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गैस चेंबर में रखी है भारतीय संविधान की मूल प्रति, जानिए इसके पीछे की वजह

हम हर वर्ष 26 जनवरी को अपना गणतंत्र दिवस मनाते हैं. साल 1950 में इस दिन हमारा अपना संविधान लागू हुआ था. इसी खास वजह से इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है. इस दिन भारत के राष्ट्रपति इंडिया गेट पर भारतीय राष्ट्र ध्वज फहराते हैं और इसके बाद सामूहिक रूप में खड़े होकर राष्ट्रगान गाया जाता है. साथ ही राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को सलामी दी जाती है.

गणतंत्र दिवस मनाने की वजह तो देश के सभी नागरिक को मालूम है लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस संविधान के लागू होने की वजह से हम गणतंत्र दिवस मनाते हैं, उस संविधान की मूल प्रति को गैस चेंबर में रखा गया है? तो अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या कारण है जिसके चलते ऐसा किया गया. तो आइए, हम आपको बताते हैं कि इसके पीछे क्या वजह है.

दरअसल, दुनिया में भारत का ही संविधान है, जो हाथ से बने कागज पर हाथ से लिखा हुआ है. हर पन्ने पर सोने की पत्तियों वाली फ्रेम बनी हैं. साथ ही हर अध्याय के आरंभिक पृष्ठ पर एक कलाकृति भी बनाई गई है. संविधान की मूल प्रति को पहले फलालेन के कपड़े में लपेटकर नेफ्थलीन बॉल्स के साथ रखा गया था. साल 1994 में संसद भवन के पुस्तकालय में इसे वैज्ञानिक विधि से तैयार चेम्बर में सुरक्षित कर दिया गया. इससे पहले यह देखा गया कि दुनिया में अन्य संविधानों को किस तरह सुरक्षित रखा गया है. पता चला कि अमेरिकी संविधान सबसे सुरक्षित वातावरण में है. वॉशिंगटन स्थित लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस में हीलियम गैस के चेम्बर में इस एक पेज के संविधान को रखा गया है.

इसके बाद अमेरिका के गेट्टी इंस्टीट्यूट, भारत की नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी व भारतीय संसद के बीच करार के बाद गैस चेम्बर बनाने की पहल हुई. चूंकि भारतीय संविधान आकार में बड़ा और भारी है, इसलिए चेम्बर बड़ा हो गया. इसमें हीलियम गैस रोकने की तमाम कोशिशें नाकाम हो गईं तो नाइट्रोजन गैस का चेम्बर बनाया गया. कागज की सुरक्षा के लिए ऐसी गैस की आवश्यकता थी, जो इनर्ट यानी नॉन-रिएक्टिव हो. नाइट्रोजन भी ऐसी ही है.

भारतीय संविधान काली स्याही से लिखा है, लिहाजा ये आसानी से उड़ यानी ऑक्सीडाइज हो सकती थी. इसे बचाने के लिए ह्युमिडिटी 50 ग्राम प्रति घन मीटर के आस-पास रखने की जरूरत थी. इसलिए एयरटाइट चेम्बर बनाया. ह्युमिडिटी मेन्टेन रखने के लिए चेम्बर में गैस मॉनिटर लगाए गए. हर साल चेम्बर की नाइट्रोजन गैस खाली की जाती है और संविधान की सेहत जांची जाती है. हर दो महीने में इस चेम्बर की चेकिंग भी की जाती है. सीसीटीवी कैमरे से इस पर लगातार निगरानी रहती है.

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