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चीन और पाक की बड़ी साजिश का खुलासा, भारत को गलवान में उलझाओ, पीछे से सियाचिन कब्जाओ !

गलवान घाटी में चीन के साथ जारी तनाव के बीच एक चौंकाने वाली जानकारी मिल रही है कि चीन और पाकिस्तान साथ मिलकर सियाचिन पर कब्जा करने की योजना पर काम कर रहा है। गलवान घाटी और पैंगॉन्ग झील पर के कई हिस्सों पर कब्जा करने और अपनी सैन्य उपस्थिति मजबूत करने के बाद चीन सियाचिन को लेकर योजना बना रहा है। खबर के मुताबिक़ चीन के इस खेल में पाकिस्तान भी साथी है। सियाचिन पर दोतरफा हमला करके चीन सियाचिन पर कब्जा करने की तैयारी में है।

जी, गलवान के बाद अब चीन ग्लेशियर को हड़पने की साजिश कर रहा है। सामरिक दृष्टि से यह काफी महत्वपूर्ण है और भारत ने इसे पाकिस्तान से छीना था। असल में चीन की नजर काराकोरम दर्रे पर लगी है। वह उसे अपना मानता है जबकि उसके ऊपर भारत का नियंत्रण है। पीओके से होकर चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर गुजरता है। काराकोरम दर्रे से वहां कभी भी चीन को खतरा हो सकता है इसलिए चीन इस इलाके पर किसी भी तरह अपना प्रभुत्व जमाना चाहता है।

लद्दाख सीमा पर चीनी सेना का खतरा कितना ज्यादा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक महीने के अंदर भारतीय सेना ने तीन डिवीजन सेना को लद्दाख सेक्टर में एलएसी पर तैनात कर दिया है। भारतीय सेना को यह तैनाती इसलिए करनी पड़ी है क्योंकि लाल सेना के हजारों सैनिक करीब 6 विवादित स्थानों पर डेरा जमाए बैठे हैं और युद्ध का माहौल पैदा कर रहे हैं। जबकि कुछ इलाकों में अब दोनों सेनाएं आमने सामने हैं।

भारतीय सेना की तैनाती

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, मई महीने के पहले सप्ताह से ही एलएसी पर सैनिकों की तैनाती का कार्य उस समय आनन-फानन में करना पड़ा जब चीनी सैनिक उत्तरी लद्दाख में गलवान घाटी और देपसांग, मध्य लद्दाख में हाट स्प्रिंग्स, पेंगोंग सो और चुशूल तक तो दक्षिणी लद्दाख में दमचोक और चुमार में आ डटे थे। जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना की 14 वीं कोर, जिसका मुख्यालय लेह में है, ने सेना की तीन डिवीजन को डीबीओ, चुशूल और दमचोक के बीच आनेवाले इलाकों में तैनात कर दिया है। चीनी सेना के खतरे से पहले कभी भी इतनी संख्या में भारतीय सैनिकों को लद्दाख सेक्टर में एलएसी पर तैनात नहीं किया गया था।

लद्दाख में दोनों सेना आमने-सामने

दरअसल चीनी सेना लद्दाख सीमा पर उत्तरी लद्दाख में गलवान घाटी और देपसांग, मध्य लद्दाख में हाट स्प्रिंग्स, पेंगोंग सो और चुशूल तक तो दक्षिणी लद्दाख में दमचोक और चुमार के इलाकों में सैनिक साजो सामान, जिनमें तोपखाना, टैंक, मिसाइल और बख्तरबंद वाहन भी हैं, उनके साथ आ डटी हुई है। जहां तक की वह इन इलाकों में भारतीय इलाके के भीतर ही सड़कों के निर्माण के साथ ही हेलिपैड भी विकसित कर चुकी है। हालांकि पैंगांग सो लेक के फिंगर 4 प्वाइंट पर ही एक चीनी हेलिपैड होने की पुष्टि भारती सेना के सूत्र करते थे।

जानकारी के मुताबिक, चीन सीमा पर लद्दाख सेक्टर में खतरे के आलम को देखते हुए ही भारतीय सेना भीष्म टैंकों के साथ ही के-9 वज्र थंडर तोपखानों के साथ ही अमेरिकी निर्मित एम-777  तोपों को भी चीन से मुकाबले के लिए तैनात कर चुकी है। खबर के मुताबिक विवादित फिंगर ४ के इलाके में अब भारतीय व चीनी सेनाएं आमने सामने हैं। दोनों के बीच दूरी घट कर 300  से 400  मीटर के बीच रह गई है। जिसे रक्षा सूत्र भयानक व खतरनाक स्थिति मान रहे हैं।

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