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जाते-जाते चीन पर सबसे तगड़ा प्रहार किए ट्रम्प, अब PLA हो जाएगी पाई-पाई की मोहताज!

अमेरिका चुनाव में हार-जीत किसी की भी हो, लेकिन इतना तय है कि आज भी ट्रम्प चीनी सेना के सबसे बड़े दुश्मन बने हुए हैं। चीनी सेना ने सालों तक ना सिर्फ अमेरिकी शोधों के बल पर अपने आप को मजबूत किया बल्कि अपने वित्तपोषण के लिए अमेरिकी निवेशकों का भी सहारा लिया। हालांकि, अब ये सब ट्रम्प के रहते बंद हो रहा है।

ट्रम्प ने सबसे पहले चीनी सेना पर प्रहार करने के लिए अपने यहाँ मौजूद चीनी सेना के Spy Network पर धावा बोला। FBI ने इसी वर्ष फरवरी में यह खुलासा किया था कि चीनी सेना किसी भी कीमत पर अमेरिका से तकनीक चुराना चाहती है और FBI के करीब 1000 अफसर इस मामले पर अपनी पैनी नज़र बनाए हुए हैं। उसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिका के उच्च स्तरीय शिक्षा शोधों में चीनी छात्रों के शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब ट्रम्प ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए एक कार्यकारी आदेश जारी कर चीन की सेना के साथ सुरक्षा संबंधी लेन-देन तथा उपकरणों की खरीद एवं बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कार्यकारी आदेश 11 जनवरी 2021 से लागू हो जायेगा।

आदेश के मुताबिक, ऐसी चीनी कंपनियों में अमेरिका द्वारा निवेश नहीं किया जाएगा, जो किसी भी रूप में चीन की सेना से जुड़ी हैं। यह कदम अमेरिकी निवेश फर्म, पेंशन फंड और अन्य को उन 31 चीनी कंपनियों के शेयर खरीदने से रोकने के लिए उठाया गया है, जिन्हें रक्षा विभाग ने चीनी सेना समर्थित कंपनियां करार दिया है। यानि अब चीनी सेना को किसी भी रास्ते से अमेरिकी निवेशकों का पैसा नहीं मिल पाएगा!

White House ने एक बयान जारी कर कहा है “चीन अपनी सेना, खुफिया तंत्र और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को मजबूत बनाने और उनके आधुनिकीकरण के लिए लंबे समय से अमेरिकी निवेश का इस्तेमाल करता आया है, लेकिन अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।” चीनी सेना रिसर्च पर कम और तकनीक की चोरी पर ज़्यादा काम करती है। यही कारण था कि ट्रम्प ने अपने यहाँ Intellectual Property की सुरक्षा के लिए कई ज़रूरी कदम उठाए! अब ट्रम्प चीन पर आर्थिक प्रहार करने पर फोकस कर रहे हैं। उनका दोबारा राष्ट्रपति बनना तय नहीं है, लेकिन अपने कदमों से वे यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि अगर बाइडन White House में आते हैं, तो चीनी सेना उनके नर्म रुख का किसी भी कीमत में फायदा ना उठा सके!

ट्रम्प द्वारा उठाया गया यह बड़ा कदम अगले कई दशकों तक चीनी सेना को चुभेगा! बदहाल होती अर्थव्यवस्था के बीच ट्रम्प का यह फैसला चीन को चुभ सकता है। ट्रम्प के फैसले से चाइना टेलीकॉम कॉर्प लिमिटेड, चाइना मोबाइल लिमिटेड और सर्विलांस डिवाइस निर्माता Hikvision सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। ये सभी कंपनियाँ चीनी सेना से जुड़ी हुई हैं, और अब अमेरिका से इन्हें एक भी फूटी कौड़ी नसीब नहीं होगी!

बाइडन आने के बाद इस फैसले को शायद ही पलट पाएँ! अगर बाइडन यह गलती करते हैं तो अमेरिका में उनकी लोकप्रियता में भारी कमी देखने को मिल सकती है। ट्रम्प का यह ऐसा masterstroke है जो अगले दशकों तक चीनी सेना के गले में फांस बनकर उसके लिए परेशानी खड़ी करता रहेगा!

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