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गंगाजल हुआ ‘दूषित’ तो संत हो गए ‘लाल’, बोले- करो सफाई नहीं तो करेंगे आंदोलन

हिंदू धर्म में गंगा नदी को मां का दर्जा दिया गया है. हिंदू धर्म में जन्म के वक्त नामकरण हो या मृत्यु के वक्त अंतिम संस्कार, गंगाजल की आवश्यकता पड़ती है. मां गंगा को नदियों में सबसे पवित्र और पूज्यनीय माना जाता है और यही वजह है कि गंगा नदीं में स्नान करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. मान्यता है कि गंगा नदी में स्नान करने से न सिर्फ इंसान के सारे कष्ट मिटते हैं, बल्कि उसके सारे पाप भी धुल जाते हैं. देश में 40 करोड़ से ज्यादा लोगों गंगा नदी का ही पानी पीते है.

लेकिन इन दिनों लोगों को मोक्ष दिलाने वाली गंगा का पानी प्रदूषण के कारण काला पड़ रहा है. गंगा में प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह गंगा किनारें रहने वाले लोगों का गंगा में नहाना, कपड़े धोना, सार्वजनिक शौच की तरह उसका इस्तेमाल करना है. इसके अलावा अनगिनत टैनरीज, कपनियों से निकलने वाले रसायन, बूचड़खानों और अस्पतालों का कचरा गंगा के प्रदूषण के स्तर को और बढ़ा रहा है. जिससे गंगा का पानी नाले के पानी से भी ज्यादा गंदा हो गया है. तो वहीं एक सर्वें में पाया गया कि गंगा में 2 करोड़ 90 लाख लीटर प्रदूषित कचरा प्रतिदिन फेंका जा रहा है. विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश की 12 प्रतिशत बीमारियों की वजह प्रदूषित गंगा का पानी ही है.

तो इसी बीच गंगा के पानी को लेकर संतों में नाराजगी देखने को मिल रही है. दरअसल, प्रयागराज माघ मेला 2021 के दौरान गंगाजल में प्रदूषण निरंतर बढ़ रहा है. जिसके कारण दारागंज घाट व रामघाट पर गंगाजल का रंग काला हो गया है. जिसको लेकर संत… मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गंगा की सफाई को लेकर जल्द कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं. संतों को कहना है कि, इसको लेकर अगर जल्दी कदम नहीं उठाया गया तो वह इसकों लेकर आंदोलन करेंगे.

मामले को लेकर स्वामी अधोक्षजानंद कहते हैं कि प्रदेश की सत्ता पर महात्मा आसीन हैं. हमे प्रदेश के मुख्यमंत्री से काफी आशा है. उत्‍तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने माघ मेला के दौरान गंगा में निर्मल जल उपलब्ध कराने का वादा किया था. ऐसे में गंगा जल का प्रदूषित होना चिंता का विषय है. उन्‍होंने कहा कि हमे उम्मीद है कि सरकार इसको लेकर जल्द ही कार्रवाई करेगी.

वहीं महामंडलेश्वर कपिलदेव नागा ने गंगा में बढ़ते प्रदूषण को सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, गंगा में प्रदूषण बढ़ना साबित करता है कि सरकार माघ मेला को लेकर गंभीर नहीं है. संत व श्रद्धालु गंगा के प्रदूषित पानी में स्नान करने को मजबूर हो रहे है. लेकिन सत्ता पर बैठे लोगों को कोई पीड़ा नहीं हो रही है. उन्‍होंने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा था संत जल्द ही आंदोलन करेंगे. अब देखने ये होंगा कि सरकार कब गंगा की सफाई पर एक्शन लेती है और संतो का गुस्सा शांत होता है.

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