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चीन में मुस्लिम महिलाएं अब नहीं पहन सकतीं हिजाब, इस पाबंदी पर क्यों बोलती बंद किए हैं तुर्की-पाकिस्तान !

चीन में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार से पूरी दुनिया वाकिफ है. अमेरिका, भारत समेत कई देश इस मसले पर आवाज उठाते रहते हैं. इस्लाम के ठेकेदार पाकिस्तान और तुर्की कश्मीर मुद्दे को लेकर पूरी दुनिया में बेवजह हंगामा काटते हैं लेकिन चीन में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार पर एक भी शब्द इन ढोंगियों के मुंह से नहीं निकलता. चीन के शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों की आबादी को रमजान में रोजा रखने तक की अनुमति नहीं हैं. इसके लिए उन्हें उन दिनों सामुदायिक रसोई से जबरदस्ती खाना खिलाया जाता है. उन्हें मजहब के हिसाब से अपने बच्चों का नाम भी नहीं रख सकते.

चीन में उईगर मुसलमानों पर अत्याचार की चर्चा तो दुनिया भर में हो रही है लेकिन उसके हैनान प्रांत में रहने वाले उत्सुल मुस्लिमों पर भी कम ज्यादती नहीं हो रही. उईगरों की तरह इनकी धार्मिक गतिविधियों पर पाबंदी लगाई जा रही है. इन पर कैमरों के जरिये नजर रखी जा रही है. हैनान प्रांत के सान्या शहर में उत्सुल मुस्लिमों पर भी चीन का कहर जारी है. इनके परंपरागत कपड़े- बुर्का, हिजाब पहनने, टोपी लगाने, साफा बांधने और दाढ़ी बढ़ाने पर रोक लगा दी गई है. स्त्री और पुरुष धार्मिक चिह्न वाली पोशाक या अन्य के साथ स्कूल और सरकारी कार्यालयों में नहीं जा सकते हैं.

हांगकांग के साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट अखबार के हवाले से खबर आई है कि उत्सुल मुसलमानों की महिलाओं पर भी चीन अत्याचार ढा रहा हैं. पिछले कई साल से महिलाओं के हिजाब पहनने पर रोक लगाई जा रही है. उन्हें जगह-जगह टोका जाता है. इतनी ही नहीं एक प्राइमरी स्कूल में जब लड़कियों ने हिजाब पहनकर पढ़ाई करनी चाही तो वहां पुलिस बुला ली गई. उत्सुल लड़कियों के हिजाब और परंपरागत लॉन्ग स्कर्ट भी पहनने पर रोक है. चामिक भाषा बोलने वाले उत्सुल समुदाय के लोग पूर्वी एशिया में पाए जाते हैं. यह हर जगह अल्पसंख्यक स्थिति में है.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में दस लाख उईगर मुस्लिम और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यक बंदी शिविरों में रखे गए हैं. उन्हें धार्मिक बातें भूलकर कम्युनिस्ट पार्टी की मान्यताओं को सिखाने का कार्य किया जा रहा है. शुरुआत में इस रिपोर्ट को नकारने के बाद अंतत: चीन सरकार ने मान लिया है कि वह मुस्लिमों को शिविर में रखकर देशभक्ति का पाठ पढ़ा रही है. इससे उईगरों को आतंकवाद से दूर रखने में मदद मिल रही है. शिनजियांग प्रांत में हिंसा और आतंकी घटनाओं की वारदातों के बाद उईगरों को शिविर में रखने का फैसला किया गया.

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