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चीन की नई दगाबाजी आई सामने, ‘दोस्त’ देशों को बेचे वो हथियार जो हैं एकदम कबाड़ !

चीन पूरी दुनिया में चालबाजी के लिए जाना जाता है. यह देश दगाबाजी किसी के साथ कभी भी कर सकता है. चीन की नीति है कि पहले दोस्ती करो फिर उसकी पीठ पर छुरा भोक दो. इतिहास गवाह है कि चीन ने अपनी सीमा से जुड़े जिस देश से दोस्ती की उसकी जमीन हड़प ली. जब देश आजाद हुआ पंडित जवाहर लाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने. चीन से दोस्ती हुई तो ‘हिन्दी-चीनी भाई-भाई’ के नारे लगे. और फिर इस चालबाज चीन ने हमारी हजारों एकड़ जमीन हड़प ली. यही नेपाल के साथ हुआ. चीन ने नेपाल से नजदीकियां बढ़ाईं और नेपाल की जमीन पर कब्जा कर लिया. इस बात की तस्दीक नेपाल के स्थानीय प्रशासन से लेकर विदेशी मीडिया ने की लेकिन नेपाली ओली सरकार इसे मानने के लिए तैयार नहीं है.

अब खबर आई है कि व्यापार के नाम पर ड्रैगन ने अपने ही मित्र देशों को ठगा है. चीन ने अपने दोस्त देशों को खराब हथियार बेचकर विश्वासघात किया है. एक बार फिर उसकी दगाबाजी की पोल खुल गई है. जी हां, चीन जिन्हें अपना मित्र देश बताता है, उनके ही विश्वास को उसने तोड़ा है. अपने देश के खराब हो चुके और दोषपूर्ण हथियारों का निर्यात कर चीन फिर से विवादों के घेरे में है. चीन विश्व में पांचवां सबसे बड़ा हथियार निर्यात करने वाला देश है. उसने अपने मित्र देशों को जो हथियार सप्लाई किए हैं, उनमें से ज्यादातर खराब पाए गए.

ये देश हैं जिन्हें चीन ने खराब हथियार बेचे-

नेपाल
बांग्लादेश द्वारा नामंजूर किए गए चीन के Y12e और MA60 छह विमानों को नेपाल ने अपने नेशनल एयरलाइंस के लिए खरीदा था. लेकिन ये सभी विमान नेपाल पहुंचते ही बेकार हो गए थे. ये विमान नेपाल जैसे देश के लिए अनुकूल न होने के साथ ही इसके स्पेयर पार्ट्स भी उपलब्ध नहीं थे.

पाकिस्तान
चीन का खास दोस्त पाकिस्तान भी दगाबाजी से बच न सका. पाकिस्तान को भी चीन ने दोस्ती की आड़ में खराब सैन्य सामानों की पूर्ति की है. पाकिस्तान के लिए चीन ने युद्ध F22P दिया था. कुछ समय बाद ही कई सारी तकनीकी प्रोब्लम्स के चलते वह खराब हो गया. सितबंर 2018 में चीन को पाकिस्तान ने इस युद्धपोत की पूरी सर्विसिंग का प्रस्ताव दिया था लेकिन चीन को इसमें किसी तरह का लाभ दिखाई ने देने पर अपनी आंखें मूंद ली थी.

बांग्लादेश
दगाबाज चीन ने 2017 में बांग्लादेश को 1970 में मिंग श्रेणी की 035G पनडुब्बिया बेची थीं. इन पनडुब्बियों की कीमत लगभग 100 मिलियन डॉलर के आसपास थी. इन पनडुब्बियों को केवल युद्ध की ट्रेनिंग में इस्तेमाल किया जाता है. ये पनडुब्बियां सर्विसिंग करने लायक भी नहीं रह जाती थी. अप्रैल 2003 में चीन से खरीदी गई मिंग क्लास की पनडुब्बी एक हादसे का शिकार हो गई थी. इसी तरह बांग्लादेश ने चीन से दो युद्धपोत BNS उमर फारूक और BNS अबू उबैदाह खरीदे थे, जिनमें नैविगेशन रडार और गन सिस्टम में खराबी पाई गई है.

केन्या
ठीक इसी तरह केन्या ने जब सैनिकों के लिए बख्तरबंद गाड़ियां खरीदी तो टेस्ट में ही चीन के सेल्स रिप्रजेंटेटिव ने इन गाड़ियों में बैठने से इंकार कर दिया था. केन्या को उस समय गाड़ियों की आवश्यकता थी. बाद में खामियों से भरी इन बख्तरबंद गाड़ियों में केन्या के कई सारे सैनिकों को अपनी जान भी गवांनी पड़ी थी.

चीन को यूं ही दगाबाज नहीं कहा जाता है. इसके पुख्ता प्रमाण भी सामने आए हैं और आ भी रहे हैं. ऐसे में तय है वो दिन दूर नहीं जब चीन को हर देश हर स्तर पर नकार देगा.

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