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जिनपिंग का काउंटडाउन चालू, गुस्से में जनता और सेना, होने वाला है तख्तापलट !

पेइचिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का उनके ही देश में अब भारी विरोध शुरू हो गया है। लोगों ने जिनपिंग के ऊपर देश और पार्टी को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। चीन की प्रसिद्ध सेंट्रल पार्टी स्कूल की पूर्व प्रोफेसर और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता काई शिया ने आरोप लगाया है कि वे माफिया बॉस बनने की कोशिश कर रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति की आलोचना करने वाला एक ऑडियो वायरल होने के बाद काई शिया को पार्टी से निकाल दिया गया है।

जिनपिंग के पास असीमित शक्तियां
पिछले एक साल से अमेरिका में रह रहीं काई शिया ने द गार्डियन से बातचीत में कहा कि शी जिनपिंग की शक्तियां असीमित हैं। देश में कोई भी उनका विरोध नहीं कर सकता। आप चीन और अमेरिका के बीच टकराव को देख सकते हैं। उन्होंने पूरी दुनिया को दुश्मन बना दिया है। जब उनसे पूछा गया कि आखिर चीन दुनिया को दुश्मन क्यों बनाएंगा तो काई ने कहा कि वे देश की समस्याओं से जनता का ध्यान हटाना चाहते हैं। इसलिए एक रणनीति के तहत ऐसा किया जा रहा है।

चीन पर कोरोना महामारी छिपाने का आरोप
उन्होंने कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए सीधे चीन को जिम्मदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वुहान की महामारी पूरे देश और पूरी दुनिया में फैली हुई है और सभी को नुकसान पहुंचाया है। मौत के आंकड़ों को भी लेकर चीन ने जानकारियां छिपाई हैं। 7 जनवरी को ही चीनी सरकार को कोरोना संक्रमण की जानकारी मिल गई थी, लेकिन इसे 20 जनवरी तक किसी को नहीं बताया गया।

पार्टी से निकाली गईं काई शिया
काई शिया ने कहा कि उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया है और वह देश से बाहर हैं। इसलिए अब चीनी शासन के खिलाफ बोलने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि अब मेरा भाषण किसी भी बाधा से मुक्त है। अब मैं केवल अपने विवेक और सिद्धांतों के लिए जिम्मेदार हूं। काई शिया के पिता चीन की स्वतंत्रता में सक्रिय रहे थे। जिसके कारण उन्हें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का आजीवन सदस्य बनाया गया था।

पार्टी के ऊपर चीनी राष्ट्रपति की पकड़ ढीली
चीन मामलों के विशेषज्ञ और China Neican मीडिया आउटलेट के सह संस्थापक एडम नी ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने शी चिनफिंग की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के ऊपर पकड़ की सच्चाई को खोलकर रख दिया है। चीन के आक्रामक व्यवहार का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि चीन को कुछ लोग दुर्भावनापूर्ण तरीके से अखंड देश के रूप में प्रचारित कर रहे हैं।

टुकड़ों में बटा हुआ है चीन
उन्होंने कहा कि चीन की सत्ताधारी पार्टी दुर्भावना से पूरी तरह ग्रस्त है और इसके नेता विश्व में दबदबा कायम करने का सपना देख रहे हैं। जबकि, वास्तविकता यह है कि चीन टुकड़ों में बंटा हुआ है। कम्युनिस्ट पार्टी के नेता आपस में ही विरोधाभासी हैं। वे बस कठिन समय में एक दूसरे को जबरदस्ती पकड़े हुए हैं।

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस @detresfa_ की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि चीन इस पोर्ट पर तीन साइट्स का निर्माण कर रहा है। उन बिल्डिंग्स की छतें नीले रंग में दिखाई दे रही हैं। इन बिल्डिंग की संरचनाएं स्थानीय शैलियों के विपरीत हैं, जिनसे पता चलता है कि चीन यहां सैन्य ठिकाने बनाने की कोशिश कर रहा है। चीनी नौसेना के जंगी जहाज पाकिस्तानी नौसेना के साथ अक्सर इस पोर्ट की गश्त लगाते रहते हैं।

चीन को डर है कि युद्ध की स्थिति में भारतीय नौसेना मलक्का जलडमरूमध्य से हिंद महासागर में प्रवेश करने वाले संकीर्ण चोक पॉइंट को कभी भी बंद कर सकती है। इससे चीन का आधे से ज्यादा व्यापार ठप पड़ जाएगा। इसके अलावा चीन की क्रूड ऑयल सप्लाई लाइन भी बंद हो जाएगी। इसी की काट के रूप में चीन जल्द से जल्द ग्वादर पोर्ट को विकसित करना चाहता है। इसके जरिए वह पाकिस्तान से होकर अपने व्यापार को युद्ध के समय भी जारी रख सकता है।

  • अरब सागर के किनारे पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में चीन ग्वादर पोर्ट का निर्माण चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना के तहत कर रहा है और इसे पेइचिंग की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट, वन रोड (ओबीओआर) तथा मेरिटाइम सिल्क रोड प्रॉजेक्ट्स के बीच एक कड़ी माना जा रहा है। ग्वादर पोर्ट के जरिए चीन के सामान आसानी से अरब सागर तक पहुंच जाएंगे। लेकिन तनाव बढ़ने की स्थिति में पेइचिंग इसका इस्तेमाल भारत और अमेरिका के खिलाफ सैन्य और रणनीतिक उद्देश्यों के लिए भी कर सकता है।

  • चीन ने BRI के तहत पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को 80 करोड़ डॉलर की आनुमानित लागत से विकास कर रहा है। चीन के अधिकारी भले ही बार-बार यह कहते रहे हैं कि ग्वादर बंदरगाह और CPEC का उद्देश्य पूरी तरह से आर्थिक और व्यावसायिक हैं, लेकिन इसके पीछे चीन की असल मंशा सैन्य प्रभुत्व बढ़ाना है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ग्वादर का इस्तेमाल अपने नौसेना बेस के तौर पर कर सकता है।

  • अमेरिका के शीर्ष जनरल के अनुसार, पाकिस्तान ने ग्वादर पोर्ट तथा अन्य परियोजनाओं के निर्माण के लिए अपने ‘सदाबहार मित्र’ चीन से कम से कम 10 अरब डॉलर का कर्ज लिया है। शीर्ष अमेरिकी जनरल ने ग्वादर को प्रभुत्व के विस्तार के लिए चीन की ‘कर्ज के जाल में फंसाकर कब्जा’ करने वाली रणनीति बताया। उन्होंने कहा, ‘चीन अपने प्रभुत्व के विस्तार के लिए कर्ज बांटकर कब्जा करने की रणनीति के जरिये दादागिरी करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तैयार कर रहा है।’

भ्रष्टाचार में डूबी हुई है कम्युनिस्ट पार्टी

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकतर नेता भ्रष्टाचारी हैं, इसलिए वे राष्ट्रपति सहित किसी भी नेता के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते हैं। भले ही आप भ्रष्ट न हों, वे आप पर भी भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाएंगे। अगर पार्टी के किसी बड़े नेता ने गलती से भी आपको भ्रष्ट कह दिया तो आप भ्रष्टाचारी घोषित कर दिए जाएंगे, भले ही आप सही हों।

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