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चीन के हंबनटोटा का खेल खत्म, समंदर को मुट्ठी में करने के लिए यहां पोर्ट बनाएगा भारत

भारत अब अपने सामरिक महत्व के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बड़ी मात्रा में पूंजी निवेश की योजना पर काम कर रहा है। सोमवार को प्रधानमंत्री ने भारत की पहली ‘अंडर-सी ऑप्टिकल फाइबर’ परियोजना शुरू की। इस मौके पर पीएम मोदी ने घोषणा की कि भारत सरकार बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूहों में निवेश करने पर विचार कर रही है। भारत बंगाल की खाड़ी में ग्रेट निकोबार द्वीप समूह में एक ट्रांस-शिपमेंट बंदरगाह के निर्माण के लिए 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। उन्होंने बताया कि कैसे ये ट्रांसशिपमेंट पोर्ट भारत को इस क्षेत्र में वाणिज्यिक लाभ और प्रतिस्पर्धी बढ़त देगा।

इससे पहले 2018 में प्रधानमंत्री ने एक गैस पावर प्लांट की आधारशिला रखी थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “भारत की पूर्व की नीति के तहत अंडमान को एक प्रमुख परिवहन केंद्र में बदलने का विचार किया जा रहा है ।” मोदी सरकार की नीति है कि श्रीलंका के कोलंबो और इंडोनेशिया के Banda Aceh के विकल्प के रूप में निकोबार आइलैंड को स्थापित किया जाए।

भारतीय नौसेना का एक बेस भी इस क्षेत्र में है। ऐसे में यदि यहाँ एक पोर्ट का निर्माण होता है तो यह चीन को भी संदेश होगा। अपनी इंडो-पैसिफिक नीति में भारत चीन के दबदबे को खत्म करना चाहता है, जिसमें यह बंदरगाह महत्वपूर्ण होगा।

सोमवार को तमिलनाडु में चेन्नई से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तक 2,312 किलोमीटर लंबी पनडुब्बी ऑप्टिकल फाइबर केबल के उद्घाटन समारोह के दौरान बोलते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “लगभग 10,000 करोड़ रुपये के एक अनुमानित खर्च पर ग्रेट निकोबार में एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट बनाने का प्रस्ताव है। बड़े जहाज भी इस बंदरगाह के तैयार होने के बाद यहाँ डॉक कर सकते हैं।”

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बन रहे इस ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के कई लाभ है। पहला, यह स्थान पूर्व-पश्चिम अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग के निकट है। इस क्षेत्र में आसियान, चीन, जापान और भारत जैसे प्रमुख आर्थिक शक्तियां हैं। दूसरा, यह बंदरगाह स्ट्रेट ऑफ मलक्का के बिल्कुल मुहाने पर है, और चीन का 80 प्रतिशत तेल इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। तीसरा, थाईलैंड द्वारा प्रस्तावित थाई कैनाल के भी यह बिल्कुल नजदीक है।

यह कैनाल थाईलैंड की महत्वकांक्षी योजना है, यदि यह बनकर तैयार हुई तो इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इससे स्ट्रेट ऑफ मलक्का पर बढ़ते जहाजों के दबाव को कम किया जा सकता है। इसका आर्थिक लाभ न सिर्फ थाईलैंड को मिलता बल्कि जापान और चीन जाने वाले जहाजों का 1200 किलोमीटर का रास्ता बच जाता। अब भारत ने पहले से यहाँ पोर्ट विकसित करने की योजना बनाकर इस मार्ग से आर्थिक लाभ उठाने की होड़ में इन सब पर बढ़त बना ली है। चौथी महत्वपूर्ण बात यह है कि क्योंकि यह बंदरगाह स्ट्रेट ऑफ मलक्का के बिल्कुल मुहाने पर है और स्ट्रेट ऑफ मलक्का पर जहाजों की आवाजाही का दबाव बहुत अधिक है इसलिए इस पोर्ट के इंडोनेशिया के Banda Ache के अतिरिक्त क्षेत्र में अन्य किसी भी बंदरगाह से अधिक इस्तेमाल होने की संभावना है।

भारत पहले ही इंडोनेशिया के साथ मिलकर सबांग बंदरगाह पर काम कर रहा है, ऐसे में अंडमान निकोबार में प्रस्तावित यह बंदरगाह पूरे क्षेत्र में भारत के दबदबे को कायम करेगा। यह विस्तार दिखाता है कि भारत, चीन को हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में खुलकर चुनौती दे रहा है।

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