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टूलकिट केस में सामने आया खालिस्तानी कनेक्शन, दिशा के बाद अब इन लोगों पर होगा एक्शन!

किसान आंदोलन की आड़ में देश को बदनाम करने और माहौल खराब करने के लिए विदेशी ताकतें के साथ देशविरोधी गैंग ने जो साजिशें रची थी अब उसकी परतें धीरे धीरे खुलकर सामने आ रही हैं. खासकर टूलकिट बनाने वालों पर दिल्ली पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. इस केस में अब तक एक गिरफ्तारी हो चुकी है और तीन की तलाश जारी है. दिशा के दो करीबी साथी निकिता जैकब और शांतनु नाम के खिलाफ दिल्ली की एक कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया है.

11 फरवरी को निकिता जैकब के घर स्पेशल सेल की टीम सर्च करने गई थी. टीम मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जांचने गई थी. शाम का वक्त था, इसलिए पूछताछ नहीं हो सकी थी. निकिता से स्पेशल सेल ने दस्तावेज पर दस्तखत करवाया था कि वो जांच में शामिल होंगी, लेकिन उसके बाद निकिता अंडरग्राउंड हो गई. पुलिस इस केस में खालिस्तानी कनेक्शन की भी जांच कर रही है. इसमें योगेन्द्र यादव जैसे चेहरे भी जल्द ही बेनकाब होंगे जिन पर लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं. खुद कांग्रेसी सांसद रवनीत सिंह बिट्टू भी लोकसभा में ये साफ कर चुके हैं कि योगेन्द्र यादव जैसे लोग ही आदोंलन को खराब कर रहे हैं.

इस बीच, दिल्ली पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि दिशा और निकिता ने खालिस्तानी समर्थक माने जाने वाले पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के फाउंडर एमओ धालीवाल के साथ जूम ऐप पर मीटिंग की थी. इस मीटिंग का मकसद 26 जनवरी से पहले सोशल मीडिया पर खलबली मचाना था.

दरअसल 3 फरवरी को 18 साल की क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने दो सोशल मीडिया पोस्ट लिखी थीं. पहली पोस्ट में उन्होंने किसानों का समर्थन किया था, दूसरी पोस्ट में एक टूलकिट शेयर की थी. ये टूलकिट एक गूगल डॉक्यूमेंट था. इसमें ‘अर्जेंट और ऑन ग्राउंड एक्शंस’ का जिक्र था.

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने इसे सरकार विरोधी मानते हुए टूलकिट बनाने वालों के खिलाफ 4 फरवरी को देशद्रोह और साजिश रचने के आरोप में FIR दर्ज की थी. दिल्ली पुलिस ने गूगल से इस टूलकिट से जुड़ी जानकारी साझा करने को कहा और इसके बाद दिशा की गिरफ्तारी हुई. इस गिरफ्तारी ने देश का सियासी पारा भी चढ़ा दिया है. कांग्रेसी समेत वामपंथी दिशा जैसी आरोपी के पक्ष में उतर आए हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई बड़े विपक्षी नेताओं ने सरकार को इस मसले पर घेरा है.

तो वहीं ग्रेटा के अलावा अब तक 4 और किरदार सामने आए हैं. जिसमें दिशा रवि, एमओ धालीवाल, निकिता जैकब और शांतनु के नाम हैं. पुलिस के मुताबिकल इस प्रक्रिया में इन सबने खालिस्तानी संगठन ‘पोएटिक जस्टिस ग्रुप’ का साथ दिया, जो भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के एजेंडे पर काम करता है. दिशा रवि ने ही इस टूलकिट को ग्रेटा थनबर्ग के साथ शेयर किया था.

जहां दिशा रवि पर टूलकिट एडिट करने का आरोप है दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि को बीते रविवार बेंगलुरु से गिरफ्तार किया हैं. दिशा ने टूलकिट ग्रेटा तक पहुंचाई, लेकिन जब ये टूलकिट पब्लिक डोमेन में आ गई तो दिशा ने ग्रेटा से इसे हटाने को कहा.  इसके अलावा टूलकिट केस में सबसे अहम कड़ी एमओ धालीवाल है. दिल्ली पुलिस की जांच में धालीवाल के नाम का खुलासा हुआ है. धालीवाल ने सितंबर 2020 में सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि मैं खालिस्तानी हूं. तो वहीं गणतंत्र दिवस से पहले एक जूम मीटिंग हुई थी.

इसमें धालीवाल, निकिता और दिशा समेत बाकी लोग शामिल हुए थे. इसके अलावा दिशा रवि की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस को टूलकिट केस में निकिता जैकब की तलाश है. तो वहीं टूलकिट मामले में चौथा नाम है शांतनु का. उधर दिल्ली पुलिस ने भी प्रैस कान्फ्रेंस करके बताया है कि जितने आरोपी हैं ये खास्तानी प्रतिबंधित संगठन से मिले हुए थे. जनवरी में टूलकिट बनाया गया ताकि आंदोलन को बढ़ाया जा सके. इसे विदेशों में ले जाया सके और विदेशों में भारत के दूतावास को टारगेट किया जा सके. इस तरह से देश के खिलाफ साजिश रचने वालों पर एक्शन शुरू हो गया है.

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