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जिस कोरोना वैक्सीन पर UN में डींगें हांके जिनपिंग, वो लगाकर हजारों बीमार

चीन दुनिया में फर्जी सामान बनाने वाले देशों की सूची में पहले नंबर पर आता है. ‘मेड इन चाइना’ का जिक्र आते ही दिमाग में एक ही बात आती है कि ये यह सामान टिकाऊ नहीं हो सकता. आमतौर पर धारणा है कि चीन घटिया सामान बनाकर दुनिया में बेचता है. अब ये बात सच साबित हो रही है. दुनिया भर में कोरोना वायरस को फैलाने वाला चीन कोराना वायरस वैक्सीन बना रहा था. इसे लेकर ड्रैगन ने अपने आर्थिक गुलाम देश पाकिस्तान को वादा किया था कि उसे चिंता करने की जरूरत नहीं है, चीन उसे कोरोना वैक्सीन देगा. इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र (UN) के 75वें स्थापना दिवस पर आम सभा को संबोधित करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने देश में बन रही कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर चीनी वैज्ञानिकता पर भौकाल बनाया था. लेकिन अब ड्रैगन के भौकाल की हवा निकल चुकी है और ‘मेड इन चाइना’ की सच्चाई एक बार फिर सबके सामने है. जिस वैक्सीन के कसीदे जिनपिंग में संयुक्त राष्ट्र में कसे थे वो फुस्स हो चुके हैं. उसका ट्रायल फेल हो चुका है. हजारों हजार लोग बीमार होकर अस्पतालों में भर्ती हैं. वैक्सीन का ट्रायल रोक दिया है.

बता दें कि कुछ दिनों पहले चीन ने अपनी कोरोना वैक्सीन के आपात इस्तेमाल की अनुमति दी थी. इस दौरान कई लोगों ने सिरदर्द, चक्कर आना और उल्टी जैसी शिकायतें दर्ज करवाई हैं. वहीं, राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस वैक्सीन को लेकर यूएन के मंच से भी बड़ा ऐलान कर आए हैं. चीन के सदाबहार दोस्त पाकिस्तान में भी इस वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल जारी है. वहां से भी खबर है कि जिन लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल हुआ वे बीमार हो रहे हैं लेकिन ड्रैगन के डर से पाकिस्तान इसकी शिकायत सार्वजनिक नहीं कर पा रहा है.

चीन के जानेमाने लेखक एवं स्तंभकार कान चाई को देश में आपातकालीन उपयोग के लिए स्वीकृत कोविड-19 के टीके की पहली खुराक पर तो कुछ नहीं हुआ, लेकिन दूसरी डोज के बाद उन्हें चक्कर आने लगे. चाई ने इस महीने की शुरुआत में एक वेबिनार में कहा कि जब मैं गाड़ी चला रहा था तो अचानक मुझे चक्कर आने लगे. ऐसा लगा कि मैं नशे में गाड़ी चला रहा हूं. मैंने एक जगह देख कर कार रोकी, थोड़ा आराम किया और तब मुझे बेहतर लगा.

चीन में चाई की तरह ही हजारों लोगों को आम इस्तेमाल के लिए अंतिम नियामक स्वीकृति मिलने से पहले चीनी वैक्सीन की डोज दी गई है. इस कदम को लेकर आचार संहिता और सुरक्षा संबंधी सवाल उठ रहे हैं. इससे पहले चीनी कंपनियां ह्यूमन ट्रायल से पहले अपने शीर्ष पदाधिकारियों और रिसर्चर्स को जांच के लिए वैक्सीन की खुराक देने पर सुर्खियों में आई थीं.

चीन के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि चीन को महामारी को वापस आने से रोकने के लिए कदम उठाने होंगे. एक बाहरी विशेषज्ञ ने ऐसे समय में वैक्सीन के आपात उपयोग की जरूरत पर सवाल खड़ा किया है, जब देश में वायरस का संक्रमण अब नहीं फैल रहा है. माना जा रहा है कि चीन फिर से अपनी वैक्सीन की सुरक्षा संबंधी जांच को शुरू करेगा.

चीन में इस समय कोरोना वायरस की तीन वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल के अलग-अलग स्टेज में हैं. चीन की सरकारी कंपनी Sinopharm ने कोरोना वायरस के इनऐक्टिवेटेड पार्टिकल्‍स का इस्‍तेमाल करके दो-दो वैक्‍सीन बनाई हैं. पार्टिकल्‍स को इनऐक्टिवेट इसलिए किया जाता है ताकि वह बीमारी न फैसला सकें. जून में कंपनी ने कहा था कि फेज 1 और 2 ट्रायल में वैक्‍सीन सारे वॉलंटियर्स में ऐंटीबॉडीज तैयार करने में सफल रही। वहीं चीन की चीनी कंपनी CanSino Biologics ने भी एक कोरोना वायरस वैक्सीन को विकसित किया है।

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