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यूपी पंचायत चुनाव : कब होगा मतदान, कैसे होगा आरक्षण, क्या तैयारी की है सरकार?

लखनऊ: उत्तरप्रदेश में पंचायत चुनाव 2021 को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. फाइनल वोटर लिस्ट 22 तारीख को जारी कर दी जाएगी. इसके साथ ही इंतजार आरक्षण सूची का भी किया जा रहा है. जिसमें पारदर्शिता लाने के लिए इस बार आरक्षण मैनुअल के बजाए विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए तय हो रहा है. पंचायत चुनाव में आरक्षण की स्थिति क्या रहेगी? यह सवाल सभी की जुबान पर है. ब्लॉक से लेकर जिले तक का चक्कर लगाने के बावजूद अपनी ग्राम पंचायत में आरक्षण की स्थिति को लेकर किसी को संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है. सबकुछ शासन की मंशा पर निर्भर है.

इसके लिए पंचायत चुनाव-2020 नाम से सॉफ्टवेयर अपलोड किया गया है. इसके लिए वर्ष 1995-2015 के बीच सभी ग्राम पंचायतों की आबादी समेत आरक्षण के ब्यौरे अपलोड कराए गए. पिछले कई दिनों से डीपीआरओ कार्यालय में इसकी फीडिंग चल रही थी, जो अब पूरी हो गई है. अधिकारियों का कहना है चुनावी प्रक्रिया शुरू होते ही शासन के फैसले के मुताबिक सॉफ्टवेयर के जरिए आरक्षण तय कर दिया जाएगा हालांकि स्थानीय जरूरतों को देखते हुए दो प्रतिशत सीटों में बदलाव का अधिकार स्थानीय अफसरों को भी दिया गया है.

विवाद से सीख, पारदर्शी होगा आरक्षण
माना जा रहा है कि इस बार आरक्षण को लेकर पूरी तरह से पारदर्शी व्यवस्था होने वाली है. इसी के तहत शासन ने पिछले पांच चुनावों का विवरण मंगाया है. अमूमन जिस वर्ग के लिए सीट आरक्षित हुई उसके अगले चुनाव में उसे छोड़, दूसरे वर्ग को वह सीट मिलनी चाहिए लेकिन, कई बार राजनीतिक एवं स्थानीय दबाव में एक वर्ग को ही सीटें आरक्षित हो जाती हैं. इस वजह से चुनाव के बाद तक विवाद बना रहता है. पिछले चुनावों में हुए विवादों से सीख लेते हुए पंचायती राज महकमा अब पारदर्शी व्यवस्था तैयार करने की कवायद में जुटा है.

शासन से गाइडलाइन का इंतजार
जिलों में डेटा फीडिंग का काम पूरा होने के बाद शासन की ओर से गाइडलाइन तैयार कर उसी के अनुसार आरक्षण तय किया जाएगा. उसके बाद आरक्षण की स्थिति साफ हो जाएगी. पिछले पांच चुनावों में ग्राम पंचायतों की आरक्षण की स्थिति के लिए फीडिंग की जा रही है. उसके बाद शासन से गाइडलाइन आने की उम्मीद है.

अलग-अलग मतपत्र मिलेंगे
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिये तीन प्रकार के अलग-अलग मतपत्र मिलेंगे. जिसमें ग्राम प्रधान पद के लिये अलग, वार्ड सदस्य के लिये अलग, जिला पंचायत सदस्य पद के लिये अलग मतपत्र मिलेगा. तीनों मतपत्रों के अलग-अलग रंग होंगे, जिन पर मतदान करने के बाद मतदाता मतपेटिका में मतपत्र डालेंगे. गौरतलब है कि इस बार ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव एक साथ कराए जाएंगे.

ये लोग लड़ सकते हैं पंचायत चुनाव
पंचायत चुनाव को लेकर ऐसी चर्चा थी कि इसमें उम्मीदवारों की क्वॉलिफिकेशन भी जरूरी होगी. पहले ऐसी खबरें थीं कि चुनाव लड़ने वालों के लिए दो बच्चों और न्यूनतम शैक्षिक योग्यता अनिवार्य करने को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि चुनाव पहले जैसे होते थे वैसे ही होंगे. इसमें किसी तरह का कोई बदलाव नहीं होगा. प्रधानी के किसी तरह शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं होगी.

कब होंगे चुनाव?
पिछले दिनों पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र सिंह कह चुके हैं कि 15 फरवरी को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी. जिसके बाद मार्च के अंत या फिर अप्रैल के पहले सप्ताह में ग्राम पंचायत के चुनाव पूरे हो सकते हैं.

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