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बिहार चुनाव: एग्जिट पोल्स के बावजूद ‘चमत्कार’ की आस लगाए हैं मोदी-नीतीश, जानिए कहां से?

पटना
बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Chunav 2020 Latets Updates) के सभी एग्जिट पोल ( Bihar Election Exit Polls 2020) जहां महागठबंधन को बढ़त दे रहे हैं वहीं, एनडीए खेमा अभी भी साइलेंट वोटर को लेकर उम्मीदें बांध रखा है। टुडेज चाणक्य एग्जिट पोल (Today’s Chanakya Exit Poll) बिहार में महागठबंधन की बंपर बहुमत के साथ सरकार बनाने की भविष्यवाणी कर चुका है। हालांकि, एनडीए खेमा महिला वोटरों को लेकर भी थोड़ा उत्साहित है। विधानसभा और लोकसभा के पिछले तीन चुनावों में राज्य में महिला वोटरों का प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा था और उसका सीधा फायदा नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) को मिला था।

एनडीए को यहां दिख रही करिश्मे की उम्मीद!
एग्जिट पोल के अनुमान भले ही एनडीए के पक्ष में जाता नहीं दिख रहा है लेकिन एनडीए खेमे में साइलेंट और महिला वोटरों को लेकर एक आशा की किरण दिख रही है। रविवार को हालांकि, एनडीए खेमा थोड़ा शांत था लेकिन बीजेपी और जेडीयू दोनों के नेताओं का मानना था कि साइलेंट वोटर बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम (Bihar Election Result 2020) में करिश्मा कर सकता है। बिहार बीजेपी चीफ संजय जायसवाल (Sanjay Jaiswal) ने ईटी को बताया, ‘बिहार में ऐसे बहुत सारे वोटर हैं जिनको पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की योजनाओं से सीधा लाभ हुआ है और ये साइलेंट वोटर हैं और एग्जिट पोल में ऐसे वोटरों की राय ले पाना मुश्किल होता है। हमें अंतिम परिणाम का इंतजार करना चाहिए। हम आराम से सरकार बना लेंगे।’

तीन मौकों पर एग्जिट पोल हुए हैं गलत!
अगर एग्जिट पोल की सटीकता की बात करें तो 2005, 2010 और 2015 के विधानसभा चुनाव में ये सही साबित नहीं हुए थे। 2005 में नीतीश कुमार के सत्ता में वापसी की किसी ने अनुमान नहीं लगाया था। वहीं 2010 विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल की भविष्यवाणी सही नहीं रही थी। 2015 के विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल्स में बीजेपी के गठबंधन की सरकार बनाने की उम्मीद जताई गई जबकि महागठबंधन को उसबार बंपर बहुमत मिला था।

जेडीयू को है नीतीश पर भरोसा
उधर, जेडीयू के नेता महिलाओं और ईबीसी वोटरों में नीतीश कुमार की लोकप्रियता को लेकर आश्वस्त दिख रहे हैं। जेडीयू के बिहार के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा, ‘2005 में किसी ने नहीं कहा था कि नीतीश कुमार वापसी करने वाले हैं। 2010 में त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी की गई थी। 2015 में एग्जिट पोल बीजेपी की सरकार बना रहे थे। इसलिए हमें एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं करने के कई कारण है।’

आरजेडी को जीत का पूरा विश्वास
आरजेडी के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा, ‘ओपिनियन पोल से लेकर एग्जिट पोल तक हमने लंबा रास्ता तय कर लिया है। इस दौरान लोगों ने तेजस्वी यादव (Tejahwi Yadav) में भरोसा जताया है। हमें जीत का पूरा भरोसा है।’

कांग्रेस बोली, बदलाव के लिए हुआ है वोट
एग्जिट पोल के नतीजों से गदगद कांग्रेस ने भी दावा किया है कि राज्य में महागठबंधन की सरकार बनेगी। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Surjewala) अनुसार, ‘बिहार ने बदलाव के लिए वोट किया है, रोजगार के लिए वोट किया है। जहां तक एग्जिट पोल की बात है तो चैनलों और न्यूज पेपर के लिए एक आंकड़ा है। जब चुनाव परिणाम आएंगे तो असली नतीजें सबके सामने होंगे। यूपीए को 150 से ज्यादा सीटें मिलेंगी। कांग्रेस को 40-55 सीटें मिलेंगी।’

महिला वोटर करेंगी बड़ा खेल!

2015 के विधानसभा चुनावों में महिलाओं ने सबसे ज्यादा 60.5% वोटिंग की थी और 53.3 फीसदी पुरुषों ने वोट डाले थे। इसका फायदा नीतीश को मिला था और उनकी सत्ता में वापसी हुई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में 54.9% पुरुषों ने वोट डाले थे जबकि महिलाओं का प्रतिशत 59.6 रहा था। लोकसभा चुनाव में राज्य की 40 सीटों में से 39 पर जीत मिली थी। ऐसे में 2020 में महिलाओं का ज्यादा मतदान सत्तारूढ़ खेमे को थोड़ा बल दे रहा है।

एग्जिट पोल्स के खिलाफ इतिहास का हवाला
बिहार में ऐसे भी कई लोग हैं जिन्हें एग्जिट पोल्स पसंद नहीं आए हैं और वो इतिहास का हवाला दे रहे हैं। ऐसे लोग 2019 के लोकसभा चुनाव और 2015 के विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स का दे रहे हैं हवाला। वे साइलेंट वोटर और ‘मैच्योर वोटर’ की भी बात कर रहे हैं। महिलाओं का वोट प्रतिशत बढ़ने का भी वे हवाला दे रहे हैं। एनडीए समर्थकों को लग रहा है कि बिहार के लोग इतनी जल्दी नीतीश के ‘अच्छे काम’ को नहीं भुलाएंगे

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