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गलवान से लौटे ताबूतों की गिनती अब न छुपा सकेगा चीन, सच सामने लेकर आएंगे सारे परिवार !

लद्दाख के गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुए खुनी हिंसक झड़प के दौरान मारे गए चीनी सैनिकों की जानकारी को लेकर अभी तक चीनी सरकार ने चुप्पी साधी हुई है। वहीं ग्लोबल टाइम्स के रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार (24 जून, 2020) को चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने झड़प में मारे गए सैनिकों के परिजनों से बातचीत कर उन्हें सांत्वना देने की कोशिश की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के मुखपत्र द ग्लोबल टाइम्स के संपादक हू जिन (Hu Xijn) ने दी है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि, “सेना में सर्वोच्च सम्मान के साथ मृतकों के साथ व्यवहार किया गया है और यह जानकारी आखिर सही समय पर समाज को दी जाएगी, ताकि नायकों को सम्मानित किया जा सके और उन्हें याद किया जा सके।” साफ है कि इसकी आड़ में कहीं न कहीं आँकड़े छिपाने और चीन की जनता को शांत करने की कोशिश की गई।

खबरों के अनुसार, लद्दाख में भारत-चीन की झड़प में मारे गए चीनी सैनिकों के परिजनों का दो दिन पहले एक वीडियो सामने आया था। उस वीडियो में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में तैनात जवानों की मृत्यु को लेकर परिवारवाले काफी आक्रोशित नजर आए थे। क्योंकि देश के लिए शहीद होने के बावजूद जवानों को सरकार की तरफ से कोई सम्मान या श्रद्धांजली अर्पण नहीं की गई थी। संपादक ने वायरल वीडियो के बाद अपने लेख में इस बात का जिक्र किया था। यह सब संभवतः इसलिए हुआ क्योंकि एक तरफ जहाँ भारत ने न सिर्फ अपने बलिदानी सैनिकों के बारे में बताया बल्कि उन्हें मरणोपरांत उचित गौरव और सम्मान भी दिया वहीं चीन अब भी आँकड़े छिपाता हुआ झूठ बोल रहा है।

हालाँकि, अपने देश के सैनिकों की संख्या को कम बताते हुए ग्लोबल टाइम्स ने स्वीकार किया है कि लद्दाख में हिंसक झड़प में 20 से कम चीनी सैनिक मारे गए हैं। मगर शी जिनपिंग सरकार ने आधिकारिक रूप से नहीं स्वीकारा की इस झड़प में उसके कितने सैनिको को क्षति पहुँची है।

रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल टाइम्स के संपादक हू ने अपने लेख के माध्यम से बताया कि पीएलए अधिकारियों और सैनिकों को श्रद्धांजली दी गई है। हमारे सैनिकों की वजह से ही चीन सुरक्षित है। देश की शांति पूरी तरह से उनके जवानों पर निर्भर करती है। अपने बारे में बताते हुए उन्होंने लिखा पूर्व सैनिक और वर्तमान में मीडियाकर्मी के तौर पर मैं समझता हूँ कि यह दोनों देशों में, विशेष रूप से भारत में, जनता की राय को उत्तेजित नहीं करने के उद्देश्य से एक आवश्यक कदम है। यह बीजिंग की सद्भावना है। इसीलिए चीन ने शायद चीनी सेना ने मृतकों की संख्या नहीं जाहिर की है।

वहीं भारतीय मीडिया के दावे को झूठ बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारे 40 चीनी सैनिक नहीं मारे गए है। और न ही भारत हमे हमारे 16 चीनी सैनिकों के शव को सौंपा हैं। साथ ही इन सभी बातों को दरकिनार कर ग्लोबल टाइम्स के संपादक ने बताया कि भारतीय मीडिया सिर्फ ‘बिना चुनौती वाली अफवाहें’ फैला रहीं है।

गौरतलब है, संपादक हू ने अपने लेख में हिंसक झड़प को लेकर अपनी भड़ास को भी बाहर निकाला। उन्होंने लिखा कि भारत को पीएलए सैनिकों ने बड़ा सबक सिखाया है, जिसने हमेशा चीनी लोगों के दृढ़ संकल्प पर अपनी गलत राय बनाई है। पीएलए ने जरूरत के अनुसार अपने शौर्य और दृढ़ संकल्प के साथ भारत के खिलाफ ठोस कदम उठाया है। जो कि भारतीय पक्ष, विशेष रूप से उनके अग्रिम पंक्ति के सैनिकों के लिए एक मजबूत निवारक है। पीएलए की वजह से ही स्थिति को काबू में किया गया हैं। सहीं वक्त पर हमारे जवानों ने अपनी क्षमता दिखाई है।

इतने पर ही ग्लोबल टाइम्स के संपादक ने अपनी बात को खत्म नहीं किया। उन्होंने भारत को धमकी देते हुए आगह किया की पीएलए के साथ खिलवाड़ मत करो। जो भी लोग अंतरराष्ट्रीय स्थिति में बदलाव लाकर उसका लाभ उठाना चाहते उनके लिए यह चीन के तरफ से एक कड़ी चुनौती है। हमारे सीमा में घुसपैठियों के लिए पुख्ता इंतजाम किया गया है। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात हमारे जवानों का उद्देश्य अधिक संघर्षों की घटना से बचना है।

उल्लेखनीय हैं कि एलएसी के निकट चीन सैनिकों को जमावड़े को लेकर भारत भी अब चौकन्ना हो गया है। वह फिर कोई भूल नहीं करना चाहता। यही कारण है कि भारतीय सेना भी चीनियों का मुँहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई है। आपको बता दें कि इससे पहले ही सरकार सेना को खुली छूट दे चुकी है।

चीनी सैनिकों के मौत के आँकड़ो पर बीजिंग ने तो चुप्पी बनाई रखी है, लेकिन भारत सरकार ने कहा कि चीनी पक्ष ने करीब 43-45 पीएलए सैनिक या तो गंभीर रूप से घायल हुए या मारे गए। अब, यूएस की एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम 35 चीनी सैनिक गलवान घाटी में मारे गए हैं।

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