Wednesday , October 21 2020
Breaking News
Home / ख़बर / जबरदस्त होगी जंग : रीटेल बाजार में एकछत्र राज नहीं कर सकेंगे अंबानी, सुपर ऐप के साथ टक्कर देने आ रहे टाटा !

जबरदस्त होगी जंग : रीटेल बाजार में एकछत्र राज नहीं कर सकेंगे अंबानी, सुपर ऐप के साथ टक्कर देने आ रहे टाटा !

भारत का रीटेल सेक्टर बहुत बड़ा है। कोरोना महामारी के बीच ऑनलाइन रीटेल में बहुत तेजी से विकास हो रहा है जिस पर सबकी निगाहें हैं। ऑनलाइन रीटेल पर मुख्य रूप से फ्लिपकार्ट और ऐमजॉन का कब्जा रहा है। अब रिलायंस जियोमार्ट की मदद से ऑनलाइन बाजार पर अपना रुतबा कायम करना चाहती है। इस बीच खबर है कि टाटा ग्रुप एक सुपर ऐप लेकर आने वाली है जो चाइनीज वी चैट और अली पे की तरह होगा। पहले मुकेश अंबानी ने 20 अरब डॉलर का निवेश जियो प्लैटफॉर्म्स के लिए जुटाया फिर फ्यूचर ग्रुप का रीटेल और होलसेल बिजनस खरीदा। अब रिलायंस रीटेल का विनिवेश किया जा रहा है और पिछले कुछ सप्ताह में 33 हजार करोड़ से ज्यादा का फंड इकट्टा किया जा चुका है। माना जा रहा है कि टाटा संस अपने सुपर ऐप के लिए वॉलमार्ट से हाथ मिला सकती है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक वॉलमार्ट 25 अरब डॉलर का निवेश टाटा ग्रुप में कर सकती है।

टाटा के सुपर ऐप में सबकुछ होगा

टाटा ग्रुप इस ऐप की मदद से अपने फैशन, लाइफस्टाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रीटेल, ग्रॉसरी, इंश्योरेंस, फाइनैंशल सर्विसेज जैसे बिजनस को एक प्लैटफॉर्म पर लाएगी। मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सुपर ऐप पर डिजिटल कंटेट, एजुकेशनल कंटेट भी उपलब्ध होगा।

अंबानी को जियो का फायदा

मुकेश अंबानी और टाटा ग्रुप, दोनों के अपने-अपना फायदे हैं। मुकेश अंबानी को जियो के 40 करोड़ यूजर्स का फायदा है। इसके अलावा रिलायंस का रीटेल चेन भारत में सबसे बड़ा है। इसके करीब 12 हजार स्टोर्स हैं। रतन टाटा की बात करें तो टाटा ग्रुप के 100 से अधिक बिजनस हैं। वह चायपत्ती से लेकर कार तक बनाती है। हर कैटिगरीज के बिजनस के लिए कंप्लीट अलग-अलग सप्लाई चेन सिस्टम है।

वॉलमार्ट के साथ करार तो फ्लिपकार्ट का मिलेगा फायदा

ऐसे में अगर टाटा ग्रुप एक ऐसा पोर्टल विकसित करती है जहां इसके वेंडर्स अपना सामान बेच सकते हैं तो इसका दायरा काफी बढ़ जाएगा। इन सब के बीच अगर वॉलमार्ट के साथ करार हो जाता है तो टाटा के पास फ्लिपकार्ट का समर्थन हासिल हो जाएगा। वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट का 16 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया था।

टेलिकॉम सेक्टर से बाहर हो चुकी है टाटा

टाटा ग्रुप के सामने कुछ चुनौतियां हैं। वह टेलिकॉम बिजनस से बाहर निकल चुकी है। अगर होती तो इस काम में फायदा होता। एयर इंडिया और एयरएशिया ग्रुप की हालत खराब है। अगर टाटा एविएशन सेक्टर में रहना चाहती है और एयर इंडिया जो कभी टाटा की कंपनी थी, उसे खरीदती है तो उसे बहुत ज्यादा पैसे की जरूरत होगी। टाटा ग्रुप पर 20 अरब डॉलर यानी 1.5 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज है। मुकेश अंबानी ने हाल ही में RIL को नेट डेट फ्री किया है।

SPG की हिस्सेदारी खरीदने के लिए चाहिए बहुत पैसा

टाटा ग्रुप का शापूरजी पालोनजी मिस्त्री के साथ विवाद चल रहा है। ग्रुप ने SPG ग्रुप से टाटा संस की 18.4 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की बात की है। इसके लिए उसे अरबों डॉलर की जरूरत होगी। दूसरी तरफ रिलायंस की बात करें तो मुकेश अंबानी ने रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स पर अपनी निर्भरता घटा दी है। वर्तमान में रिफाइनिंग बिजनस की हालत पूरी दुनिया में बहुत खराब है।

loading...
loading...

Check Also

गाय के गोबर लैंप ने गुल कर दी चीन की बत्ती, बिलबिलाहट में बक रहा ऊलजलूल

इस बार की दीवाली में चीन का लाइटिंग कारोबार ठप हो जाएगा. भारत ने इसके ...