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के दो दिन पहले हुआ। 12 जुलाई 2019 को हाइड्रोजन साइनाइड से मारने की कोशिश हुई। हालांकि, NSG अफसर की सजगता से जान बच गई। मेरे हाईसिक्योरिटी वाले घर में सुरंग बनाकर जहरीले सांप छोड़े। तीसरी बार सितंबर 2020 में आर्सेनिक देकर मारने की कोशिश हुई। इसके बाद मुझे सांस की गंभीर बीमारी, फुंसियां, चमड़ी निकलना, न्यूरोलॉजिकल और फंगल इंफेक्शन समस्याएं होने लगीं।’

‘एम्स दिल्ली के डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा कि उनके करियर में आर्सेसिनेशन ग्रेड मॉलिक्यूलर ‘एएस203’ से बचने का यह पहला मामला है। जून 2017 में ही एक डायरेक्टर साथी और गृह मंत्रालय के अधिकारी ने जहर दिए जाने को लेकर आगाह किया था।’

‘हमलों का मकसद क्या’ डॉ. मिश्रा कहते हैं कि ऐसे हमलों का उद्देश्य सैन्य और कमर्शियल महत्व के सिंथेटिक अपर्चर रडार बनाने वाले वैज्ञानिकों को निशाना बनाना या रास्ते से हटाना होता है। मैंने अपनी पीड़ा सीनियर्स से कही। पूर्व चेयरमैन किरण कुमार ने सुना, लेकिन डॉ. कस्तूरीरंगन और माधवन नायर ने नहीं। इसके बाद भी हत्या की कोशिशें जारी रहीं।

अहमदाबाद स्थित इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (सेक) में 3 मई 2018 को धमाका हुआ था, जिसमें मैं बच गया। धमाके में 100 करोड़ रुपए की लैब नष्ट हो गई। जुलाई 2019 में एक भारतीय-अमेरिकी प्रोफेसर मेरे ऑफिस आए। मुंह न खोलने के एवज में मेरे बेटे को अमेरिकी इंस्टीट्यूट में दाखिले का ऑफर दिया। मैंने इनकार किया तो मुझे सेक डायरेक्टर के पद से हाथ धोना पड़ा।

इसी जनवरी महीने में रिटायर होने जा रहे तपन ने बताया कि उन्हें त्वचा संबंधी समस्याएं, फंगल इन्फेक्शन, दिल का दौरा, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, हड्डियों में सेंसेशन होता रहा। उन्होंने विक्रम साराभाई से लेकर अन्य कई वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौत का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पहले कोई घटना हो जाए, लोगों को पता चलना चाहिए कि मेरे साथ क्या हुआ।

तपन ने स्पष्ट रूप से किसी के बारे में नहीं कहा लेकिन इतना बताया कि कुछ बाहरी ताकतें नहीं चाहतीं कि इसरो के वैज्ञानिक आगे बढ़ें और कम लागत में सारे सिस्टम तैयार करें। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय जासूसी हमला करार देते हुए कहा कि कमर्शल और सैन्य महत्व के उपकरण बनाने वाले वैज्ञानिकों को रास्ते से हटाने के लिए निशाना बनाया जा रहा है।

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