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ग्रामीणों को पहली बार मिला उनके मकान का मालिकाना हक, जानिये क्या है घरौनी और बनती है कैसे ?

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को एक बड़े सुधार कार्यक्रम स्वामित्व योजना का शुभारंभ किया। पायलट फेज के तहत उन्होंने छह राज्यों के 763 गांव में घरौनी (सम्पत्ति प्रमाण पत्र) वितरण का शुभारंभ किया। उन्होंने स्वमित्व योजना के तहत कई गांवों के लोगों को घरौनी का डिजिटल वितरण भी किया। इस मौके पर वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश के 37 जिलों के 350 गांवों के चयनित लोगों को घरौनी का डिजिटल वितरण किया। इसमें अकेले 22 जिले पूर्वी उत्तर प्रदेश के रहे। वाराणसी के भी 9 गांवों के 591 लोगों को उनके घरों की घरौनी यानि स्वामित्व कार्ड वितरित किया गया। इस दौरान जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि अभी स्वामित्व योजना जिले के नौ राजस्व गांवों में ही लागू थी, लेकिन आज से यह जिले के सभी 760 गांवों में लागू हो गई है। अगले छह महीने के भीतर सभी लोगों को घरौनी कार्ड मिल जाएगा। वाराणसी कमिश्नरी सभागार में जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने राजस्व एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के साथ वेबलिंक पर कार्यक्रम को देखा।

इन जिलों के ग्रामीणों को मिलेगा स्वामित्व प्रमाण पत्र

गोरखपुर, वाराणसी, फतेहपुर, गोंडा, गाजीपुर, देवरिया, चंदौली, चित्रकूट, बहराइच, बस्ती, बाराबंकी, बांदा, बलरामपुर, बलिया, आजमगढ़, अयोध्या, अमेठी, अंबेडकरनगर, मऊ, हमीरपुर, जालौन, जौनपुर, झांसी, कौशांबी, कुशीनगर, ललितपुर, महाराजगंज, महोबा, मीरजापुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, संत रविदासनगर, संत कबीर नगर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र और सुलतानपुर।

खेतों के लिये खतौनी, घरों के लिये घरौनी

जिस तरह खेतों की पहचान के लिये खतौनी होती है, ठीक उसी तरह ग्रामीण इलाकों में मकानों की तस्दीक के लिये घरौनी होगी, जो मकान का मालिकाना हक का दस्तावेज होगी। अब तक आबादी क्षेत्र में बने मकानों के मालिकाना हक का कोई अभिलेख नहीं होता था। यही वजह है कि आए दिन संपत्तियों पर अतिक्रमण के कारण गांवों में विवाद होते हैं। गांवों में आबादी क्षेत्र की संपत्तियों का सीमांकन करके ग्रामीणों को उनके मकानों का स्वामित्व मुहैया कराने के लिये अप्रैल में प्रधानमंत्री ने स्वामित्व योजना का शुभारंभ किया था। योजना के तहत ड्रोन टेक्नोलाजी के माध्यम से आबादी क्षेत्र की एरियल फोटोग्राफी कराई जा रही है। आबादी क्षेत्र में आने वाली सम्पत्तियों का सीमांकन इसी के आधार पर ग्रामीणों को उनके मकान का स्वामित्व (घरौनी) मुहैया कराई जा रही है।

मकान का मिलेगा मालिकाना हक

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गांवों में आए दिन सम्पत्ति को लेकर होने वाली फौजदारी में कमी आएगी। विवद और सम्पत्ति के झगड़े कम होंगे। ग्रामीणों को अपने घरों का मालिकाना हक मिल जाने के बाद वह उसपर आसानी से लोन भी ले सकते हैं। यूपी में 1,08,937 राजस्व गांवों में स्वामित्व योजना के तहत आबादी का सर्वेक्षा किया जाना है। करीब 82 हजार गांवों में आबादी क्षेत्र के सर्वेक्षण के लिये राज्य सरकार की ओर से अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। 54 हजार गांवों का सर्वेक्षण इसी वित्तीय वर्ष में कर लिये जाने का लक्ष्य रख गया है। अभी जिन 37 जिलों के 350 गांवों को स्वामित्व प्रदान किया गया है। वहां आबादी में सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया गया है।

हर मकान का होगा यूनीक आईडी नंबर

स्वामित्व योजना के तहत अब गांव के हर घर का एक यूनीक आईडी नंबर होगा। हर मकान मालिक को जो स्वामित्व प्रमाण पत्र मिलेगा उसमें मकान का 13 अंकों का यूआईडी नंबर होगा। पहले छह अंक कोड, जबकि अगले पांच अंक आबादी के प्लाट नंबर और आखिर के दो अंक संभावित विभाजन को दर्शाएंगे।

सर्वेक्षण कर तैयार हो रही सूची

स्वामित्व योजना के तहत गांवों में आबादी का सर्वेक्षण किया जा रहा है। सर्वेक्षण के लिये सबसे पहले गांव में चूने से मार्किंग कर सभी सम्पत्तियों को इस तरह अलग-अलग किया जा रहा है, जिससे वह ड्रोन से तस्वीर लेने पर अलग-अलग दिखें। ड्रोन फोटोग्राफी के जरिये मैप तैयार का उसमें दर्शाए गए मकानों आदि की नंबरिंग कर मकान के मालिकों का नाम लिखा जाएगा। अगर किसी घर में कई हिस्सेदार हैं तो उसमें सबके नाम अंकित किये जाएंगे। सार्वजनिक भूमि, नाला, खड़ंजा, रास्ता, मंदिर, मस्जिद आदि को भी अलग-अलग नंबर दिया जाएगा। आबादी क्षेत्र की सम्पत्तियां नौ श्रेणियों में बांटी जाएंगी।

सर्वेक्षण कर तैयार होगी सूची, 15 दिन में दर्ज करा सकेंगे आपत्ति

सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की गई सूची गांव में प्रकाशित की जाएगी। सूची पर आपत्ति दर्ज कराने के लिये प्रकाशन से 15 दिन का समय दिया जाएगा। आपत्तियों की सुनवायी एसडीएम (सहायक अभिलेख अधिकारी) करेंगे। सहमति न बनने पर न्ययालयके आदेश से मामला निस्तारित होगा।

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