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गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई ने दो इंजीनियर समेत छह के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

राजधानी लखनऊ में गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की जांच कर रही CBI ने 3 साल बाद बुधवार को छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। इसमें सिंचाई विभाग के दो इंजीनियर समेत 6 को आरोपी बनाया गया है। तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रूप सिंह यादव और जूनियर असिस्टेंट राजकुमार यादव को पूरे घोटाले का कर्ताधर्ता CBI ने पाया है। चार्जशीट में केके स्पन कंपनी और उसके 2 डायरेक्टर हिमांशु गुप्ता और कविश गुप्ता के नाम भी चार्जशीट में हैं। रिवर फ्रंट के सलाहकार रहे बद्री श्रेष्ठ को भी CBI ने अभियुक्त बनाया है। यह सपा सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट था।

रिवर फ्रंट के कामों में पाई गई अनियमितता
चार्जशीट में CBI ने कहा है कि 1500 करोड़ रुपए के रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट के अधिकारियों के द्वारा जमकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया। जानबूझकर प्रोजेक्ट कार्य में लगने वाली लागत के रुपए बढ़ाए और मनमाने तरीके से टेंडर दिए गए। इस पूरे मामले में मुख्य अभियंता के द्वारा मनमाने तरीके से अपने लोगों को लाभ पहुंचाए जाने का आरोप लगाया गया है। यह भी आरोप सही पाए गए कि मुख्य अभियंता के द्वारा एक आयोग निजी फर्म ट्रंक ड्रेन को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर की तिथियां दो-दो बार बढ़ा दी गई। CBI की टीम ने तीन महीने पहले इस मामले में एक गिरफ्तारी भी की थी। पूर्व मुख्य इंजीनियर रूप सिंह यादव और क्लर्क कुमार यादव गिरफ्तार किए गए जा चुके हैं।

2017 में दर्ज हुआ था मामला
गोमती रिवर फ्रंट के लिए सपा सरकार ने 1,513 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। जिसमें से 1,437 करोड़ रुपए जारी होने के बाद भी मात्र 60 फीसदी काम ही हुआ है। 95 फीसदी बजट जारी होने के बाद भी 40 फीसदी काम अधूरा ही रहा। आरोप है कि डिफाल्टर कंपनी को ठेका देने के लिए टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया था। पूरे प्रोजेक्ट में करीब 800 टेंडर निकाले गए थे, जिसका अधिकार चीफ इंजीनियर को दे दिया गया था।

सत्ता में योगी सरकार के आने पर शुरू हुई थी जांच
योगी सरकार ने घोटाले की जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस आलोक सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। कमेटी की रिपोर्ट पर ही इस प्रकरण में एक्शन शुरू हुआ था। दिसंबर 2017 में रिवर फ्रंट घोटाले में CBI ने FIR दर्ज की थी। यह FIR एक्सईएन रूप सिंह यादव, सुरेंद्र सिंह यादव, मुख्य अभियंता काजिम अली, शिव मंगल यादव, अधीक्षण अभियंता कमलेश्वर सिंह और तत्कालीन मुख्य अभियंता गुलेस चंद समेत 8 लोगों के खिलाफ हुई थी। CBI ने जिन 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है, उनमें से 7 लोग विभाग से रिटायर्ड हो चुके हैं। इन सभी लोगों के खिलाफ अधिशाषी अभिवित्तीय अनियमितता और कथित भ्रष्टाचार के धाराओं में केस दर्ज हुआ था। गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट में घोटाले की जांच CBI से करवाने की सिफारिश योगी सरकार ने 2017 जुलाई में की थी। सिफारिश में न्यायिक जांच समिति की रिपोर्ट, गोमतीनगर थाने में दर्ज FIR की कॉपी और दूसरे दस्तावेज भी प्रारूप के साथ भेजे गए थे।

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