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चीन के लिए दोनों ऑप्शन पर सोच रहे मोदी- बात करेंगे या हमला बोलेंगे?

लद्दाख में चीन के साथ चल रहे सैन्‍य तनाव के बीच भारत सरकार के शीर्ष नीति निर्धारकों में एक बात पर आम राय बनती नजर आ रही है। उनका कहना है कि सीमा विवाद को सुलझाने के लिए चीन के साथ बातचीत तो चलती रहनी चाहिए लेकिन अगर जरूरत पड़े तो देश को ड्रैगन के साथ ‘टकराव या लड़ाई’ के लिए भी पूरी तरह से तैयार रहना चाहिए।

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर चल रहे गतिरोध को लेकर मोदी सरकार के शीर्ष नीति निर्धारकों के बीच हुए विचार विमर्श में ‘टकराव और लड़ाई’ जैसे शब्‍द का इस्‍तेमाल किया गया। इस चर्चा में शामिल रहे उच्‍च पदस्‍थ सूत्रों ने कहा, ‘हम टकराव को बढ़ाना नहीं चाहते हैं लेकिन चीन के सामने झुककर हम समझौता नहीं करेंगे।’

‘चीनी प्रतिक्रिया ने भरोसा नहीं पैदा किया’
सूत्र ने कहा, ‘हम पीछे नहीं हटने जा रहे हैं और हम उनका सामना करेंगे।’ यह पूछे जाने पर कि क्‍या भारत सरकार ने सैन्‍य कार्रवाई के बाद के परिणामों के बारे में विचार किया है, इस पर उन्‍होंने कहा, ‘सरकार में विचार है कि यदि आप परिणामों की परवाह करेंगे तो आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे।’ उन्‍होंने कहा कि भारत सरकार की इस सोच के पीछे प्रमुख कारण यह है कि 20 भारतीय सैनिकों की हत्‍या के बाद चीनी प्रतिक्रिया ने यह भरोसा नहीं पैदा किया कि ड्रैगन तनाव को कम करने जा रहा है।

उन्‍होंने कहा, ‘चीन ने हमारे सैनिकों की हत्‍या की और हालांकि हम उनसे यह अपेक्षा नहीं करते हैं कि वे इस पर दुख जताएं लेकिन भारत को अपने सैनिकों को जिम्‍मेदार बनाने के लिए कहना पेइचिंग के इरादों को दर्शाता है। यहां तक कि वे (चीन) उस पर भी अमल नहीं कर रहे हैं जिसे वे करने के लिए कह रहे हैं। उनकी अब तक केवल यही प्रतिक्रिया आई है कि भारत की गलती है और सैन्‍य जमावड़े के लिए भारत जिम्‍मेदार है।’

सूत्रों ने बताया कि अप्रैल में जब चीन के सैन्‍य जमावड़े की पहली खबर सामने आई थी, तभी पैट्रोलिंग और निगरानी को बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। अधिकारी ने कहा, ‘बाद में चीन के लगातार सैनिकों की संख्‍या बढ़ाने पर भारत की ओर से भी उसी अनुपात में सैन्‍य जमावड़ा बढ़ाने का निर्देश दिया गया। हमने इसकी जानकारी 19 जून को सभी पार्टियों की बैठक में भी दिया था।’

‘देश में चीन के खिलाफ लोगों में काफी गुस्‍सा’
चीन के साथ आर्थिक संबंध खत्‍म करने के सवाल पर एक अन्‍य अधिकारी ने कहा, ‘यह आसान नहीं है कि आप उनके साथ जुड़ जाओ और फिर अलग हो जाओ। लेकिन भारत के विकास की कहानी चीन के साथ संबंधों पर निर्भर नहीं करेगी जिसमें अब विश्‍वास की भारी कमी आ गई है। देश में चीन के खिलाफ लोगों में काफी गुस्‍सा है।’ हालांकि इसके साथ ही देश के आर्थिक हितों को भी ध्‍यान में रखना होगा। उन्‍होंने कहा कि भारत के पास सैन्‍य और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्‍प नहीं है।

एक अन्‍य अधिकारी ने कहा, ‘आज के दिनों में कोई भी युद्ध नहीं जीत रहा है और वर्ष 2020 का भारत वर्ष 1962 का नहीं है। भारत का विशाल वैश्विक गठबंधन है और हमें इसका फायदा उठाना होगा। अपने व्‍यवहार के जरिए चीन पूरे क्षेत्र में भय का माहौल पैदा करना चाहता है और खुद को सुपर पावर के रूप में स्‍थापित करना चाहता है। लेकिन चीन को यह समझने की जरूरत है कि उन्‍हें ठोस जवाब मिलेगा।’

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