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जापान के नए पीएम को लुभाने की कोशिश किए जिनपिंग, सारे अरमानों को पलीता लगा दिए सुगा

जापान की सुगा सरकार बीतते समय के साथ चीन के लिए एक बुरा सपना बनते जा रही है। शी जिनपिंग की सरकार ने सोचा था कि शिंजो आबे की तुलना में सुगा से निपटना आसान होगा, लेकिन अब बीजिंग को एहसास हुआ है कि Yoshihide Suga आबे से भी अधिक प्रखर चीन विरोधी है। उन्होंने शी जिनपिंग की जापान की यात्रा के सपने और जापान को अपने पक्ष में करने के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। यही कारण है कि अब चीन को अपने वास्तविक रंग में आने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

पिछले हफ्ते, Yoshihide Suga के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार शी जिनपिंग और उनके बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई। CCP के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने इस बातचीत का जश्न मनाया और रिपोर्ट में लिखा कि, “शी और सुगा के बीच फोन कॉल भविष्य के चीन-जापान संबंधों के लिए रास्ते तय कर सकता है।” परंतु उसने यह नहीं बताया कि सुगा ने शी जिनपिंग की जापान यात्रा पर ग्रहण लगा दिया है।

शी जिनपिंग पिछले काफी समय से जापान की यात्रा करना चाहते थे। प्रारंभ में, वह इस साल अप्रैल में सुगा के पूर्ववर्ती, शिंजो आबे से मिलने वाले थे, लेकिन तब कोरोना की वजह से शी जिनपिंग की अप्रैल की यात्रा असंभव हो गई। जैसे ही जापान और चीन दोनों में चीजें सामान्य हुईं, शी जिनपिंग पूर्वी पड़ोसी की आधिकारिक यात्रा के लिए नए कार्यक्रम की योजना बनाने लगे। हालाँकि, शिंजो आबे शी जिनपिंग को जापान बुलाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे।

अब जब से सुगा जापान के प्रधानमंत्री बने हैं तब से शी जिनपिंग सोच रहे होंगे कि कम से कम नए जापानी प्रधानमंत्री उन्हें अपने देश में आमंत्रित करेंगे। ऐसी उच्च आशाओं के साथ, चीनी राष्ट्रपति ने जापान के प्रधानमंत्री के साथ फोन पर बातचीत की लेकिन तब भी सुगा ने उन्हें जापान आने का निमंत्रण नहीं दिया।

सुगा ने स्वयं संवाददाताओं से कहा कि शी जिनपिंग की जापान यात्रा जो अप्रैल में होने वाली थी, उसका पुनर्निर्धारण नहीं किया गया था। दूसरी ओर, चीन का सरकारी मीडिया, इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर पूरी तरह से हैरान रह गया। सुगा का इस तरह से कहना कि यात्रा पर चर्चा ही नहीं की गई थी, इसका मतलब यह है कि टोक्यो ने चीनी राष्ट्रपति को आमंत्रित ही नहीं किया था।

यह समझना कठिन नहीं है कि उच्च-स्तरीय कूटनीति के संदर्भ में, जिनपिंग स्वयं जापान की यात्रा के लिए तो कहेंगे नहीं इसलिए यह निर्णय जापानी पीएम के ऊपर था कि वे शी जिनपिंग को बुलाना चाहते हैं या नहीं। परन्तु स्पष्ट रूप से, सुगा ने शी जिनपिंग को आमंत्रित नहीं किया। जिनपिंग को कोई भी निमंत्रण देने से परहेज करते हुए, सुगा ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके मन में जिनपिंग के साथ दोस्ती बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है।

सुगा प्रशासन किसी भी नेता से मिलकर आमने-सामने बातचीत करने में विश्वास रखता है और यहां तक ​​कि मुख्य कैबिनेट सचिव Katsunobu Kato ने भी कहा कि नेताओं के बीच आमने-सामने बैठना कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए, जिनपिंग को आमने सामने की बैठक से वंचित करना दिखाता है कि टोक्यो चीन के साथ कोई दोस्ती का इरादा नहीं रखता है वह भी ऐसी मुश्किल घड़ी में।

वास्तव में, चीन के लिए बेहद शर्मिंदगी की बात है कि कैसे जापान ने शी जिनपिंग को अपने देश नहीं बुलाया। चीनी राजनयिक मंडल ऐसे समय में टोक्यो के साथ दोस्ती बढ़ाने के लिए बेताब हैं, जब अमेरिका से लेकर भारत और ऑस्ट्रेलिया तक के लोकतांत्रिक देश चीन को उसके किए के लिए दंड देने के लिए बेताब है। टोक्यो के इस प्रकार से व्यवहार के बावजूद, सूत्रों के अनुसार चीनी विदेश मंत्री वांग यी अक्टूबर के शुरू में टोक्यो का दौरा कर सकते हैं।

यहां तक ​​कि सुगा के साथ अपने टेलीफोन कॉल में, शी जिनपिंग की हताशा साफ नजर आई जब जिनपिंग ने जापान से अनुरोध किया कि वह चीन के साथ संयुक्त रूप से  मिलकर औद्योगिक चेन और सप्लाइ चेन की रक्षा करें।

बेशक, यह चीनी राष्ट्रपति के लिए सप्लाइ चेन की सुरक्षा के लिए अनुरोध करना एक बेहद अविश्वसनीय कदम था। हालाँकि, यह फिर से बीजिंग की हताशा का संकेत है क्योंकि जापान अपनी कंपनियों को चीन से बाहर निकलने और वियतनाम और भारत जैसे अन्य देशों में मैनुफैक्चरिंग यूनिट्स को स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

शी जिनपिंग की Yoshihide Suga से दो तत्काल मांगें हैं- एक, जिनपिंग को जापान की यात्रा के लिए आमंत्रित करना और दूसरा, आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा करना।

जापानी प्रधानमंत्री ने पहली मांग को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया है और सुगा की दूसरी मांग को पूरा करने के कोई संकेत नहीं हैं। इससे यह कहना गलत नहीं होगा कि Yoshihide Suga चीन के लिए काफी बुरा सपना साबित हो रहे हैं और वह अपने पूर्ववर्ती शिंजों आबे की तुलना में चीन के लिए अधिक खतरनाक साबित हो रहे हैं।

सुगा की हरकतें भी अब चीन को कुछ ज्यादा ही नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने पहले तो ताइवान के एक समर्थक Nobuo Kishi को अपना रक्षा मंत्री नियुक्त किया,  और साथ ही सुगा ने दक्षिण कोरिया से लेकर वियतनाम तक सभी चीन के विरोधियों के साथ सहयोग करने का भी फैसला किया है। इस तरह से यह कहना गलत नहीं होगा कि फोन के जरिये जापान के नए पीएम सुगा को खुश करने के लिए शी जिनपिंग के प्रयास व्यर्थ साबित हुए हैं।

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