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चीन रचा चक्रव्यूह : तिब्बत में तोपें और सैनिक तैनात, करगिल जैसा ‘ऊंचाई’ वाला प्लान, पाकिस्तान को भी कर दिया तैयार

चीन एक ओर जहां भारत को पूर्वी लद्दाख में सीमा पर उलझाए हुए है। दूसरी ओर ठीक इसी समय पाकिस्तान को अत्याधुनिक डिफेंस प्रोडक्ट बेचकर पाकिस्तान की सैन्य क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है। खुफिया सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान चीन से मीडियम-रेंज, लंबे समय तक चलने वाले मानव रहित एरियल व्हीकल ‘काई हॉन्ग -4’ (सीएच -4) थोक में खरीद रहा है। सीएच-4 इराकी सेना और रॉयल जॉर्डन वायु सेना में भी शामिल है।

चीन ने तिब्बत के ऊंचाई वाले इलाकों में आर्टिलरी गनों (तोप) को तैनात कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, जुलाई के आखिरी हफ्ते में चीन ने तिब्बत में 4,600 मीटर की ऊंचाई पर आर्टिलरी गन की तैनाती की है।

चीन ने तिब्बत क्षेत्र में सेना की तैनाती बढ़ाई
न्यूज एजेंसी के हवाले से यह भी खुलासा किया गया कि चीन तिब्बत मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट में 77 कॉम्बैट कमांड के 150 लाइट कम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड को तैनात कर दिया है। कम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड को अमेरिकन ब्रिगेड कॉम्बैट टीम की तर्ज पर तैयार किया गया है, जो सभी तरह के हथियारों को चलाने में एक्सपर्ट होती है। चीन ने तिब्बत क्षेत्र में सेना की तैनाती बढ़ा दी है और कम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड को भारत से लगी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पास तैनात किया गया है।

तीनों सेक्टर्स में चीन की हरकत
चीन ने एनएसी के तीनों सेक्टर में सैनिक, आर्टिलरी और आर्मर तैनात किए हैं। ये इलाके हैं, पश्चिमी लद्दाख, मध्य में (उत्तराखंड और हिमाचल से लगने वाली सीमा) और पूर्व (सिक्किम और अरुणाचल से लगने वाली सीमा)। चीन उत्तराखंड में लिपुलेख पास एरिया में भी सैनिकों का जमावड़ा कर रखा है। यहां नेपाल, भारत और चीन की सीमाएं मिलती हैं। यह कालापानी घाटी का हिस्सा है।

लंबे समय से नहीं सुलझ रहा मामला
भारत और चीन के बीच जारी विवाद कई दौर की मिलिट्री और डिप्लोमैटिक वार्ता के बाद भी सुलझ नहीं सका है। पूर्वी लद्दाख से पीछे हटने के वादे से चीन के मुकरने के बाद भारतीय सेना ने भी लंबे वक्त तक मोर्चा संभालने की पूरी तैयारी कर ली है। चीन ने वादे के खिलाफ जाते हुए सीमावर्ती इलाकों में निर्माण भी कर लिए हैं।

क्या है विवाद
भारत और चीन के बीच विवाद की शुरुआत तब हुई जब चीन एलएसी पर कई इलाकों में यथास्थिति में बदलाव करते हुए भारतीय क्षेत्र में आ गया। भारत ने इसका विरोध किया और चीन के साथ सभी लेवल पर मुद्दों को उठाना शुरू किया। इसके बाद गलवान वैली में भारत-चीन के बीच 15 जून को हुई झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीन के भी करीब 35 सैनिक मारे गए थे, लेकिन उसने कभी माना नहीं।

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